Hormuz Crisis की वजह से दुनिया क्रूड ऑयल सप्लाई की मुश्किलों से जूझ रही है। लेकिन, अब एक आकलन में कहा गया है कि जैसे ही होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई शुरू होती है, दुनिया में कच्चे तेल का सैलाब जैसा आ जाएगा। इसकी वजह से क्रूड ऑयल के दाम उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से नीचे आ सकते हैं। ईरान युद्ध शुरू होने से पहले इस साल की शुरुआत में Brent Crude Price 60 से 70 डॉलर प्रति बैरल के बीच था। युद्ध शुरू होने के बाद अप्रैल में ब्रेंट क्रूड का भाव 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
भारत चुका रहा भारी कीमत
भारत भले ही ईरान-अमेरिका युद्ध का हिस्सा नहीं। लेकिन, क्रूड के दाम बढ़ने की वजह से इस युद्ध की भारी कीमत चुका रहा है। SBI Research की एक रिपोर्ट के मुताबिक क्रूड ऑयल जब प्रति बैरल 1 डॉलर महंगा होता है, तो भारत के सालाना आयात बिल पर इसकी वजह से 1.5 से 2 अरब डॉलर यानी 15 से 20 हजार करोड़ रुपये का बोझ बढ़ता है। क्रूड के भाव बढ़ने का असर यूं तो पूरी दुनिया के लोगों पर हुआ है और भारत में तमाम दूसरे देशों की तुलना में रिटेल प्राइस में सबसे कम बढ़ोतरी हुई है। लेकिन, बढ़ते दाम लगातार सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं। पिछले एक महीने में डीजल-पेट्रोल के दाम में कई बार बढ़ोतरी हो चुकी है। अब देश के ज्यादातर हिस्सों में प्रति लीटर पेट्रोल का भाव 100 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा हो चुका है।
क्रूड की सप्लाई में जुड़े नए स्रोत
ग्लोबल ऑयल सप्लाई का करीब 20 फीसदी हिस्सा संभालने वाला होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद से ग्लोबल ऑयल एंड गैस सेक्टर में कई बड़े बदलाव हुए हैं। खासतौर पर अब अमेरिका की मंजूरी के साथ वेनेजुएला का क्रूड भी ग्लोबल सप्लाई में शामिल हो रहा है। इसके अलावा अमेरिका ने ईरान और रूसी क्रूड भी रुख नरम किया है। यही वजह है कि होर्मुज बंद होने के बाद ग्लोबल ऑयल सप्लाई को इतने बड़े झटके लगने के बाद भी क्रूड के दाम फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बने हुए हैं। जबकि, कई एनालिस्टों ने अनुमान लगाया था कि अगर जून तक होर्मुज स्ट्रेंट बंद रहे, तो क्रूड का भाव 120 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
Hormuz Crude Supply
क्यों होर्मुज खुलते ही दाम होंगे धड़ाम
Strait of Hormuz Reopening Global Oil Supply Impact : होर्मुज 100 से ज्यादा दिनों से बंद है। यह दुनिया का सबसे अहम ऑयल सप्लाई रूट है। जाहिर है यह अब जब भी खुलेगा, तो अमेरिका और ईरान के बीच कोई ठोस समझौता होने के बाद ही खुलेगा। यह समझौता ग्लोबल ऑयल और एनर्जी मार्केट में बड़ा डिसरप्शन ला सकता है। क्योंकि, इसके बाद ईरान भी ग्लोबल सप्लाई का हिस्सा बनेगा। वहीं, दुबई ओपेक से बाहर हो चुका है। इसके अलावा ओपेक ने भी सप्लाई बढ़ाने का फैसला किया है। वहीं, चीन और भारत जैसे देश तेजी से अल्टरनेट एनर्जी सोर्सेज को टैप कर रहे हैं। इसकी वजह से डिमांड भी घटने लगी है। ऐसे क्रूड के दाम बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
मार्केट में बाढ़ लाने को तैयार 10,000 कुएं
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, हॉर्मुज बंद होने की वजह से सऊदी अरब, इराक, ईरान, यूएई, कुवैत, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी देशों को अपना क्रूड उत्पादन 45% तक घटाना पड़ा है। इन देशों का क्रूड प्रोडक्शन 3.2 करोड़ बैरल प्रति दिन से घटकर सिर्फ 1.75 करोड़ बैरल रह गया है। अब जैसे ही ईरान और अमेरिका के बीच कोई डील होती है, तो यह प्रोडक्शन बाजार में सप्लाई बढ़ा देगा। फिलहाल, खाड़ी देशों से होने वाली सप्लाई बंद पड़ी है। जब होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई शुरू होगी, तो एक साथ लगभग 10,000 तेल के कुओं से ऑयल सप्लाई फिर से शुरू होगी। इन तेल के कुओं से दुनिया की करीब 15% फीसदी सप्लाई होती है। जब यहां से क्रूड बाजार में आएगा, तो जाहिर तौर पर क्रूड प्राइस में बड़ा क्रैश देखने को मिलेगा।
महीनों नहीं दिनों में सामान्य होगी सप्लाई
कई एक्सपर्ट कह रहे हैं कि होर्मुज खुलने के बाद ऑयल सप्लाई सामान्य होने में 6 महीने से 1 साल का समय लग सकता है। लेकिन, हकीकत इसके उलट है। 1991 के कुवैत युद्ध की तरह इस बार तेल के कुओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। इस वजह से हॉर्मुज खुलते ही खाड़ी देशों की कुल तेल उत्पादन क्षमता का 50% हिस्सा महज कुछ दिनों में और 75% हिस्सा कुछ ही हफ्तों में वापस चालू हो जाएगा। पूरे 100% प्रोडक्शन को बहाल होने में भी सिर्फ कुछ महीने लगेंगे। इसके अलावा दुनिया की सबसे बड़ी सुपरटैंकर कंपनियों में से एक, फ्रंटलाइन पीएलसी (Frontline Plc) के मुताबिक, करीब 55 बड़े और खाली सुपरटैंकर फारस की खाड़ी के पास पहले से ही लंगर डाले खड़े हैं। इनके पास 11 करोड़ बैरल तेल ले जाने की क्षमता है। होर्मुज खुलते ही ये पूरी दुनिया में महीने भर के भीतर क्रूड की पर्याप्त सप्लाई पहुंचा देंगे।
क्या भारत में सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल?
अगर क्रूड ऑयल का भाव युद्ध पूर्व स्थिति में 60-65 डॉलर प्रति बैरल तक आ जाता है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि पेट्रोल और डीजल में पिछले दिनों जो बढ़ोतरी हुई है, उसे वापस लिया जा सकता है। वहीं, अगर दाम 50 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चला जाता है, तो डीजल-पेट्रोल के दाम में बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है।
