कोरोना महामारी के दौरान भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। निफ्टी 50 टूटकर 7500 के निचले स्तर पर पहुंचा था। फिर स्टॉक मार्केट में शार्प रिकवरी आई। इससे निवेशकों को काफ कम समय में बंपर रिटर्न मिला। इसका असर देश के करोड़ों निवेशकों पर हुआ। उनके लिए शेयर बाजार कम समय में पैसे कमाने का जरिया बन गया। फिर क्या था? आम निवेशक परंपरागत निवेश माध्यम जैसे बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम्स, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) आदि में पैसा लगाने भूल ही गएं।
SIP के जरिये म्यूचुअल फंड में पैसे लगाने की जैसे होड़ सी शुरू हो गई है। इसके चलते हर महीने म्यूचुअल फंड में छोटे निवेशकों के हजारों करोड़ रुपये लगने लगे लेकिन पिछले करीब 2.5 साल से निवेशकों का मोहभंग धीरे—धीरे म्यूचुअल फंड से होने लगा है। ऐसा म्यूचुअल फंड के निगेटिव या एफडी से कम रिटर्न के कारण हुआ। ईरान संकट के कारण अब जब बाजार में बड़ी गिरावट जारी है तो निवेशकों को समझ में नहीं आ रहा कि वो क्या करें? क्या उन्होंने सिप को एकमात्र विकल्प चुनकर गलती कर ली? आइए SIP और Mutual Fund की इस दुनिया की असली तस्वीर को समझते हैं।
बैंकों के पास पैसे नहीं, म्यूचुअल फंड में लबालब
RBI की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बैंकों में नकदी की स्थिति (लिक्विडिटी) में गिरावट दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, नेट लिक्विडिटी सरप्लस घटकर ₹16,875 करोड़ रह गया, जो 22 जनवरी के बाद सबसे निचला स्तर है। यह आम निवेशकों द्वारा एफडी में पैसा निवेश करने के कारण हुआ है। वहीं, ज्यादा रिटर्न की चाह में म्यूचुअल फंड में लाखों करोड़ रुपये निवेश किए जा रहे हैं। आपको बता दें कि फरवरी 2026 में मासिक SIP इनफ्लो ₹29,845 करोड़ रहा, जबकि जनवरी में यह ₹31,000 करोड़ के पार पहुंच गया था। म्यूचुअल फंड की कुल संपत्ति अब लगभग ₹82 लाख करोड़ है, जिसमें अकेले SIP की संपत्ति लगभग ₹16.36 लाख करोड़ है। लगभग 9.92 करोड़ SIP खाते सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। घरों की वित्तीय बचत में इक्विटी और म्यूचुअल फंड का हिस्सा FY12 के लगभग 2% से बढ़कर FY25 में 15.2% हो गया है। अब व्यक्तिगत निवेशकों के पास लिस्टेड इक्विटी का 18.8% हिस्सा (सितंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार)है।
क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय परिवार शेयर बाजार में जरूरत से ज्यादा निवेश कर रहे हैं? SEBI के इन्वेस्टर सर्वे 2025 के अनुसार, केवल लगभग 9.5% परिवार ही सिक्योरिटीज मार्केट में निवेश करते हैं। कुल मिलाकर, इसमें भागीदारी अभी भी कम है। औसत भारतीय परिवार के पास इक्विटी से भरा पोर्टफोलियो नहीं है। दरअसल, असली मुद्दा कहीं और है। यह इस बारे में नहीं है कि कितने परिवार निवेश करते हैं। यह इस बारे में है कि जो लोग निवेश करते हैं, वे कहां और कैसे निवेश कर रहे हैं। वह कैसे की खतरे की घंटी है। यह समझना ज्यादा जरूरी है।
SIP से शेयर बाजार का जोखिम खत्म नहीं होता
आम निवेशकों के मन में यह धारणा है कि SIP के जरिये निवेश करने से शेयर बाजार का जोखिम खत्म हो जाता है। हालांकि, हकीकत में बिल्कुल ऐसा नहीं है। अगर ऐसा होता तो शेयर बाजार के गिरने पर पोर्टफोलियो क्यों नीचे आता है? उसे तो नहीं आना चाहिए था। निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि SIP शेयर बाजार से जुड़े जोखिम को कम नहीं करता। यह सिर्फ टाइमिंग से जुड़े जोखिम को कम करता है। अगर किसी निवेशक के पोर्टफोलियो में 80-90% मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स है तो मार्केट में 30-40% की गिरावट आने पर पोर्टफोलियो में भी 30-40% की कमी आएगी ही। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि पैसा हर महीने निवेश किया गया था।
SIP is always not good
SIP की सच्चाई को जानना जरूरी
SIP कर रहे लाखों निवेशकों में से बहुत कम हो सिप की सच्चाई पता हो। सिप से 20 साल में करोड़ रुपये जमा करने के सपने कुछ हजार के निवेश से दिखाए जाते हैं। हालांकि, यह समझना बहुत जरूरी है कि कितने निवेशक 20 साल तक निवेश करते हैं। अधिकांश परिवार 5 साल या उससे कम समय के लक्ष्यों के लिए SIP कर रहे हैं, जिससे वे घर के डाउन पेमेंट, बच्चों की शिक्षा, शादियां आदि का खर्च पूरा कर पाएं। फाइनेंशियल एक्सपर्ट का कहना है कि बहुत सारे नए निवेशकों ने शेयर बाजार में अभी तक लंबे समय तक चलने वाले मंदी के दौर का अनुभव नहीं किया है। अगर ऐसी स्थिति आएगी तो वो क्या करेंगे? इसलिए निवेश से पहले हर पहलुओं पर चिंतन करना जरूरी है।
FD-PPF कभी नहीं होंगे आउटडेटेड
हाल ही में मेडिकल इमरेंजसी के चलते म्यूचुअल फंड से भारी नुकसान में पैसा निकालने वाले असित मोदी कहते हैं कि यह समझना जरूरी है कि FD0PPF जैसे ट्रैडिशनल निवेश विकल्प कभी भी आउटडेटेड नहीं होंगे। थोड़े से अधिक रिटर्न की चाह में इनमें निवेश बंद कर देना बिल्कुल गलत है। आप एफडी में कुछ महीने से लेकर 10 साल तक निवेश कर सकते हैं। ऐसा कर कभी भी पैसे की जरूरत को पूरा कर सकते हैं। एफडी में आपको कम से कम नुकसान तो नहीं होगा।
वहीं, म्यूचुअल फंड में सारा पैसा डाल देने पर आपको 1 से 3 साल की अवधि में नुकसान की संभावना अधिक होगी। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी जरूरत को समझें। उसके अनुसार निवेश का प्लान बनाएं। सिर्फ अधिक रिटर्न की चाह में सिप करना सही नहीं है। सिप में जो सपने दिखाए जाते हैं, वो पूरे भी नहीं होते। कम से कम यहां आपको पहले से पता होता है कि मुझे मैच्योरिटी पर कितने पैसे मिलने वाले हैं।
