Nifty Seasonality April Effect: अप्रैल महीना आमतौर पर शेयर बाजार के लिए मजबूत माना जाता है। क्योंकि पिछले 10 साल में 8 बार Nifty ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। इस साल शेयर बाजार के शुरुआती तीन महीने बेहद निराशाजनक रहे हैं। हालांकि, अब अप्रैल की शुरुआत पॉजिटिव हो रही है। एक तरफ जहां पश्चिम एशिया में तनाव घटता दिख रहा है। वहीं, दूसरी तरफ भारतीय शेयर बाजार का वैल्यूएशन बेहद आकर्षक होने की वजह से निवेशकों के लौटने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, मौजूदा जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता, ऑयल और गैस इन्फ्रा को हुए नुकसान और भारतीय बाजार से विदेशी बिकवाली के दबाव में बाजार के April Effect पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
अप्रैल में अच्छे रिर्टन देता है निफ्टी
अप्रैल का मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड
ऐतिहासिक डेटा बताता है कि Nifty 50 के लिए अप्रैल महीना आमतौर पर तेजी वाला रहा है। पिछले 10 वर्षों में 8 बार इंडेक्स ने इस महीने में बढ़त दर्ज की है और औसतन करीब 3% रिटर्न दिया है। 2020 में कोविड के बाद निफ्टी ने अप्रैल में लगभग 15% की तेज रिकवरी दिखाई थी, जबकि 2018 और 2023 जैसे वर्षों में भी मजबूत उछाल देखने को मिला।
इस बार क्यों अलग है तस्वीर
हालांकि इस साल का सेटअप पहले से अलग दिखाई दे रहा है। मार्च में बाजार 11% से ज्यादा टूट चुका है, जो पिछले छह वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट में से एक है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव रहा है, जिसने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है।
महंगा तेल और रुपये की कमजोरी
तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। Brent Crude 100 डॉलर के ऊपर बना हुआ है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, रुपये में कमजोरी ने विदेशी निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ाया है, जिसके चलते FII लगातार बिकवाली कर रहे हैं। ये फैक्टर मिलकर बाजार की तेजी को सीमित कर सकते हैं।
पिछले 10 वर्ष में अप्रैल में निफ्टी में ने कितना रिटर्न दिया
क्या कायम रहेगा इस बार ट्रेंड
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार अप्रैल में अगर तेजी आती भी है तो वह मजबूत बुल रन के बजाय “रिलीफ रैली” हो सकती है। मौजूदा माहौल में बाजार “sell on rise” की रणनीति पर चल सकता है, जहां ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिलेगी।
किन फैक्टर्स पर रहेगी नजर
इस महीने बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख फैक्टर में RBI की मौद्रिक नीति, चौथी तिमाही के नतीजे और ग्लोबल जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम शामिल हैं। खासतौर पर IT और बैंकिंग सेक्टर के नतीजे निवेशकों के लिए अहम संकेत देंगे, जबकि क्रूड और करेंसी मूवमेंट बाजार की धारणा को प्रभावित करते रहेंगे।
डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
