Women Empowerment Explained : भारत में महिलाएं अब केवल नौकरी करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपना कारोबार शुरू करके भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। छोटे उद्योगों से लेकर स्टार्टअप और तकनीकी क्षेत्रों तक महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। सरकार भी महिलाओं को कारोबार शुरू करने, उसके लिए पैसा जुटाने, जरूरी कौशल सीखने और अपने प्रोडक्ट्स को बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद कर रही है। इसके लिए कई योजनाएं और इनिशिएटिव चलाई जा रही हैं। इनका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उनके कारोबार को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर देना है। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में भी बदलाव दिखाई दे रहा है। आवधिक श्रम बल सर्वे (PLFS) के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर 2017-18 में 23.3% थी, जो 2025 में बढ़कर 40% हो गई। इसका मतलब है कि अब पहले के मुकाबले अधिक महिलाएं काम कर रही हैं या काम पाने की कोशिश कर रही हैं। इसी अवधि में रोजगार में शामिल महिलाओं का अनुपात भी 22% से बढ़कर 38.8% हो गया। वर्ष 2025 में देश में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की करीब 20 करोड़ महिलाएं काम कर रही थीं। हालांकि, महिलाओं की तरक्की के लिए केवल रोजगार बढ़ना ही काफी नहीं है। उन्हें अच्छी आय, सुरक्षित कार्यस्थल, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक फैसले लेने की आजादी मिलना भी जरूरी है।
महिला उद्यमिता को क्यों मिल रहा है बढ़ावा?
अपना कारोबार शुरू करने से महिलाओं को कमाई का नया साधन मिलता है। इससे वे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ अपनी बचत और संपत्ति भी बना सकती हैं। कारोबार बढ़ने पर दूसरी महिलाओं और युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। सरकार के पास मौजूद आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं छोटे उद्योगों और स्टार्टअप की दुनिया में अपनी जगह बना रही हैं। अक्टूबर 2026 तक देश में करीब 3.69 करोड़ रजिस्टर्ड सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) महिलाओं के स्वामित्व वाले थे। यह कुल रजिस्टर्ड MSME का करीबी 38% है। वहीं, मार्च 2026 तक 1.07 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप में कम-से-कम एक महिला डायरेक्टर या साझेदार थी। इसका मतलब है कि महिलाएं पारंपरिक छोटे कारोबार के साथ नए विचारों पर आधारित कंपनियां बनाने में भी आगे आ रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भी उनकी भागीदारी बढ़ी है। जुलाई 2026 तक मोबाइल फोन निर्माण के प्रत्यक्ष कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 70% थी। सेमीकंडक्टर उद्योग के वर्कफोर्स में मार्च 2025 तक महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 25% थी। ये आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं उत्पादन, तकनीक और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में भी योगदान दे रही हैं।
कारोबार शुरू करने में मदद करती है स्वावलंबिनी योजना
कई बार महिलाओं के पास अच्छा कारोबारी विचार होता है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि शुरुआत कैसे करें, पैसे का इंतजाम कहां से करें या अपने प्रोडक्ट्स को ग्राहकों तक कैसे पहुंचाएं। ऐसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए स्वावलंबिनी योजना शुरू की गई। फरवरी 2025 में इस योजना को असम, मेघालय, मिजोरम, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के छह उच्च शिक्षण संस्थानों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया। इसके तहत युवा महिलाओं को कारोबार से जुड़ी ट्रेनिंग, वित्तीय सलाह, बाजार की जानकारी, कानूनी सहायता और मेंटरशिप दी जाती है। मेंटरशिप का मतलब है कि अनुभवी लोग नए कारोबारियों को सही फैसले लेने और आगे बढ़ने में मार्गदर्शन देते हैं। इस योजना में 21 सप्ताह की मेंटरशिप भी शामिल है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम में 1,276 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया, जबकि लक्ष्य 1,200 का था। उद्यमिता विकास कार्यक्रम में भी 600 के लक्ष्य के मुकाबले 602 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण मिला। इससे महिलाओं को कारोबारी विचार को वास्तविक उद्यम में बदलने की तैयारी करने में मदद मिलती है।
यशस्विनी अभियान से कारोबार को औपचारिक पहचान
महिलाओं के लिए कारोबार शुरू करना ही नहीं, उसे सरकारी रिकॉर्ड में रजिस्टर्ड कराना और नए अवसरों से जोड़ना भी जरूरी है। यशस्विनी अभियान इसी दिशा में काम करता है। वर्ष 2024 में शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य महिला उद्यमिता को बढ़ावा देना और महिलाओं को उद्यम रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में सहायता देना है। यह अभियान महिला कारोबारियों को जागरूक करने, जरूरी जानकारी देने और उनकी क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देता है। इसके तहत महिला-स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए सरकारी खरीद में निर्धारित 3% लक्ष्य को पूरा करने में भी मदद की जाती है। जुलाई 2026 तक इस अभियान के माध्यम से 22 लाख से अधिक महिला-स्वामित्व वाले MSME रजिस्ट्र्रेशन को सुगम बनाया गया था। वित्त वर्ष 2025-26 में महिला-स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से सरकारी खरीद 3.8% तक पहुंच गई, जो निर्धारित 3% लक्ष्य से अधिक थी।
कारोबार के लिए पैसा कहां से मिलेगा?
