India Economic Conclave 2023: इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2023 (IEC 2023) में अपने संबोधन के दौरान IDFC First Bank के एमडी और सीईओ ने वी वैद्यनाथन (V. Vaidyanathan) ने भारत के भविष्य को लेकर कई बातें कहीं। IEC 2023 की थीम है Third Emerging Superpower, इसी की जिक्र करते हुए वैद्यनाथन ने कहा कि 2030 तक भारत 7 ट्रिलियन (लाख करोड़) डॉलर की इकोनॉमी बन जाएगा, जो इस समय 3.4 ट्रिलियन है। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत की इकोनॉमी के 30-40 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। वैद्यनाथन के मुताबिक जीडीपी सिर्फ नंबर नहीं हैं बल्कि इसका असर लोगों के लाइफ ऑफ स्टैंडर्ड, हेल्थ, शिक्षा, सड़कें और इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ता है।
इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में वी वैद्यनाथन
20 साल में 5 गुना बढ़ी प्रति व्यक्ति आय
वैद्यनाथन ने बताया कि 2000 में देश की प्रति व्यक्ति आय (Per Capita GDP) 442 डॉलर (आज के हिसाब से 36450 रु) थी, जो 2008 में 1000 डॉलर (82467 रु) तक पहुंची। 2020 में यह 2000 डॉलर (1.64 लाख रु) तक पहुंची। 2030 में 7 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी के हिसाब से प्रति व्यक्ति आय करीब 4700 डॉलर (3.87 लाख रु) होगी।
यहां देखें वी वैद्यनाथन का पूरा संबोधन
आजादी के बाद 45 साल कुछ नहीं हुआ
वैद्यनाथन ने अपने संबोधन में कहा कि आजादी के बाद 45 सालों में कुछ नहीं हुआ। भारत की जीडीपी फ्लैट रही। यह चुकाने के लिए बहुत बड़ी कीमत है। आप इसके लिए भारत की गरीबी या लोकतंत्र को दोष नहीं दे सकते।
दक्षिण एशिया के बाकी देश जैसे कि ताईवान, हॉन्ग-कॉन्ग, मलेशिया और सिंगापुर 1960 में भारत जितने गरीब थे। भारत समेत इन देशों की प्रति व्यक्ति आय भी 100-130 डॉलर के करीब थी। मगर 1990 तक 30 सालों में इन देशों की प्रति व्यक्ति आय 6500-7000 डॉलर तक पहुंच गई थी, जहां तक हमारी प्रति व्यक्ति आय आज तक नहीं पहुंची है।
1990 के बाद भारत में हुए रिफॉर्म
वैद्यनाथन के मुताबिक 1990 के बाद भारत में रिफॉर्म हुए और अब हर 10 साल में भारतीयों की प्रति व्यक्ति आय डबल हो रही है। आज राज्यों और केंद्र सरकार दोनों का मिलाकर टैक्स कलेक्शन करीब 47 लाख करोड़ रु है। ये जीडीपी का 17 फीसदी है।
