स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव, फिर भी भारत का कच्चे तेल का आयात मजबूत

रूस से भारत का कच्चे तेल आयात बढ़कर करीब 27 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया, जो जून में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से अधिक है। इससे रूस, भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

भारत के कच्चे तेल आयात पर होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया तनाव का असर सीमित रहने की संभावना है। हालांकि, यदि क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है तो एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति प्रभावित हो सकती है तथा जहाजरानी लागत बढ़ सकती है। केप्लर के एक विश्लेषक ने यह बात कही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संघर्षविराम संबंधी टिप्पणियों के बाद क्षेत्र में हुई ताजा झड़पों ने दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

Hormuz Strai

पिछले कुछ समय से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनियाभर के लिए बड़ी टेंशन बना हुआ है।

केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि भारत की कच्चे तेल आपूर्ति पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय तेल शोधन कंपनियों ने आयात स्रोतों में विविधता लाई है। उन्होंने कहा, "हालिया तनाव बढ़ने से पहले भी होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये कच्चे तेल का प्रवाह पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ था। हालांकि, भारत के लिए पिछले 100 दिन में स्थिति काफी हद तक सामान्य रही है और तेल शोधन कंपनियों ने विविध आयात स्रोतों के जरिये आपूर्ति का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है।"

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