6 लाख की FD पर SBI 3 साल बाद कितने रुपये देगा, समझें पूरी कैलकुलेशन

सुरक्षित निवेश के लिए एफडी खुलवाने का विचार बना रहे हैं तो आपको स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम पसंद आ सकती है। बैंक एफडी पर आकर्षक ब्याज दरें ऑफर कर रहा है।

SBI FD Returns 2026: सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले लोगों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आज भी सबसे भरोसेमंद विकल्पों में गिनी जाती है। खासकर ऐसे समय में जब लोग बिना जोखिम के गारंटीड रिटर्न चाहते हैं, तब बैंक एफडी की मांग लगातार बनी रहती है। अगर आप भी एफडी में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो ये जानकारी आपके काम की हो सकती है। दरअसल, देश का सबसे बड़ा पब्लिक सेक्टर बैंक State Bank of India यानी SBI अपने ग्राहकों को अलग-अलग अवधि की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर आकर्षक ब्याज दरें ऑफर कर रहा है। ऐसे में आप SBI की 3 साल से अधिक अवधि (3 साल 1 दिन) वाली एफडी स्कीम में निवेश करने का विचार बना सकते हैं।

SBI FD Returns 2026

FD (Photo: iStock)

एफडी पर कितना रिटर्न मिलेगा

FD (Photo: iStock)

एसबीआई की ओर से फिलहाल 3 साल से ज्यादा की अवधि वाली एफडी पर सामान्य नागरिकों को 6.30 प्रतिशत ब्याज दिया जा रहा है। वहीं सीनियर सिटिजन्स को इसी अवधि के लिए 6.80 प्रतिशत की दर से रिटर्न मिल रहा है। मान लीजिये अगर कोई सामान्य नागरिक SBI की एफडी स्कीम में 6 लाख रुपये निवेश करता है और निवेश की अवधि 3 साल से अधिक रखता है, तो मैच्योरिटी पर उसे करीब 7,23,758 रुपये मिलेंगे। यानी निवेशक को मूल राशि के अलावा ब्याज के रूप में 1,23,758 रुपये अच्छा रिटर्न प्राप्त हो सकता है। वहीं, यही निवेश कोई सीनियर सिटिजन करता है, तो उसे मैच्योरिटी पर लगभग 7,34,518 रुपये मिल सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाला अतिरिक्त ब्याज उन्हें बेहतर कमाई का मौका देता है। यही वजह है कि रिटायरमेंट के बाद कई लोग अपनी बचत को एफडी में निवेश करना पसंद करते हैं। हालांकि, यह भी ध्यान रखें कि एफडी पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री नहीं होता है। अगर एक वित्त वर्ष में ब्याज तय सीमा से ज्यादा हो जाता है, तो बैंक TDS काट सकता है और निवेशक को अपनी आय के अनुसार उस पर टैक्स देना पड़ता है।

एफडी में क्यों करें निवेश

एफडी को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है क्योंकि इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता। शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड की तरह इसमें जोखिम कम होता है और निवेशक को पहले से पता रहता है कि मैच्योरिटी पर उसे कितनी रकम मिलेगी। यही कारण है कि मध्यम वर्ग और बुजुर्ग निवेशकों के बीच एफडी हमेशा से लोकप्रिय रही है।

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