जब भी आप ट्रेन की टिकट बुक करते हैं, आपको 10 अंकों का एक PNR (पैसेंजर नेम रिकॉर्ड) नंबर मिलता है। यह नंबर आपकी यात्रा की पूरी जानकारी का केंद्र होता है। टिकट कन्फर्म होगी या नहीं, यह जानने का सबसे पहला कदम अपना PNR स्टेटस चेक करना है। आप इसे IRCTC की वेबसाइट या विभिन्न विश्वसनीय ऐप्स पर देख सकते हैं। स्टेटस चेक करते समय आपको दो चीजें दिखेंगी 'बुकिंग स्टेटस' (जो बुकिंग के वक्त था) और 'करंट स्टेटस' (जो अभी है)। अगर करंट स्टेटस में सुधार हो रहा है, तो कन्फर्मेशन की उम्मीद बढ़ जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं वेटिंग टिकट (Waiting Ticket) कन्फर्म होगी या नहीं कैसे पता करें?
वेटिंग टिकट कितने तरह की होती है?
हर वेटिंग टिकट एक जैसी नहीं होती। रेलवे में अलग-अलग तरह की वेटिंग लिस्ट होती है, जो तय करती है कि आपकी सीट पक्की होने की कितनी संभावना है। सबसे अच्छी स्थिति GNWL (General Waiting List) की होती है। इसके कन्फर्म होने के चांस सबसे ज्यादा होते हैं क्योंकि यह उन यात्रियों के रद्द होने पर बढ़ती है जो शुरुआती स्टेशन से सफर कर रहे हैं। इसके बाद RLWL (Remote Location Waiting List) और PQWL (Pooled Quota Waiting List) आती हैं। इनके कन्फर्म होने की संभावना GNWL के मुकाबले थोड़ी कम होती है क्योंकि इनके लिए सीटों का कोटा सीमित होता है।
कन्फर्मेशन प्रेडिक्शन (Confirmation Prediction)
आजकल तकनीक ने काम आसान कर दिया है। कई वेबसाइट्स और ऐप्स जैसे 'Zoop' या 'ConfirmTkt' ऐतिहासिक डेटा का विश्लेषण करते हैं। ये प्लेटफॉर्म देखते हैं कि पिछले सालों में उसी ट्रेन और उसी रूट पर उस विशेष वेटिंग नंबर पर कितनी टिकटें कन्फर्म हुई थीं। इसके आधार पर वे आपको एक प्रतिशत (%) बताते हैं। उदाहरण के लिए, यदि प्रेडिक्शन 90% है, तो आप काफी हद तक निश्चिंत रह सकते हैं। लेकिन यदि यह 50% से कम है, तो आपको वैकल्पिक इंतजाम (जैसे 'विकल्प' योजना) के बारे में सोचना चाहिए।
चार्ट बनने के बाद की संभावना
ट्रेन छूटने से लगभग 8 घंटे पहले 'पहला चार्ट' तैयार किया जाता है। बहुत से लोग यह नहीं जानते कि चार्ट बनते समय अक्सर वेटिंग लिस्ट में बड़ा उछाल आता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जो सीटें वीआईपी कोटे या अन्य स्पेशल कोटे के तहत खाली रह जाती हैं, उन्हें वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को दे दिया जाता है। अगर आपकी टिकट 'आरएसी' (RAC) में है, तो चार्ट बनने के बाद आपको कम से कम बैठने की सीट तो मिल ही जाती है।
RAC और चार्टिंग के बाद का स्टेटस
यदि चार्ट बनने के बाद भी आपकी टिकट वेटिंग में है, तो नियम बदल जाते हैं। ऑनलाइन वेटिंग टिकट अपने आप कैंसिल हो जाती है और पैसा वापस आ जाता है, जबकि काउंटर वाली वेटिंग टिकट पर आप ट्रेन में चढ़ तो सकते हैं लेकिन बर्थ की गारंटी नहीं होती। इसलिए, हमेशा 'करंट स्टेटस' पर नजर रखें। यदि आप कन्फर्म टिकट चाहते हैं, तो रेलवे की 'विकल्प' (VIKALP) स्कीम को जरूर चुनें, जो आपकी वेटिंग टिकट को उसी रूट की दूसरी ट्रेन में कन्फर्म करने का मौका देती है।
