Year Ender 2025 : साल 2025 की विदाई और नए साल की स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई है। यह साल कई बड़े बदलाव का गवाह बना। जहां एक ओर सोने और चांदी की कीमत में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर शेयर बाजार ने निवेशकों को निराश किया। सबसे चौंकाने वाली चाल चांदी की रही। रिटर्न देने में चांदी ने सोने को भी पीछे छोड़ दिया। आपको बता दें कि इस साल अबतक चांदी ने अपने निवेशकों को 107% का बंपर रिटर्न तो सोने ने 68% का रिटर्न दिया है लेकिन शेयर बाजार ने निराश किया है। सेंसेक्स और निफ्टी का रिटर्न मामूली 5% रहा है। आइए जानते हैं कि इस पूरे साल कहां निवेशकों की हुई चांदी और कहां लगा झटका।
सोना‑चांदी ने 2025 में दर्ज की जबरदस्त बढ़त, निवेशकों की रही झोली भरी।
सोने‑चांदी का तूफानी रिटर्न
2025 में सोने की कीमतों ने शानदार उछाल दिखाया। वहीं चांदी ने भी पीछे नहीं हटकर जोरदार वृद्धि दर्ज की। इस साल चांदी ने सोने को भी पछाड़ दिया यानी चांदी, सोने के मुकाबले बेहतर रिटर्न दे रही है। इन रिटर्न्स ने न सिर्फ ज्वेलरी‑निवेशकों को बल्कि उन निवेशकों को भी फायदा दिया, जो सोना या चांदी को एक सेफ‑हेवेन समझकर खरीदते हैं। चांदी ने एक सप्ताह में 12.13 प्रतिशत रिटर्न दिया, एक महीन में 19.70 प्रतिशत, तीन महीने में 44.91 प्रतिशत, 6 महीने में 77.73 प्रतिशत और 1 साल में 97.83 प्रतिशत रिटर्न दिया। चांदी की कीमत 1,80,900 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स मिलाकर) पर आ गई। जबकि सोना 1 सप्ताह में 1.75 प्रतिशत रिटर्न दिया। 1 महीने में 6.41 प्रतिशत, तीन महीने में 21.45 प्रतिशत, 6 महीने में 32.57 प्रतिशत, 1 साल में 68.14 प्रतिशत रिटर्न दिया। अभी सोने की कीमत 1, 30,000 प्रति 10 ग्राम के करीब है।
गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ ने मालामाल किया
गोल्ड ईटीएफ ने 1 साल में करीब 60 प्रतिशत रिटर्न दिया। SPDR गोल्ड शेयर्स (GLD) और abrdn फिजिकल गोल्ड शेयर्स ETF (SGOL) जैसे बड़े गोल्ड ETF ने एक साल में 58% से अधिक रिटर्न के साथ अच्छा परफार्मेंस दिया है। सिल्वर ईटीएफ की बात करें तो सबसे आगे रहने वालों में UTI Silver ETF ने करीब 100.89%, ICICI Prudential Silver ETF ने 100.72%, HDFC Silver ETF ने 100.29%, और SBI Silver ETF ने करीब 100% रिटर्न दिया है।
शेयर बाजार ने निराश किया
हालाकि 2025 में कभी‑कभी शेयर बाजार में उछाल देखी गई, लेकिन कुल मिलाकर 2025 में सोने ने शेयर बाजार जैसे विकल्पों को पीछे छोड़ दिया। भारतीय शेयर बाजार का सेंसेक्स ने एक साल में 5.30 प्रतिशत रिटर्न दिया। निफ्टी ने 6.38 प्रतिशत रिटर्न दिया। बहुत से लोग म्यूचुअल फंड के जरिये निवेश किया। लेकिन यहां लोगों को निराशा हाथ लगी। रिपोर्ट के मुताबिक 41 में से केवल 3 म्यूचुअल फंड ने बेहतर रिर्टन दिया। इससे साफ होता है कि इस साल शेयर बाजार की तुलना में सोना‑चांदी ने रिटर्न्स में बेहतर काम किया। खासकर वे निवेशक जिन्हें कम रिस्क चाहिए था।
क्यों चमकी सोना‑चांदी और क्यों कमजोर हुआ बाजार?
सोने और चांदी की रफ्तार के पीछे कुछ बड़े कारण रहे। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, विदेशी मुद्रास्फीति, डॉलर की कमजोरी और वैश्विक भू‑राजनीतिक तनावों की वजह से निवेशक सुरक्षित एसेट्स जैसे सोना या चांदी की ओर मुड़े। चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ी। इससे निवेश व औद्योगिक दोनों तरह की डिमांड बनी। दूसरी ओर, इक्विटी मार्केट में खासकर सेंसेक्स और निफ्टी अस्थिरता, विदेशी निवेशकों की सावधानी, और वैश्विक आर्थिक दबावों के कारण निवेशकों का विश्वास थोड़ा डगमगा जिससे शेयर बाजार की ग्रोथ सीमित रही। इसका परिणाम यह हुआ कि पारंपरिक शेयर‑निवेश की तुलना में, सोना‑चांदी निवेशकों के लिए इस साल अधिक आकर्षक साबित हुआ।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
पीटीआई के मुताबिक HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट कमोडिटीज, सौमिल गांधी ने कहा कि घरेलू बाजारों में सोने में बढ़त हुई, जिसे मजबूत ग्लोबल ट्रेंड और भारतीय करेंसी में कमजोरी का सपोर्ट मिला। गांधी ने कहा कि जैसे ही ग्लोबल कीमतें बढ़ीं, कमजोर रुपये के असर ने घरेलू मार्केट में बढ़त को बढ़ा दिया, जिससे विदेशी लेवल की तुलना में अधिक तेजी आई। उन्होंने आगे कहा कि फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की नरम बातों ने अगले हफ्ते की FOMC मीटिंग में 25 बेसिस पॉइंट्स रेट कट की उम्मीदों को मजबूत किया है, जिससे US डॉलर के लिए मुश्किलें पैदा हुई हैं और बुलियन को सपोर्ट मिला है। गांधी ने कहा कि इन्वेस्टर आज बाद में US ADP प्राइवेट-सेक्टर एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट और ISM सर्विसेज PMI का इंतजा कर रहे हैं, इन दोनों से बुलियन कीमतों के इकोनॉमिक आउटलुक और संभावित पॉलिसी डायरेक्शन और शॉर्ट-टर्म ट्रैजेक्टरी के बारे में और जानकारी मिलेगी।
निवेशकों के लिए सबक
2025 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निवेश में सिर्फ स्टॉक्स नहीं, बल्कि मिश्रित एसेट्स जैसे सोना, चांदी, और इक्विटी रखना कितना महत्वपूर्ण है। सोना‑चांदी जैसे कीमती धातुएं, विशेषकर अस्थिर आर्थिक और बाजार परिस्थितियों में, पोर्टफोलियो को संतुलन प्रदान करती हैं। सिर्फ शेयर बाजार पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि कभी‑कभी बाजार का मूड मंदा भी हो सकता है। चांदी और सोना, दोनों ही अलग-अलग कारणों से मजबूत रहे। इसलिए निवेशकों को अपने बजट, रिस्क‑सहनशीलता और निवेश अवधि (शॉर्ट‑टर्म या लॉन्ग‑टर्म) के आधार पर सही चुनना चाहिए।
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