Hormuz Strait : दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल Strait of Hormuz को लेकर ईरान और ओमान के बीच नई बातचीत शुरू हो गई है। दोनों देशों ने भविष्य के प्रबंधन के लिए अपने-अपने प्रस्ताव एक-दूसरे को सौंपे हैं। हालांकि, जहाजों के रूट, शुल्क, सुरक्षा और नियंत्रण जैसे कई मुद्दों पर अभी मतभेद बने हुए हैं। Hormuz से दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है। इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार और कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करता है। अगर दोनों देश मिलकर यहां शुल्क लगाते हैं, जो इससे सिर्फ क्रूड ही नहीं, बल्कि गैस, उर्वरक और तमाम तरह के पेट्रोकेमिकल की सप्लाई महंगी होने का खतरा है।
क्रूड ऑयल की सप्लाई को लग सकता है बड़ा झटका
ओमान का क्या प्रस्ताव है?
ओमान ने ईरान के सामने संयुक्त क्षेत्रीय प्रबंधन (Joint Regional Mechanism) का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत स्ट्रेट का संचालन किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं होगा। इसके अलावा यहां से गुजरने वाले जहाज स्वैच्छिक (Voluntary) शुल्क देंगे। यह पैसा नेविगेशन, पर्यावरण संरक्षण और सर्च एंड रेस्क्यू जैसी सेवाओं पर खर्च होगा। यह मॉडल Strait of Malacca से प्रेरित है, जहां इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर इसी तरह की व्यवस्था अपनाते हैं।
ईरान ने क्यों जताई आपत्ति?
ईरान का कहना है कि युद्ध के बाद सुरक्षा हालात बदल चुके हैं और पहले जैसी व्यवस्था स्वीकार नहीं की जा सकती। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी का कहना है कि ओमान का दोनों देशों के बीच बराबर ट्रांजिट रूट बांटने का प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है। इससे ईरान की सुरक्षा चिंताओं का समाधान नहीं होता।
क्या है ईरान का काउंटर प्लान?
ईरान ने ओमान को नया प्रस्ताव दिया है, जिसके अनुसार ईरान अपनी समुद्री सीमा से गुजरने वाले जहाजों का प्रबंधन खुद करेगा। वहीं, ओमान दूसरी दिशा के कुछ हिस्से का संचालन करेगा, लेकिन पूरे रूट का नहीं। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल उसकी अमेरिका से बातचीत की कोई योजना नहीं है, लेकिन ओमान के साथ वार्ता "स्टेप बाय स्टेप" जारी रहेगी।
सबसे बड़े विवाद कौन-कौन से हैं?
दोनों देशों के बीच अभी कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बनी है। मसलन, जहाज किस रूट से गुजरेंगे, शुल्क कितना देना होगा और ये नियम कौन तय करेगा। इसके अलावा समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने और सुरक्षा की जिम्मेदारी को लेकर भी बात नहीं बन पाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्री माइंस हटाने की जिम्मेदारी ईरान लेने को तैयार है।
GCC भी हुआ सक्रिय
अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) भी इस मामले में सक्रिय है। GCC के विदेश मंत्रियों ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस कर समुद्री मार्ग की सुरक्षा,
जहाजों की आवाजाही और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
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