Hormuz Crisis and LPG Supply : होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से भारत की रसोई गैस (LPG) आयात रणनीति पूरी तरह बदल गई है। अमेरिकी-ईरान युद्ध से पहले जहां भारत की 90% से ज्यादा आयातित LPG गल्फ देशों से आती थी, वह अब तेजी से अमेरिका पर निर्भर हो रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा अमेरिका को मिला है, जिसे भारत जैसा विशाल बाजार मिल गया है। वहीं भारत को लंबी दूरी, ऊंचे फ्रेट, युद्ध जोखिम बीमा और बदले हुए सप्लाई रूट की वजह से ज्यादा आयात लागत उठानी पड़ रही है।
होर्मुज बंदी ने बढ़ाया गैस संकट
युद्ध से पहले गल्फ था सबसे बड़ा सप्लायर
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक 2026 की शुरुआत तक भारत अपनी करीब 90% आयातित LPG यूएई, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे गल्फ देशों से खरीदता था। इनमें से अधिकांश कार्गो होर्मुज से होकर भारत पहुंचते थे। यही वजह थी कि भारत की LPG आपूर्ति काफी हद तक इस समुद्री मार्ग पर निर्भर थी।
होर्मुज संकट ने बदल दिया पूरा समीकरण
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई। कई शिपिंग कंपनियों ने जोखिम बढ़ने के कारण जहाज भेजने से परहेज किया, जबकि फ्रेट और युद्ध जोखिम बीमा तेजी से महंगे हो गए। नतीजा यह हुआ कि भारत को वैकल्पिक स्रोतों से LPG खरीदनी पड़ी और अमेरिका सबसे बड़ा सप्लायर बन गया।
अमेरिका को मिला भारत जैसा बड़ा बाजार
नवंबर 2025 में भारत की सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अमेरिका से 22 लाख टन LPG खरीदने का पहला वार्षिक समझौता किया था। लेकिन होर्मुज संकट के बाद अमेरिकी निर्यात में जबरदस्त उछाल आया। जून 2026 में भारत ने अमेरिका से 10 लाख टन से ज्यादा LPG खरीदी और जुलाई में अमेरिका की हिस्सेदारी भारत के कुल LPG आयात में 73% तक पहुंच गई। जनवरी में यह हिस्सेदारी सिर्फ 12% थी। जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान अमेरिका ने भारत को 36 लाख टन LPG की आपूर्ति की, जबकि यूएई, सऊदी अरब, कतर और कुवैत से संयुक्त आपूर्ति 53 लाख टन रही। पहली बार अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एकल LPG सप्लायर बन गया।
भारत को क्यों चुकानी पड़ रही ज्यादा कीमत?
अमेरिका से LPG खरीदने का मतलब सिर्फ गैस खरीदना नहीं है। अमेरिका से भारत की दूरी गल्फ देशों की तुलना में तीन गुना अधिक है। ऐसे में जहाजों का किराया, ईंधन खर्च, बीमा और युद्ध जोखिम प्रीमियम बढ़ जाता है। होर्मुज संकट के दौरान भारत आने वाले ऊर्जा कार्गो की लैंडेड कॉस्ट पर सीधा असर पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बड़ी चुनौती गैस की उपलब्धता नहीं, बल्कि ऊंचे फ्रेट और लॉजिस्टिक्स खर्च हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि युद्ध से पहले जहां सुपरटैंकर का चार्टर लगभग 20 लाख डॉलर प्रति यात्रा था, वहीं अब कुछ मामलों में यह बढ़कर 2.3 से 2.5 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया।
2027 तक और बढ़ेगी अमेरिकी हिस्सेदारी
भारत अब 2027 तक अपनी कुल LPG आयात जरूरत का 25% अमेरिका से खरीदने की योजना बना रहा है। इसके लिए सरकारी तेल कंपनियां जैसे IOC लंबी अवधि के टेंडर तैयार कर रही हैं। इंडियन ऑयल बहुत बड़े गैस कैरियर (VLGC) जहाजों में हिस्सेदारी खरीदने की योजना भी बना रही है, ताकि अमेरिका से बढ़ते आयात को संभाला जा सके।
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