US National Debt : अमेरिका का सरकारी कर्ज पहली बार $40 ट्रिलियन के पार पहुंच गया है। 19 अगस्त, 2026 को जारी अमेरिकी ट्रेजरी (US Treasury) के आंकड़ों के मुताबिक कुल राष्ट्रीय कर्ज करीब $40.047 ट्रिलियन हो गया। आसान भाषा में समझें तो यह रकम भारत की करीब $4 ट्रिलियन से ज्यादा की अर्थव्यवस्था के लगभग 10 गुना के बराबर बैठती है। IMF के ताजा अनुमान के मुताबिक भारत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि 2026 में 6.4% रहने का अनुमान है।
यह सिर्फ एक बड़ा आंकड़ा नहीं है, बल्कि अमेरिका की तेजी से बिगड़ती राजकोषीय स्थिति की ओर इशारा करता है। सबसे खास बात यह है कि अमेरिका का कर्ज जनवरी 2022 में $30 ट्रिलियन के पार गया था। यानी करीब साढ़े चार साल में ही इसमें $10 ट्रिलियन की बढ़ोतरी हुई है। रॉयटर्स के मुताबिक 2017 में जब डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पहली बार राष्ट्रपति बने थे, तब अमेरिकी कर्ज करीब $19.95 ट्रिलियन था।
आखिर इतना कर्ज क्यों बढ़ रहा है?
अमेरिका लंबे समय से जितना कमाता है, उससे ज्यादा खर्च कर रहा है। इसका नतीजा लगातार बड़ा बजट घाटा (Budget Deficit) है। कोविड महामारी के दौरान राहत पैकेज और सरकारी खर्च ने उधारी को तेजी से बढ़ाया, लेकिन महामारी खत्म होने के बाद भी घाटा कम नहीं हुआ।
सोशल सिक्योरिटी, मेडिकेयर और हेल्थकेयर जैसे कार्यक्रमों पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ रक्षा खर्च (Defence Spending) भी ऊंची है। वहीं, टैक्स कटौती ने सरकार की रेवेन्यू ग्रोथ पर भी दबाव डाला है। यानी एक तरफ खर्च बढ़ रहा है और दूसरी तरफ सरकार की आय उस गति से नहीं बढ़ रही। यही gap नए कर्ज के जरिए भरा जा रहा है।
भविष्य पर सवाल खड़े कर रहीं नीतियां
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के जानकारों को कहना है कि ट्रंप प्रशासन की टैक्स कटौती और रक्षा खर्च नीतियां भी भविष्य के बजट घाटे को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं। रॉयटर्स के मुताबिक जुलाई में अमेरिकी बजट घाटा करीब $432 billion रहा, जो सबसे ज्यादा मासिक घाटे में शामिल है।
असली चिंता कर्ज नहीं, ब्याज का बोझ
$40 ट्रिलियन का आंकड़ा डरावना जरूर है, लेकिन बड़ी चुनौती अब ब्याज की लागत (Interest cost) है। जैसे-जैसे सरकार ज्यादा कर्ज लेती है और ट्रेजरी यील्ड (Treasury yields) ऊंची रहती हैं, पुराने और नए दोनों कर्ज पर ब्याज का खर्च बढ़ता जाता है।अमेरिकी सरकार का ब्याज खर्च ही अब मेडिकेयर से ज्यादा हो चुका है और संघीय बजट में सामाजिक सुरक्षा के बाद सबसे बड़े मदों में शामिल है।
19 साल के शीर्ष पर ट्रेजरी यील्ड
हाल में 30-ईयर US Treasury यील्ड 5.34% तक पहुंच गई है। यह करीब 19 साल का सबसे ऊंचा स्तर है। इसके बाद ट्रेजरी ने ने 10 से 30 साल की मैच्योरिटी वाले बॉन्ड के बायबैक का ऑपरेशन शुरू किया और आकार बढ़ाकर कम से कम $4 अरब प्रति ऑपरेशन कर दिया। इसका मकसद लंबे समय वाले बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी को सपोर्ट करना है।
भारत और दुनिया के लिए क्यों अहम?
अमेरिकी ट्रेजरी (डॉलर) को दुनिया के सबसे अहम सुरक्षित एसेट में माना जाता है। इसलिए अमेरिकी डॉलर में उधारी की लागत बढ़ने का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहता। बल्कि, ट्रेजरी यील्ड बढ़ती हैं, तो वैश्विक स्तर पर उधारी की लागत और वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ता है।
भारत पर कितना कर्ज?
भारत सरकार का कुल कर्ज और अन्य देनदारियां 31 मार्च, 2026 को करीब ₹200.53 लाख करोड़ थीं। 19 अगस्त, 2026 के एक्सचेंज रेट करीब ₹95.75 प्रति डॉलर के के हिसाब से यह $2,090 अरब यानी लगभग $2.09 ट्रिलियन है। यानी भारत पर अपनी जीडीपी का करीब आधा कर्ज है। वहीं, अमेरिकी का की जीडीपी करीब 30 अरब डॉलर है। इस तरह अमेरिका पर अपनी जीडीपी की तुलना में करीब 125% कर्ज है।
