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कोयला देगा ऊर्जा आजादी, गैस प्रोडक्शन में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, जानिए क्या है कोल गैसीकरण प्रोजेक्ट?

कोयला गैसीफिकेशन का उद्देश्य कोयले को गैस (सिनगैस) में बदलकर भारत को ऊर्जा और केमिकल सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार ने 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीफिकेशन का लक्ष्य रखा है, जिसमें करीब ₹4 लाख करोड़ निवेश का अनुमान है। इस तकनीक से उर्वरक, मेथनॉल, हाइड्रोजन और बिजली उत्पादन संभव होगा, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी।

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कोयला बनेगा 'नीला ईंधन
Authored by: Alok Kumr
Updated Apr 5, 2026, 11:08 IST

ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से भारत में तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हुई है। होर्मुज बंद होने का असर तेल से अधिक गैस की सप्लाई पर पड़ा है, क्योंकि इसी रूट से भारत अपनी जरूरत का करीब 80% गैस की आपूर्ति करता है। इस संकट के बाद अब भारत सरकार ने दूसरे सेक्टर की तरह भी गैस प्रोडक्शन में आत्मनिर्भर बनने की फैसला किया है। आपको बता दें कि भारत सरकार पहले ही ‘कोल टू गैस मिशन’ शुरू कर चुकी है। इस स्कीम के तहत देश में कोयले से गैस प्रोडक्शन किया जाएगा। सरकार इस मिशन पर जोर—शोर से काम कर रही है। आइए जानते हैं कि क्या है कोल गैसीकरण प्रोजेक्ट और कैसे इसके जरिये भारत सरकार गैस में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी में है।

भारत में कोयले का विशाल भंडार

भारत के पास कोयले का विशाल भंडार है। दुनिया में भारत, कोयले के भंडार में पांचवें स्थान पर आता है। सरकार ने 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने हाल ही में बताया था कि कोल गैसीकरण, सरकार की रणनीति का व्यापक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ाना और देश के प्रचुर कोयला भंडारों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। मंत्री ने बताया कि 7 गैसीकरण परियोजनाओं में से दो प्रोजेक्ट जल्द ही देश में शुरू हो जाएंगी।

क्या है कोल गैसीकरण प्रोजेक्ट?

कोल गैसीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयले को सीधे जलाया नहीं जाता, बल्कि इसे ऑक्सीजन और भाप के साथ नियंत्रित परिस्थितियों में गर्म किया जाता है। इससे एक गैस निकलती है जिसे 'सिनगैस' (Syngas) कहते हैं। इस सिनगैस का उपयोग अमोनिया, हाइड्रोजन, मेथनॉल और नेचुरल गैस बनाने में किया जा सकता है। चीन इस तकनीक का ग्लोबल लीडर है। वह अपने 90% अमोनिया (खाद बनाने के लिए जरूरी) का उत्पादन कोयले को गैस बनाकर करता है। चीन सालाना 80 MMTPA गैस का उत्पादन कर रहा है। भारत, फिलहाल यूरिया और खाद बनाने के लिए महंगी आयातित 'नेचुरल गैस'पर निर्भर हैं। अगर भारत अपने घरेलू कोयले से गैस बनाता है, तो खाद की कीमतें कम होंगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

₹8,500 करोड़ का प्रोत्साहन पैकेज

केंद्र सरकार ने कोयला गैसीकरण के लिए प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत, कोल इंडिया (CIL) और GAIL मिलकर बड़े प्रोजेक्ट्स लगा रहे हैं। लक्ष्य है कि 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले का गैसीकरण किया जाए। इससे न केवल गैस मिलेगी, बल्कि स्टील और केमिकल सेक्टर को भी सस्ता कच्चा माल मिलेगा। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने हाल ही में बताया था कि सरकार ने सरकारी और निजी क्षेत्र की परियोजनाओं को गति देने के लिए स₹8,500 करोड़ के वित्तीय प्रोत्साहन की शुरुआत की है। वर्तमान में ₹64,000 करोड़ से अधिक का निवेश पाइपलाइन में है और कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है।

गैस में 'आत्मनिर्भरता' बहुत जरूरी

भारत अपनी कुल गैस का 30% खाद कारखानों को देता है, फिर भी हम चीन से खाद आयात करने को मजबूर हैं। अगर कोयले से गैस बनाने लगे तो हम इस क्षेत्र में आसानी से आत्मनिर्भर बन सकते हैं। बिजली के लिए कोयला जलाना प्रदूषणकारी है, लेकिन उसे गैस (सिनगैस) में बदलना एक स्वच्छ और रणनीतिक विकल्प है। बता दें कि भारत अभी कच्चे तेल के लगभग 83%, प्राकृतिक गैस के 50% और मेथनॉल एवं उर्वरकों के 90% से अधिक आयात पर निर्भर है।

केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी के अनुसार, कोयला गैसीकरण भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता कम करने और औद्योगिक विकास को सहयोग देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मंत्री ने बताया था कि भारत के विशाल कोयला भंडार को लेकर अनुमान लगाया कि यह लगभग 400 अरब टन है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े भंडारों में से एक है। यहां ऊर्जा मिश्रण में कोयले का हिस्सा लगभग 55% और बिजली उत्पादन में लगभग 74% है। वर्तमान में कोयले की वार्षिक मांग लगभग एक अरब टन है।

Coal gasification scheme between iran crisis

Coal gasification scheme between iran crisis

ईंधन, रसायन, उर्वरक में होगा इस्तेमाल

केंद्रीय मंत्री रेड्डी के अनुसार, कोयला गैसीकरण को एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक है जो भारत की विदेशी निर्भरता को जड़ से खत्म कर सकती है। कोयले से बने गैस का इस्तेमाल केवल ईंधन के रूप में ही नहीं, बल्कि स्वच्छ ईंधन, कीमती रसायन, उर्वरक (खाद) और हाइड्रोजन बनाने में भी किया जा सकता है।

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