देशभर में घरों की सबसे अधिक बिक्री त्योहारी सीजन के दौरान होती है। इसकी वजह यह है कि इस दौरान बिल्डर बिक्री बढ़ाने के लिए आकर्षक ऑफर्स और डिस्काउंट देते हैं। वहीं, भारत में त्योहारों के दौरान घर खरीदना शुभ भी माना जाता है। इसलिए भी लोग घर की खरीदारी करते हैं। लेकिन इस बार नवरात्रि के दौरान रियल एस्टेट बाजार ठंडा पड़ा है।
टाइम्स नाउ डिजिटल ने दिल्ली-NCR के कई प्रॉपर्टी ब्रोकरों और बिल्डरों से बातचीत कर प्रॉपर्टी बाजार की जमीनी स्थिति समझने की कोशिश की। नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर अधिकांश ब्रोकरों ने बाजार में सुस्ती की बात कही। लखनऊ, मुंबई समेत देश के दूसरे प्रमुख प्रॉपर्टी बाजारों से भी उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
जब हमने इस सुस्ती के कारणों की पड़ताल की, तो एक बात सामने आई कि सस्ते घरों की कमी और प्रॉपर्टी की कीमतों में असमान बढ़ोतरी ने लोगों को अपने फैसले टालने के लिए मजबूर किया है। जिन लोगों को घर खरीदना है, उनके बजट के मुताबिक प्रॉपर्टी बाजार में उपलब्ध नहीं है। यानी मांग होने के बावजूद, खरीदारों की जेब और घरों की कीमतों के बीच बड़ा अंतर है।
मुंबई से दिल्ली तक घरों की बिक्री गिरी
रियल एस्टेट रिसर्च और एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म 'प्रॉपइक्विटी' के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान भारत के नौ प्रमुख शहरों में आवासीय संपत्तियों की बिक्री में 6 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे यह घटकर 1.03 लाख यूनिट रह गई। इससे पहले जनवरी-मार्च 2026 में भी बिक्री सालाना आधार पर 13% गिरी थी और 18 तिमाहियों में पहली बार एक लाख यूनिट से नीचे आ गई थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि बिक्री में गिरावट के साथ नए घरों की लॉन्चिंग भी धीमी हुई है। इसलिए कहानी केवल मांग घटने की नहीं, बल्कि खरीदारों की पसंद, घरों की कीमत और बिल्डरों की नई सप्लाई की रणनीति से भी जुड़ी है।
बड़े बाजारों में पुणे में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जहां बिक्री 16 प्रतिशत घटकर 21,190 यूनिट से 17,860 यूनिट रह गई। दिल्ली-NCR में 12 प्रतिशत की गिरावट आई और बिक्री 9,230 यूनिट से घटकर 8,090 यूनिट रह गई। चेन्नई और कोलकाता, दोनों ही शहरों में बिक्री में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
लग्जरी घरों की मांग में बड़ी गिरावट
कोरोना महामारी के बाद बिल्डरों ने अपना पूरा ध्यान ₹1.5 करोड़ से लेकर ₹5 करोड़ तक के महंगे और लग्जरी फ्लैट्स बनाने पर लगा दिया। शुरुआती दौर में तो अमीरों और हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स ने ये घर खरीदे, लेकिन अब गिरावट का दौर शुरू हो गया है। यह भी रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बड़ा संकट है कि क्योंकि अधिकांश डेवलपर्स ने अफोर्डेबल का साथ छोड़कर लग्जरी पर फोकस बढ़ा दिया था। अब लग्जरी में भी गिरावट आने से प्रॉपर्टी मार्केट में मंदी आने का खतरा बढ़ गया है।
प्रॉपर्टी मार्केट में क्यों घटी घरों की मांग
रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी एनारॉक की रिपोर्ट के अनुसार, देश के सात प्रमुख शहरों में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान मकानों की औसत कीमत में सात प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दिल्ली-एनसीआर में आवासीय कीमतों में सबसे अधिक 13 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिल्ली-एनसीआर (नोएडा, गुरुग्राम), मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में बीते दो वर्षों में प्रॉपर्टी के दामों में 30% से 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अगर जमीनी स्तर पर देखें तो कीमत में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) में जिस 2BHK फ्लैट की कीमत 2020 में 30 से 35 लाख रुपये थी वह 2026 में बढ़कर 1 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गई है। रियल एस्टेट सेक्टर के जानकारों का कहना है कि ऐसा नहीं कि बिल्डर ने नया जमीन खरीदा या नया कंस्ट्रक्शन किया लेकिन फिर भी मनमाने तरीके से कीमत में बढ़ोतरी कर दी। इसका खामियाजा है कि लोग चाहकर भी घर नहीं खरीद पा रहे हैं।
रियल एस्टेट में सुस्ती का माहौल
क्या घरों की कीमतें घटेंगी?
आने वाले महीनों में बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि बिल्डर किस कीमत पर घर पेश करते हैं, खरीदारों की आमदनी और खरीदने की क्षमता कैसी रहती है और नई आपूर्ति कितनी उनकी जरूरतों से मेल खाती है। इसलिए कीमत में तुरंत गिरावट की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। हां, अगर मंदी की चपेट में यह सेक्टर आता है तो कीमतों में गिरावट आ सकती है।
