नहीं माना भारत! अमेरिकी दबाव को दरकिनार कर रूस से खरीदा रिकॉर्ड तेल, क्या हैं इसके मायने?

भारत की भूमिका केवल तेल खरीदार होने तक ही सीमित नहीं है। घरेलू रिफाइनरी इकाइयां रूसी कच्चे तेल को प्रसंस्कृत कर प्रतिबंध लगाने वाले देशों को भी पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात कर रही हैं।

अमेरिका

के दबाव के बावजूद रूस से भारत बंपर तेल की खरीद कर रहा है। सोमवार को शोध संस्थान 'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (सीआरईए) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने जुलाई में रूस से 5.5 अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल खरीदा, जो जून की तुलना में मात्रा के आधार पर 2.1 प्रतिशत अधिक है। यह लगातार दूसरा महीना है जब भारत ने अमेरिकी दबाबों को ठेंगा दिखाते हुए रिकॉर्ड तेल की खरीदारी की है। जानकारों का कहना है कि यह भारत की रणनीति जीत है। भारत अमेरिका समेत पश्चिमी देशों को बताना चाहता है कि वह अपनी एनर्जी जरूरत को पूरा करने के लिए किसी भी देश से खरीदारी करेगा और वह किसी विदेशी दबाब में नहीं आएगा।

Crude Oil

रूस से तेल आयात

रूस से तेल खरीदने में भारत नंबर-1

वर्ष 2021 में रूस से तेल आयात एक लाख बीपीडी से भी कम था, जो 2023 में बढ़कर करीब 18 लाख बीपीडी हो गया और रूस 39 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था। सीआरईए ने कहा, "पिछले महीने भारत रूस से जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा, जिसने कुल 6.4 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन आयात किए। इसमें 5.5 अरब यूरो का कच्चा तेल, 51.2 करोड़ यूरो का कोयला और 34.1 करोड़ यूरो के तेल उत्पाद शामिल हैं।"

जुलाई में आयात में बढ़ोतरी मुख्यतः छोटे टर्मिनल के जरिये हुई। एचएमईएल मुंद्रा से आयात 58 प्रतिशत और इंडियन ऑयल के वाडिनार टर्मिनल पर 35 प्रतिशत बढ़ा, जबकि मुंबई के जरिये आयात में 37 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जामनगर में आयात स्थिर रहा, जबकि पारादीप में 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

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