शेयर बाजार में हर निवेशक की तलाश होती है, उस एक शेयर की, जो आने वाले कुछ साल में उसका पैसा 5 गुना, 10 गुना या उससे भी ज्यादा कर दे। लेकिन दिग्गज निवेशक देविना मेहरा के मुताबिक, अगला मल्टीबैगर पहले से पहचान लेने का दावा करने वाला कोई भी व्यक्ति आपको भ्रमित कर रहा है। उनके मुताबिक दुनिया का कोई भी निवेशक यह पहले से नहीं जानता कि कौन सा शेयर मल्टीबैगर रिटर्न देगा। यहां तक कि वॉरेन बफेट और राकेश झुनझुनवाला जैसे बड़े निवेशक भी किसी शेयर के मल्टीबैगर बनने की गारंटी नहीं दे सकते।
देविना मेहरा ने बताया बाजार में क्या मायने रखता है
मल्टीबैगर का पता पीछे मुड़कर चलता है
देविना मेहरा के मुताबिक किसी शेयर के दोगुना या तीन गुना होने की संभावना पर विचार किया जा सकता है, लेकिन 5-10 गुना या उससे ज्यादा रिटर्न को पहले से तय मान लेना गलत है। कंपनियों की यात्रा सीधी रेखा में नहीं चलती। कई बड़ी और सफल कंपनियों को भी अपने सफर में मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा है। यही वजह है कि किसी कंपनी की आज की सफलता देखकर यह मान लेना कि वह आगे भी लगातार मल्टीबैगर बनेगी, निवेश की सही रणनीति नहीं है। उनके मुताबिक कंपनियों का इतिहास पढ़ना जरूरी है, क्योंकि पीछे मुड़कर देखने पर ही पता चलता है कि बड़ी कंपनियों ने कितने उतार-चढ़ाव और संकटों का सामना किया।
अमेजन पर कैसे लिया था दांव?
देविना मेहरा ने अमेजन का उदाहरण देते हुए बताया कि जब उनकी टीम ने कंपनी पर मजबूत खरीदारी की राय दी थी, तब वॉल स्ट्रीट का बड़ा हिस्सा इसके खिलाफ था। उनका फैसला किसी भविष्यवाणी पर नहीं, बल्कि आंकड़ों पर आधारित था। उन्होंने बताया कि उस समय अमेजन के कैश फ्लो में बड़ा सुधार दिखाई दिया था। कंपनी ने एक तिमाही में करीब 220-240 मिलियन डॉलर का नकदी प्रवाह दर्ज किया था। इससे उन्हें लगा कि कंपनी के दिवालिया होने का जोखिम पहले जैसा नहीं रह गया है।
यानी अमेजन को लेकर उनकी कामयाबी का आधार यह नहीं था कि उन्होंने पहले से देख लिया था कि कंपनी भविष्य में कितनी बड़ी बनेगी। उन्होंने उस समय उपलब्ध आंकड़ों को पढ़कर निवेश का फैसला लिया था।
असली खेल मल्टीबैगर खोजने का नहीं
मेहरा का निवेश दर्शन यहीं सबसे ज्यादा अहम हो जाता है। उनका कहना है कि निवेशक को यह सोचकर बाजार में नहीं उतरना चाहिए कि वह दुनिया का सबसे अच्छा मल्टीबैगर खोज लेगा। बेहतर तरीका है कि एक संतुलित और विविधीकृत पोर्टफोलियो बनाया जाए। उनके मुताबिक 25-30 शेयरों के पोर्टफोलियो में भी कई शेयर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करेंगे। कुछ सामान्य रिटर्न देंगे और संभव है कि केवल दो-तीन शेयर ही असाधारण प्रदर्शन करें। इसलिए निवेशक को शुरुआत से ही यह मानकर चलना चाहिए कि हर दांव सही नहीं होगा।
बड़ा मुनाफा नहीं, बड़े नुकसान से बचना जरूरी
देविना मेहरा की सबसे अहम सीख है कि निवेश में पहला लक्ष्य तेजी से पैसा बनाना नहीं, बल्कि बड़ी पूंजी गंवाने से बचना होना चाहिए। उनके मुताबिक निवेश में आप तब जीतते हैं, जब आप हारने से बचते हैं। इसलिए जोखिम प्रबंधन, विविधीकरण और अनुशासन शेयर चुनने से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। उनका संदेश साफ है कि अगला मल्टीबैगर कौन होगा, यह कोई नहीं जानता। लेकिन अपने पैसे को बड़े नुकसान से कैसे बचाना है, यह निवेशक जरूर तय कर सकता है।
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डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी विशेषज्ञ की राय पर आधारित है। निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार से परामर्श जरूर करें।
