अगर आप नौकरीपेशा हैं और किराए के घर में रहते हैं तो हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के जरिए अच्छी-खासी टैक्स बचत कर सकते हैं। हालांकि, HRA का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी नियमों और डॉक्यूमेंट्स की जानकारी होना बेहद जरूरी है। सही तरीके से दावा करने पर आपकी टैक्स देनदारी कम हो सकती है, जबकि नियमों का पालन न करने पर HRA का लाभ पाने से चूक भी सकते हैं। आइए जल्दी से हाउस रेंट अलाउंस से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां चेक कर लें-
कौन कर सकता है HRA का दावा?
HRA छूट केवल उन वेतनभोगी (Salaried) कर्मचारियों को मिलती है, जिनके वेतन में HRA शामिल होता है और जो वास्तव में किराए के मकान में रहते हैं। यह छूट केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनने वाले करदाताओं के लिए उपलब्ध है। अगर आपने नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) चुनी है, तो HRA छूट का लाभ नहीं मिलेगा।
HRA की छूट कैसे तय होती है?
आयकर नियमों के अनुसार HRA की टैक्स छूट तीन राशियों में से जो सबसे कम होती है, उसके आधार पर तय की जाती है-
- नियोक्ता (Employer) से प्राप्त वास्तविक HRA
- वेतन का 50% (निर्धारित मेट्रो शहरों के लिए) या 40% (अन्य शहरों के लिए)
- चुकाया गया किराया- बेसिक सैलरी का 10%
यही सबसे कम राशि HRA छूट के रूप में मान्य होती है।
माता-पिता को किराया देकर भी मिल सकता है HRA
अगर आप अपने माता-पिता के घर में रहते हैं और उन्हें वास्तव में किराया देते हैं तो भी HRA का दावा किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए किराए का समझौता (Rent Agreement), किराया रसीद (Rent Receipt) और भुगतान का उचित रिकॉर्ड होना चाहिए। गलत या फर्जी दस्तावेज देने पर दावा खारिज किया जा सकता है।
किन डॉक्यूमेंट्स की होगी जरूरत?
HRA का दावा करते समय आमतौर पर इन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत पड़ती है-
- किराया रसीद (Rent Receipt)
- रेंट एग्रीमेंट
- मकान मालिक का PAN (अगर सालाना किराया 1 लाख रुपये से अधिक है)
- किराया भुगतान का प्रमाण
ITR भरते समय रखें इन बातों का ध्यान
आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय HRA से जुड़ी जानकारी सही भरें । अगर आपने अपने नियोक्ता को अलग जानकारी दी है और ITR में अलग दावा किया है, तो आयकर विभाग की ओर से जांच हो सकती है। इसलिए सभी डॉक्यूमेंट्स और डिटेल्स एक-दूसरे से मेल खाने चाहिए।
