Trump Richest Sitting USA President : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रियल एस्टेट बिजनेस के बारे में सब जानते हैं। दुनिया के करीब 20 देशों तक ट्रंप का कारोबार फैला है। लेकिन, इस साल उन्होंने सबसे ज्यादा पैसा अपने क्रिप्टो बिजनेस से बनाया है। हाल ही में सामने आए 900 से ज्यादा पन्नों के आधिकारिक संघीय वित्तीय खुलासे (Federal Financial Disclosure) के मुताबिक, ट्रंप ने पिछले एक साल में अपने क्रिप्टोकरेंसी बिजनेस से 1.2 अरब डॉलर (लगभग ₹10,000 करोड़) की बंपर कमाई की है। इस ऐतिहासिक आंकड़े के साथ ही ट्रंप न सिर्फ अमेरिकी इतिहास के सबसे अमीर व्यक्ति हैं जो राष्ट्रपति पद पर बैठे हैं, बल्कि वे पद पर रहते हुए सबसे ज्यादा निजी कमाई (Highest Earning Sitting President) करने वाले राष्ट्रपति भी बन गए हैं।
क्रिप्टो से प्रॉफिट बनाने में सबसे आगे ट्रंप
ट्रंप साम्राज्य में क्रिप्टो का दबदबा
जो क्रिप्टो स्टार्टअप्स ट्रंप के दोबारा शपथ लेने के समय बेहद शुरुआती दौर में थे, आज उन्होंने कमाई के मामले में ट्रंप परिवार के दशकों पुराने रीयल एस्टेट और प्रॉपर्टी बिजनेस को भी पीछे छोड़ दिया है। ट्रंप के इस डिजिटल साम्राज्य की सफलता के पीछे दो सबसे बड़े हथियार रहे। ट्रंप को उनके नए क्रिप्टो वेंचर 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' (World Liberty Financial) से $500 मिलियन (50 करोड़ डॉलर) से अधिक की कमाई हुई। इसके अलावा ट्रंप के चेहरे वाले सोवेनियर-टाइप मीम कॉइन्स और एनएफटी बेचने वाली कंपनी सीआईसी डिजिटल एलएलसी (CIC Digital LLC) ने ट्रंप की तिजोरी में $600 मिलियन (60 करोड़ डॉलर) से अधिक ट्रांसफर किए।
ट्रंप को फायदा निवेशकों को नुकसान
रिपोर्ट का एक अहम पहलू यह भी है कि जिन मीम कॉइन्स और टोकन्स की बिक्री से ट्रंप की बंपर कमाई हुई, उनकी कीमत बाद में ओपन मार्केट में काफी गिर गई। इसका मतलब यह है कि शुरुआती चरण में जुड़े कारोबार को बड़ा लाभ मिला, जबकि बाद में निवेश करने वाले कई निवेशकों को मूल्य गिरने का नुकसान उठाना पड़ा।
विदेशों में भी बढ़ा ट्रंप का कारोबार
क्रिप्टो के अलावा ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन ने पिछले साल पश्चिम एशिया सहित कई देशों में नए लाइसेंसिंग समझौते किए। इन समझौतों के जरिए ट्रंप ब्रांड का अंतरराष्ट्रीय विस्तार पहले की तुलना में काफी तेज़ हुआ है। हालांकि इन विदेशी व्यावसायिक सौदों को लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। आलोचकों का कहना है कि जिन देशों के साथ कारोबारी समझौते हुए हैं, उनमें से कई देश अमेरिकी सरकार के साथ टैरिफ, रक्षा सहयोग और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में हितों के टकराव (Conflict of Interest) को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं।
TIMES NOW Navbharat पर यह भी पढ़ें : AI पर Trump का यूटर्न! Anthropic के Fable और Mythos से प्रतिबंध हटा, ग्लोबल मार्केट में होंगे उपलब्ध
