FMCG कंपनियों के नतीजों में छिपा बढ़ती महंगाई का सच, आपकी जेब से जुड़ी कहानी

पश्चिम एशिया संकट की वजह से इस साल लगातार करीब 6 महीने से क्रूड की औसत कीमत 80 डॉलर से ऊपर है। इससे लागत बढ़ रही है। FMCG कंपनियों के घटते मार्जिन महंगाई बढ़ने का ऐलान कर रहे हैं।

क्या आपका ग्रॉसरी बिल बढ़ने लगा है? क्योंकि अगर आपको लग रहा है कि पिछले कुछ दिनों से साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, डिटर्जेंट, बिस्कुट या पैकेज्ड फूड पर आपका खर्च धीरे-धीरे बढ़ गया है, तो यह सिर्फ एहसास नहीं है। बल्कि, देश की बड़ी FMCG कंपनियों घटते मार्जिन्स का नतीजा है। देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), ITC और डाबर जैसी कंपनियों के नतीजे बता रहे हैं कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने कंपनियों की लागत बढ़ा दी है। ऐसे में कंपनियां या तो प्रोडक्ट महंगे कर रही हैं, या मुनाफा कम स्वीकार कर रही हैं, या फिर पैकेजिंग में बदलाव जैसे विकल्प अपना रही हैं। इसका सीधा असर आखिरकार ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।

FMCG margin

घटते मार्जिन से प्रॉफिट पर दबाव

नतीजों में महंगाई की कहानी

FMCG यानी Fast Moving Consumer Goods वे उत्पाद हैं, जिन्हें लोग रोज खरीदते हैं। इनमें साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, डिटर्जेंट, चाय, बिस्कुट, मसाले, पैकेज्ड फूड और स्किन केयर जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजों को अर्थव्यवस्था का 'हेल्थ चेक' माना जाता है। वजह साफ है, जब लोग खर्च कम करने लगते हैं या कंपनियों की लागत बढ़ने लगती है, तो उसका असर सबसे पहले इन्हीं कंपनियों की बिक्री और मुनाफे में दिखाई देता है।

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