Lakhapati Didi Yojna Startup Model : गांवों की महिलाओं के लिए सरकार ने अब ऐसा लक्ष्य रखा है, जिसका असर सिर्फ उनके घर की कमाई पर नहीं, बल्कि पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा। सरकार पहले 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य तय कर चुकी थी, जिसे समय से पहले पार कर लिया गया। अब मार्च 2029 तक 6 करोड़ महिलाओं को इस दायरे में लाने की योजना है।
लखपति दीदी योजना का बढ़ेगा दायरा
गांव की महिलाओं का अपना मॉडल
लखपति दीदी को किसी एक नौकरी या कारोबार से जोड़कर नहीं देखा जाता। यह दरअसल ऐसा मॉडल है, जिसमें स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला खेती, पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन, बकरी पालन, फूड प्रोसेसिंग, हस्तशिल्प, रिटेल या ग्रामीण सेवाओं जैसे कामों से अपनी घरेलू आय बढ़ाती है। यानी इसे गांवों की महिलाओं का अपना छोटा स्टार्टअप मॉडल कहा जा सकता है। फर्क इतना है कि यहां कारोबार की शुरुआत अक्सर बहुत छोटी पूंजी से होती है और आगे की कमाई से ही काम को बढ़ाया जाता है।
लखपति बनने के लिए ₹1 लाख कैसे?
सरकार के मुताबिक, लखपति दीदी वह स्वयं सहायता समूह सदस्य है, जिसकी सालाना घरेलू आय कम से कम ₹1 लाख हो। लेकिन सिर्फ एक साल में ₹1 लाख कमाना पर्याप्त नहीं है। आय को कम से कम 4 कृषि सीजन और या कारोबारी चक्रों तक टिकाऊ बनाए रखना होता है। औसत मासिक आय ₹10,000 या उससे ज्यादा होना भी जरूरी है। इसका मतलब यह है कि सरकार महिलाओं को सिर्फ एक बार की कमाई नहीं, बल्कि नियमित और टिकाऊ कमाई के मॉडल की तरफ ले जाना चाहती है।
सरकार सीधे ₹1 लाख नहीं देती
यह बात समझना सबसे जरूरी है। लखपति दीदी योजना का मतलब यह नहीं है कि महिला के खाते में सरकार सीधे ₹1 लाख जमा करती है। स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को वित्तीय मदद, प्रशिक्षण, कारोबार की योजना, बैंक लोन और बाजार से जुड़ने जैसी सुविधाओं का सहारा मिलता है। इसके बाद महिला अपने कारोबार से कमाई बढ़ाकर लखपति दीदी का दर्जा हासिल करती है। आधिकारिक लखपति दीदी पोर्टल भी इसे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की टिकाऊ आय बढ़ाने की पहल के तौर पर बताता है।
3.46 करोड़ महिलाएं जुड़ीं
सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2026 तक 3.46 करोड़ से ज्यादा स्वयं सहायता समूह सदस्य लखपति दीदी बन चुकी थीं। अब लक्ष्य इस संख्या को लगभग दोगुना करके 6 करोड़ तक पहुंचाने का है। यानी अगले चरण में फोकस सिर्फ महिलाओं की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे छोटे कारोबार से जोड़ने पर होगा जो गांव में ही रोजगार और नियमित आमदनी पैदा कर सकें। यही इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत है कि महिला सिर्फ योजना की लाभार्थी नहीं रहती, बल्कि अपने परिवार की कमाई बढ़ाने वाली कारोबारी बनती है।