किसी भी कारोबार को शुरू करने और आगे बढ़ाने के लिए पूंजी की जरुरत होती है। मशीन खरीदने, कच्चा माल जुटाने, दुकान खोलने, कर्मचारियों को भुगतान करने और प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने के लिए पैसे की जरुरत पड़ती है। लेकिन कई महिला कारोबारियों के लिए बैंक से कर्ज लेना मुश्किल हो सकता है, खासकर जब उनके पास गिरवी रखने के लिए संपत्ति न हो। इस समस्या को कम करने के लिए सरकार ने कई लोन और क्रेडिट गारंटी योजनाएं शुरू की हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत पात्र छोटे कारोबारियों को 20 लाख रुपये तक का बिना संपत्ति गिरवी रखे लोन मिल सकता है। अप्रैल 2026 तक इस योजना की शुरुआत से 57.79 करोड़ से अधिक लोन स्वीकृत किए जा चुके थे। इनमें कुल लोन का करीब दो-तिहाई हिस्सा महिलाओं के नाम पर था।
इसके अलावा, सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (CGTMSE) कारोबारियों को संस्थागत कर्ज दिलाने में मदद करती है। महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए इसमें 90% तक गारंटी कवरेज और गारंटी शुल्क पर 10% छूट का प्रावधान है। फरवरी 2026 तक महिला-स्वामित्व वाले उद्यमों के लिए करीब 30.75 लाख गारंटी स्वीकृत की गई थीं, जिनका कुल मूल्य करीब 2.07 लाख करोड़ रुपये था।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत नए गैर-कृषि सूक्ष्म उद्यम शुरू करने वाली पात्र महिलाओं को शहरी क्षेत्रों में 25% और ग्रामीण क्षेत्रों में 35% सब्सिडी मिल सकती है। मई 2026 तक इस योजना से सहायता पाने वाले सूक्ष्म उद्यमों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 40% थी। उन्हें वितरित कुल मार्जिन-मनी सब्सिडी का करीब 45% मिला था।
महिलाओं के हुनर को मिलेगा बड़ा बाजार! सरकारी योजनाओं से कैसे चमकेगा कारोबार? (तस्वीर-AI)
स्टार्टअप शुरू करने वाली महिलाओं के लिए भी सहायता
महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप को भी वित्तीय मदद देने के लिए कई योजनाएं हैं। स्टार्टअप्स के लिए निधियों की निधि (FFS) के तहत निवेश फंडों को पूंजी उपलब्ध कराई जाती है, जो आगे स्टार्टअप में निवेश करते हैं। जनवरी 2026 तक इस व्यवस्था के तहत समर्थित निवेश फंडों ने महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप में करीब 2,995 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना शुरुआती चरण के कारोबारों को उत्पाद विकसित करने, उसका परीक्षण करने और बाजार में उतारने के लिए वित्तीय सहायता देती है। जनवरी 2026 तक इस योजना के तहत महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप के लिए करीब 294 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की गई थी। वहीं, स्टार्टअप्स के लिए लोन गारंटी योजना के तहत महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप के करीब 39 करोड़ रुपये के लोन पर गारंटी दी गई थी।
वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 के तहत 20,393 महिलाओं को AI, 5,927 को सेमीकंडक्टर तकनीक और 76,671 महिलाओं को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा, महिलाओं को कार्यस्थल पर प्रशिक्षण देने वाली योजनाओं के जरिए भी नए अवसरों के लिए तैयार किया जा रहा है।
सुरक्षित नौकरी और सामाजिक सुरक्षा भी जरूरी
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कारोबार और कौशल के साथ सुरक्षित कार्यस्थल भी जरूरी हैं। नवंबर 2025 में लागू की गई चार श्रम संहिताओं का उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और कामकाज की परिस्थितियों को मजबूत करना है। इनके तहत महिलाओं के लिए मातृत्व लाभ, शिशु देखभाल केंद्र, शिकायत निवारण और समान वेतन जैसे विषयों पर प्रावधान शामिल हैं।
पात्र महिला कर्मचारियों को 26 सप्ताह तक का सवेतन मातृत्व अवकाश मिल सकता है। वहीं, 50 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में शिशु देखभाल केंद्र की सुविधा अनिवार्य है। महिलाओं को रात की पाली में काम करने की अनुमति भी दी जा सकती है, बशर्ते उनकी सहमति हो और जरूरी सुरक्षा उपाय किए जाएं।
क्या है इन इनिशिएटिव का बड़ा असर?
सरकारी योजनाओं का मकसद महिलाओं को सिर्फ आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें कारोबार शुरू करने से लेकर उसे आगे बढ़ाने तक मदद देना है। प्रशिक्षण से उन्हें जरूरी कौशल मिलता है, लोन योजनाएं पूंजी जुटाने में सहायता करती हैं और डिजिटल बाजार उन्हें ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचने का मौका देते हैं। हालांकि, इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए योजनाओं की जानकारी, आसान रजिस्ट्रेशन और बाजार की मांग को समझना भी जरूरी है। महिला उद्यमियों को वित्त, कौशल, बाजार और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना उनकी आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। इससे महिलाओं के कारोबार को आगे बढ़ने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है।
