Iran War Impact on India: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने से ठीक पहले फरवरी में इंडियन बास्केट में क्रूड ऑयल का भाव $69 प्रति बैरल था। 26-27 फरवरी से यह युद्ध शुरू हुआ और एक महीने से भी कम समय में यानी 16 मार्च को इंडियन बास्केट में क्रूड का भाव $142.69 प्रति बैरल पहुंच गया है।
फरवरी 2026 में भारतीय बास्केट क्रूड ऑयल की औसत कीमत $69.01 प्रति बैरल थी। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के मुताबिक 16 मार्च, 2026 को यह उछलकर $142.69 प्रति बैरल पर पहुंच गई। यानी एक महीने से भी कम समय में कीमत $73.68 बढ़ी, जो करीब 107% का उछाल है। दूसरे शब्दों में कहें, तो भारत में क्रूड आयात का दाम लगभग डबल हो गया है। मार्च महीने का अब तक का औसत $108.23 प्रति बैरल है, जो भी फरवरी के मुकाबले 57% ज्यादा है।
एक झटके में बदल गया 11 महीने का ट्रेंड
PPAC डाटा के मुताबिक अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक 11 महीनों के दौरान भारतीय बास्केट में क्रूड का औसत दाम $66.81 प्रति बैरल रहा। इस दौरान दिसंबर 2025 में $62.20 सबसे निचला और जुलाई 2025 में $70.95 सबसे ऊंचा स्तर रहा।यानी पूरे साल सिर्फ $8.75 का उतार-चढ़ाव रहा। लेकिन 16 मार्च को यह $142.69 पर पहुंच गया, जो Low से $80.49 ऊपर है, जो 11 महीने की पूरी रेंज से 9 गुना बड़ा उछाल है।
Crude Oil in Indian Basket
मार्च का औसत भी 60% से ज्यादा
हैरान करने वाली बात यह है कि मार्च का औसत ही $108.23 है, जो पिछले 11 महीनों के औसत $66.81 से 62% ज्यादा है। यानी पूरे मार्च महीने में एक भी दिन क्रूड 11 महीने के सामान्य रेंज में नहीं रहा। जबकि, 16 मार्च को तो यह विस्फोटक तेजी के साथ $142.69 तक पहुंच गया।
EMI से इकोनॉमी तक झटका
भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है। जब क्रूड $66 था, तब भी देश हर दिन करीब ₹900 करोड़ का तेल खरीद रहा था। अब $142 पर यह बिल लगभग दोगुना हो गया है। इसका सीधा असर चार जगह पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतें, ट्रांसपोर्ट महंगा होने से हर चीज का दाम बढ़ेगा। महंगाई बढ़ने से RBI का ब्याज दरें बढ़ सकता है। इस तरह देश के स्तर पर जहां, पूरी इकोनॉमी पर इसका असर आ सकता है। वहीं, व्यक्तिगत तौर पर देखें, तो Home Loan से लेकर तमाम EMI बढ़ सकती हैं। इसके अलावा रसोई से सेविंग्स तक झटका लग सकता है।
कब तक होगा इसका असर?
बड़ा सवाल यह है कि $142 टिकेगा या गिरेगा? इसके दो नतीजे हो सकते हैं। अगर ईरान संकट बढ़ा और लंबा खिंचा, तो क्रूड $150-160 भी पहुंच सकता है। वहं, अगर भारत की डिप्लोमेसी काम आई या OPEC+ ने प्रोडक्शन बढ़ाया, तो यह $110-120 तक आ सकता है। लेकिन, वापस 60-70 रेंज में वापसी जल्द संभव नहीं दिखती है। क्योंकि, मार्च का औसत $108.23 ही बता रहा है कि यह कोई सिंगल डे स्पाइक नहीं, बल्कि सस्टेन हाई है, जो भारत के लिए लंबे समय तक चुनौती बना रह सकता है।
Crude Indian Basket
सरकार के हाथ में क्या?
युद्ध शुरू होने से अब तक G20 देशों में रिटेल स्तर पर डीजल-पेट्रोल के दाम 24% तक बढ़ गए हैं। लेकिन, भारत में अभी ऐसा नहीं हुआ है। लेकिन, बड़ा सवाल यही है कि सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कब तक इस झटके को सहती हैं। क्योंकि, जब इसे ग्राहको तक पास किया जाएगा, तो क्रूड के $142 के स्तर से पेट्रोल की कीमत ₹120-130 प्रति लीटर के पार जा सकती है। जबकि, फिलहाल औसत रिटेल कीमत ₹94-96 के आसपास है। यह गैप सरकार के लिए लंबे समय तक झेलना मुश्किल है। हालांकि, कई राज्यों में चुनाव को देखते हुए तत्काल बढ़ोतरी की आशंका कम है। लेकिन अगर क्रूड का औसत $120 से 140 तक पहुंचता है, तो आने वाले दिनों में ₹10-15 प्रति लीटर की बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या है एक्सपर्ट की राय?
एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि बाजार में इस डाटा का इस्तेमाल नहीं होता है। ऐसे में इस डाटा पर कोई भी कमेंट नहीं किया जा सकता है।फिलहाल, ब्रेंड क्रूड का भाव करीब 101 डॉलर प्रति बैरल है, जो भारत में बेंचमार्क माना जाता है। वहीं, भारतीय बास्केट में आमतौर पर ब्रेंड की तुलना में भाव 4 से 6 डॉलर तक कम होता है। अगर, वाकई क्रूड का भाव 142 डॉलर तक पहुंच जाएगा, तो बाजार हाहाकार मच जाएगा। क्योंकि यह सिर्फ कोई बढ़ता-घटता एक नंबर नहीं रह गया है। बल्कि, देश की एनर्जी की लाइफ लाइन है। इससे पहले 9 मार्च को पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया था कि फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की कोई आशंका नहीं है।
शेयर बाजार में कहां दिखेगा असर?
क्रूड के $142 पर पहुंचने से शेयर बाजार में साफ दो खेमे बन गए हैं। ONGC और Oil India जैसी कंपनियों को हर बैरल पर ज्यादा रेवेन्यू मिल सकता है। वहीं, IndiGo और Air India जैसी कंपनियों को नुकसान होगा, क्योंकि इनकी ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ सकती है। जबकि, HPCL, BPCL और IOC जैसी OMCs भी बुरी स्थिति में फंस सकती हैं। क्योंकि इन कंपनियों को महंगा तेल खरीदकर सस्ता तेल बेचना पड़ सकता है। इसके अलावा Asian Paints, MRF जैसी कंपनियों के रॉ मटेरियल भी महंगे हो सकते हैं, जिससे इनके मार्जिन बढ़ सकते हैं।
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