Taxation On Unlisted Shares: भारत में शेयर बाजार के निवेशकों की संख्या 8 करोड़ से अधिक हो गई है। यदि आप भी शेयर बाजार निवेशक हैं तो आपको इससे जुड़े टैक्स नियमों की भी जानकारी होनी चाहिए। बता दें कि शेयर दो तरह के होते हैं। एक लिस्टेड, जो कि बीएसई (BSE) और (NSE) पर लिस्ट होते हैं। वहीं कुछ कंपनियां लिस्टेड तो नहीं होतीं, मगर उनके शेयरों में अनलिस्टेड मार्केट में फिर भी कारोबार होता है। यदि आप अनलिस्टेड बाजार में किसी कंपनी के शेयरों में खरीदारी-बिकवाली करके मुनाफा कमाते हैं तो उस पर भी टैक्स देना होता है। यहां हम आपको अनलिस्टेड मार्केट में शेयरों पर हुए मुनाफे पर लगने वाले टैक्स की जानकारी देंगे।
कैसे लगता है टैक्स
नॉन-लिस्टेड शेयरों से होने वाले प्रॉफिट को शेयरों की होल्डिंग अवधि (कितने दिन आपने अपने पास रखा) के आधार पर लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म के रूप में अलग-अलग कैटेगरी में रखा जाता है। प्रॉफिट को तब लॉन्ग टर्म की कैटेगरी में रखा जाएगा अगर शेयरों की होल्डिंग अवधि 2 वर्ष से अधिक है। इससे कम अवधि वाले शेयरों और उनसे हुए मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैटेगरी में रखा जाएगा।
कितना लगता है टैक्स
नॉन-लिस्टेड शेयरों पर ऐसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स पर निवेशकों के मार्जिनल रेट (प्रॉफिट) के अनुसार टैक्स लगाया जाएगा। दूसरी ओर, रेसिडेंट टैक्सपेयर्स के लिए आयकर अधिनियम की धारा 112 के तहत लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स पर 20% टैक्स लगाया जाता है और वे ऐसे लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स पर इंडेक्सेशन का बेनेफिट क्लेम करने के पात्र होंगे।
इसके अलावा, ऐसे टैक्सपेयर्स को साल के दौरान ऐसे अनलिस्टेड शेयरों के किसी भी ट्रांसफर की डिटेल को अपने लागू आयकर रिटर्न (आईटीआर) में रिपोर्ट करना होगा।
