अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने बुधवार को कहा कि अमेरिका में उनके खिलाफ आपराधिक मामला खारिज होने की खबर से अदाणी परिवार को निश्चित रूप से खुशी हुई, लेकिन इससे उन्हें इससे भी ज्यादा विनम्रता का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया था। यह बयान न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत द्वारा गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ आपराधिक आरोप खारिज किए जाने के बाद आया है।
अमेरिकी अदालत ने आपराधिक आरोप किए खारिज/Photo-PTI
"अपनी बात, अपनों के साथ"
PTI/भाषा के मुताबिक अदाणी ने कर्मचारियों और साझेदारों के साथ संवाद कार्यक्रम "अपनी बात, अपनों के साथ" के दूसरे संस्करण में 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट और उसके बाद अमेरिका के न्याय विभाग की ओर से दर्ज मामले पर विस्तार से बात की। यह कार्यक्रम न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत द्वारा अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ आपराधिक आरोप खारिज किए जाने के बाद आयोजित हुआ।
‘विश्वास किसी भी कानूनी अधिकार से बड़ा है’
गौतम अदाणी ने 2023 में समूह के 20,000 करोड़ रुपये के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) का उदाहरण देते हुए कहा कि पूरी तरह सब्सक्राइब होने के बावजूद समूह ने इसे वापस लेने का फैसला किया था। उन्होंने कहा, “विश्वास किसी भी कानूनी अधिकार से बड़ा होता है।” उनके मुताबिक, कानून किसी व्यक्ति को अधिकार देता है, लेकिन मूल्य यह तय करते हैं कि उन अधिकारों का इस्तेमाल कब किया जाना चाहिए।
हिंडनबर्ग के आरोपों के बाद बढ़ा विवाद
साल 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च ने अदाणी समूह पर शेयरों की कीमत में हेरफेर, विदेशी टैक्स हेवन के कथित अनुचित इस्तेमाल और अत्यधिक कर्ज से जुड़े आरोप लगाए थे। अदाणी समूह ने इन आरोपों को खारिज किया था। इसके बाद समूह ने अपना 20,000 करोड़ रुपये का FPO वापस ले लिया था।
इसके बाद नवंबर 2024 में अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अदाणी और अन्य लोगों पर भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के ठेके हासिल करने के लिए सरकारी अधिकारियों को करीब 26.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की रिश्वत देने की साजिश रचने और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने का आरोप लगाया था। गौतम अदाणी और समूह ने इन आरोपों से भी इनकार किया था।
अमेरिकी अदालत ने आपराधिक आरोप किए खारिज
न्यूयॉर्क की अमेरिकी जिला अदालत के न्यायाधीश निकोलस गैरॉफिस ने अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से मामला वापस लेने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया। इसके बाद गौतम अदाणी और सागर अदाणी के खिलाफ आपराधिक आरोप खारिज कर दिए गए। अदाणी ने कहा कि कानूनी कार्यवाही के दौरान भी समूह ने अपने कारोबार पर पूरा ध्यान बनाए रखा। कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं, ठेकेदारों, विक्रेताओं और दूसरे साझेदारों ने अपनी जिम्मेदारियां निभाना जारी रखा।
‘कठिन दौर को मजबूत वृद्धि में बदल दिया’
गौतम अदाणी ने कहा कि जब सार्वजनिक चर्चा का केंद्र कानूनी कार्यवाही थी, तब भी कर्मचारियों और साझेदारों ने बिना शोर किए कारोबार को आगे बढ़ाया, ग्राहकों को सेवाएं दीं और अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों की अटूट निष्ठा ने समूह के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर को मजबूत वृद्धि के दौर में बदलने में मदद की। उन्होंने कहा कि इस पूरे अनुभव से लोगों पर उनका भरोसा और मजबूत हुआ। अदाणी ने यह भी बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे कई लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाया और समर्थन किया, जिनसे उनकी कभी मुलाकात तक नहीं हुई।
आलोचना को आत्ममंथन का अवसर बताया
गौतम अदाणी ने समूह की आलोचना करने वालों के प्रति भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि किसी भी मंशा से की गई आलोचना आत्ममंथन और सुधार का अवसर देती है। उनका कहना था कि समूह को सवाल उठाने और आलोचना करने वालों की बातों से सीखने की कोशिश करनी चाहिए।
‘हमारी पीढ़ी को किस बात के लिए याद रखा जाएगा?’
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों का जिक्र करते हुए गौतम अदाणी ने कानूनी विवाद से आगे बढ़कर देश के लंबे समय के विकास पर जोर दिया। उन्होंने अदाणी परिवार के तीन लाख से ज्यादा कर्मचारियों और साझेदारों से पूछा कि उनकी पीढ़ी देश के लिए कैसी विरासत छोड़कर जाएगी।
समूह के बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते देश के बीच हर कर्मचारी और साझेदार को खुद से एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण सवाल पूछना चाहिए कि “हमारी पीढ़ी को किस बात के लिए याद रखा जाएगा?”
मुश्किल परिस्थितियां चरित्र को उजागर करती हैं
गौतम अदाणी ने कहा कि किशोरावस्था में अवसरों की तलाश में घर छोड़ने से लेकर अब तक के जीवन के अनुभवों ने उन्हें ईमानदारी, विनम्रता और दृढ़ता का महत्व सिखाया है। उन्होंने कहा कि चरित्र एक बिना तराशे हीरे की तरह होता है, जिसकी असली चमक धैर्य, अनुभव और विपरीत परिस्थितियों से सामने आती है। उन्होंने समुद्र मंथन की कथा का उदाहरण देते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियां चरित्र का निर्माण नहीं करतीं, बल्कि पहले से मौजूद चरित्र को उजागर करती हैं।
खावड़ा प्रोजेक्ट और युवा इंजीनियर का किया जिक्र
अदाणी ने कहा कि हिंडनबर्ग के आरोपों और अमेरिका की कानूनी कार्यवाही ने समूह के धैर्य, न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान और मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखने की क्षमता की परीक्षा ली। उन्होंने खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क में चल रहे काम और वहां युवा इंजीनियर अमित कुमार के साथ हुई बातचीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विकास का मतलब केवल बड़े बुनियादी ढांचे तैयार करना नहीं है, बल्कि उससे पैदा होने वाली उम्मीद, लोगों के सम्मान की पुनर्स्थापना और उनके जीवन में आने वाले बदलाव भी विकास का हिस्सा हैं।
संस्थापकों के बाद भी कायम रहें संस्थान
गौतम अदाणी ने कर्मचारियों और साझेदारों से ऐसे संस्थान बनाने का आह्वान किया जो अपने संस्थापकों के बाद भी लंबे समय तक कायम रहें। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल विश्वस्तरीय कारोबार खड़ा करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे संस्थान बनाने चाहिए जो व्यक्तियों से आगे बढ़कर अवसरों का विस्तार करें।
