महंगाई के मोर्चे पर राहत बरकरार, खुदरा महंगाई बढ़ी, लेकिन अब भी काबू में, जानें ताजा आंकड़ा

Retail inflation: दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति लगातार चौथे महीने भारतीय रिजर्व बैंक की निचली संतोषजनक सीमा से नीचे रही।सरकार ने केंद्रीय बैंक को यह जिम्मेदारी दी हुई है कि मुद्रास्फीति दो प्रतिशत की घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनी रहे।

Retail inflation: सब्जी, अंडा और दाल समेत रसोई की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण बीते महीने दिसंबर में खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी हुई। दिसंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 1.33 प्रतिशत पर पहुंच गई। हालांकि, अभी भी यह बहुत ही कम है। नवंबर में मुद्रास्फीति 0.71 प्रतिशत थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति में लगातार सातवें महीने गिरावट रही और यह शून्य से 2.71 प्रतिशत रही। हालांकि इसमें नवंबर के मुकाबले वृद्धि हुई है। नवंबर में यह शून्य से नीचे 3.91 प्रतिशत थी। महंगाई कंट्रोल में रहने से रिजर्व बैंक द्वारा एक और बार रेपो रेट में कटौती की उम्मीद बढ़ रही है। नए साल में रेपो रेट में कटौती कर आरबीआई ईएमआई में राहत दिलाने का काम कर सकता है।

खुदरा महंगाई

खुदरा महंगाई

आरबीआई के टारगेट से नीचे महंगाई दर

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े जारी करते हुए कहा कि दिसंबर 2025 के दौरान प्रमुख मुद्रास्फीति और खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्धि मुख्य रूप से व्यक्तिगत देखभाल और प्रभाव, सब्जियों, मांस और मछली, अंडे, मसालों तथा दालों एवं उनके उत्पादों की मुद्रास्फीति में वृद्धि के कारण हुई है।'' दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति लगातार चौथे महीने भारतीय रिजर्व बैंक की निचली संतोषजनक सीमा से नीचे रही।

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