रियल एस्टेट में निवेश करना हर भारतीय की पहली पसंद में से एक रहा है, लेकिन जब अपने मेहनत की कमाई लगाने की बात आती है, तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि प्लॉट (जमीन) खरीदा जाए या फिर रेडी-टू-मूव फ्लैट (Ready-To-Move Flat)। दोनों ही विकल्पों की अपनी-अपनी खासियतें और जोखिम (Risk Factors) हैं। ऐसे में सही फैसला लेने के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि आपके बजट, समय और जरूरतों के हिसाब से कौन-सा निवेश आपको बेहतर रिटर्न दे सकता है।
प्लॉट या रेडी-टू-मूव फ्लैट? किसमें मिलता है ज्यादा रिटर्न और कम रिस्क
रिटर्न के मामले में क्या है बेस्ट?
बात अगर रिटर्न और ग्रोथ (Capital Appreciation) की करें, तो लंबे समय के निवेश में प्लॉट हमेशा फ्लैट से बाजी मार लेता है। जमीन की सप्लाई सीमित है, जबकि मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि प्लॉट की कीमतें फ्लैट की तुलना में तेजी से बढ़ती हैं और भविष्य में बंपर रिटर्न देती हैं। इसके अलावा, जमीन पर आपको अपने हिसाब से घर बनाने की पूरी आजादी मिलती है और निर्माण की उम्र (Depreciation) का असर जमीन के मूल्य पर नहीं पड़ता। हालांकि, प्लॉट में निवेश करने के लिए अक्सर एकमुश्त ज्यादा रकम की जरूरत होती है और इस पर फ्लैट की तरह तुरंत रेंटल इनकम मिलना आसान नहीं होता।दूसरी ओर, रेडी-टू-मूव फ्लैट उन लोगों के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प माना जाता है जो कम जोखिम और तुरंत उपयोग चाहते हैं।
क्या है सबसे बड़ा फायदा?
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको पजेशन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता और कंस्ट्रक्शन में देरी जैसी दिक्कतों का कोई खतरा नहीं रहता। आप तुरंत उसमें शिफ्ट हो सकते हैं या फिर उसे किराए पर चढ़ाकर पहले ही महीने से पैसिव इनकम (Rental Income) शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा, सोसायटियों में सिक्योरिटी, पार्किंग, जिम और क्लब हाउस जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलती हैं। हालांकि, पुरानी होने के साथ-साथ फ्लैट की बिल्डिंग की वैल्यू कम (Depreciate) होने लगती है, जिससे लंबे समय में प्लॉट की तुलना में इसमें कैपिटल ग्रोथ थोड़ी धीमी रहती है।
आपकी प्राथमिकता सुरक्षा, तुरंत रहने की सुविधा या नियमित रेंटल इनकम है, तो 'रेडी-टू-मूव फ्लैट' आपके लिए कम रिस्क वाला सही विकल्प है। लेकिन अगर आपका नजरिया लंबे समय का (Long Term) है और आप अपने पैसे पर सबसे ज्यादा रिटर्न पाना चाहते हैं, तो प्लॉट में निवेश करना अधिक समझदारी भरा फैसला साबित होगा।
