Dollar vs Rupee : भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90 के पार नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव से 29 पैसे कमजोर था। बाजार एक्सपर्ट के मुताबिक हाल में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली, बैंकों की लगातार डॉलर खरीदारी और घरेलू बाजार में गिरावट की वजह से रुपये पर बड़ा दबाव देखा गया। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में बुधवार (3 दिसंबर 2025) सुबह रुपया 89.96 पर खुला था, लेकिन जल्द ही यह 90.25 तक गिर गया, जो अब तक का सबसे निचला इंट्रा-डे स्तर है। इससे पहले मंगलवार को भी रुपया 43 पैसे गिरकर 89.96 के ऑल-टाइम लो पर बंद हुआ था। लगातार दो दिन की इस बड़ी गिरावट ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है। देश की आजादी के समय रुपया काफी मजबूत था। 1 डॉलर की कीमत 1 रुपया के बराबर थी। लेकिन धीरे-धीरे रुपया गिरता चला गया। आइए जानते हैं क्यों इतना लुढ़क गया।
भारत-US ट्रेड डील में देरी से निवेशकों में अनिश्चितता
पीटीआई के मुताबिक फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर असमंजस ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है। LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के VP जतीन त्रिवेदी ने बताया कि ट्रेड डील की टाइमलाइन में बार-बार देरी होने से निवेशक अब भरोसे के बजाय ठोस ऐलान का इंतजार कर रहे हैं। इस स्थिति ने रुपये में बिकवाली को और तेज किया है। त्रिवेदी ने यह भी कहा कि मेटल और सोने-चांदी (बुलियन) की वैश्विक कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ गया है। दूसरी ओर अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ ने भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धा पर भी दबाव बढ़ाया है।
Dollar vs Rupee
बैंक और RBI की रणनीति से भी रुपया हुआ कमजोर
पीटीआई के मुताबिक फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स LLP के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और ट्रेजरी हेड अनिल कुमार भंसाली ने बताया कि सरकार और RBI निर्यातकों को बेहतर दाम दिलाने के लिए डॉलर को ऊंचे स्तर पर बनाए रखना चाह रहे हैं। इसी कारण पिछले कुछ दिनों से नेशनलाइज्ड बैंकों ने बड़े पैमाने पर डॉलर खरीदा, जिससे रुपये में और कमजोरी आई। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर RBI अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद ब्याज दरों में कटौती करता है, तो रुपये में और गिरावट देखने को मिल सकती है। MPC की बैठक बुधवार से शुरू हो रही है और 5 दिसंबर को ब्याज दरों पर फैसला आने की उम्मीद है। इसके बाद 10 दिसंबर को अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरों का ऐलान करेगा, जिसे लेकर भी बाजार सतर्क नजर आ रहा है।
डॉलर इंडेक्स और क्रूड ऑयल की हलचल का असर
बाजार में एक राहत की बात यह रही कि डॉलर इंडेक्स 0.18 प्रतिशत गिरकर 99.17 पर ट्रेड कर रहा था। आम तौर पर डॉलर इंडेक्स में गिरावट रुपये के लिए सकारात्मक मानी जाती है, लेकिन इस बार घरेलू कारक ज्यादा प्रभावी रहे। दूसरी ओर, ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम भी 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 62.43 डॉलर प्रति बैरल पर थे।
आजादी के समय था 1 डॉलर = 1 रुपया
15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी के समय रुपया अमेरिकी डॉलर के बराबर था यानी 1 डॉलर के बराबर 1 रुपये था। उस समय देश पर कोई विदेशी कर्ज नहीं था। स्वतंत्रता के बाद कल्याण और विकास गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष रूप से 1951 में पहली पंचवर्षीय योजना की शुरुआत के साथ सरकार ने बाहरी उधार लेना शुरू किया। विदेश से उधार लेने और योजना कार्यक्रमों को वित्तपोषित करने के लिए रुपया अवमूल्यन किया गया। यह कदम भारत को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली से जोड़ने वाला पहला बड़ा प्रयास था। इसने विकास और सामाजिक योजनाओं के लिए संसाधन मुहैया कराए, लेकिन रुपया वैश्विक मुद्रा उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो गया।
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इक्विटी मार्केट में गिरावट, FII की लगातार बिकवाली से दबाव
घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। सेंसेक्स इंट्रा-डे में 277.23 अंक या 0.33 प्रतिशत गिरकर 84,861.04 पर पहुंच गया। निफ्टी भी 111.70 अंक या 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,920.50 पर ट्रेड कर रहा था। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने मंगलवार को 3,642.30 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की। FII की भारी बिकवाली अक्सर रुपये पर दबाव डालती है, क्योंकि वे अपने निवेश निकालते हुए डॉलर खरीदते हैं।
कुल मिलाकर स्थिति क्या बताती है?
तेजी से बढ़ती डॉलर की मांग, वैश्विक अनिश्चितताएं, ट्रेड डील में देरी और घरेलू बाजार की कमजोरी मिलकर रुपये को दबाव में ला रही हैं। आने वाले दिनों में RBI की ब्याज दर नीति और अमेरिकी फेड का फैसला रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। फिलहाल बाजार की नजर इन दोनों बड़े घटनाक्रमों पर टिकी हुई ह, और रुपया 90 के पार बना रहेगा या नहीं, यह इन्हीं फैसलों पर निर्भर करेगा।
