India Share Market Tax vs World : 2026 में भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 2.6 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है। इसकी वजह से इंडिया की ग्रोथ स्टोरी से लेकर टैक्स ढांचे तक सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह भी है कि दुनिया के बड़े बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर बाजार में टैक्स के लिहाज से निवेश कितना महंगा है? क्या यह वाकई एक डील ब्रेकर मुद्दा है? जानें अमेरिका, चीन, जापान और भारत सहित दुनिया के 10 सबसे बड़े शेयर बाजारों में कहां कितना टैक्स लगता है?
क्यों उठा टैक्स का मुद्दा?
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल एक लंबे निराशाजनक दौर से गुजर रहा है। पिछले 6 महीने में Nifty 500 में करीब 5% से ज्यादा की गिरावट आई है। यह बताता है कि देश की 500 सबसे बड़ी कंपनियों से निवेशकों ने लगातार पैसा बाहर निकाला है। FII/FPI निवेश के आंकड़े भी इस बात की तस्दीक करते हैं कि खासतौर पर विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से बाहर जा रहे हैं। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों और म्यूचुअल फंड इनफ्लो ने बाजार में बहुत बड़ी गिरावट को थामा है। लेकिन, बड़ा सवाल यही है कि विदेशी निवेशक क्यों भाग रहे हैं। इसके पीछे बाजार का टैक्स एक बड़ा मुद्दा उभरकर आया है।
क्यों भाग रहे विदेशी निवेशक
तमाम ब्रोकरेज रिपोर्ट, रिसर्च और एनालिस्ट इस बात पर सहमत हैं कि भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों के बाहर जाने के पीछे एक बड़ी वजह भारतीय बाजार का टैक्स ढांचा है। अमेरिका-ईरान युद्ध और ट्रंप टैरिफ जैसे जियोपॉलिटिकल कारणों के चलते भारत की ग्रोथ स्टोरी की रफ्तार भी धीमी पड़ी है। FDI में भी सुस्ती है। घरेलू मोर्चे पर महंगाई सिर उठा रही है। इन सबके साथ विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार में निवेश के लिए टैक्स के तौर पर एक बड़े एक्जिट और एंट्री बैरियर का सामना करना पड़ रहा है।
कितना है भारतीय बाजार में टैक्स?
भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों को ट्रेडिंग और निवेश पर 7 अलग-अलग तरह के टैक्स चुकाने पड़ते हैं। इसके अलावा ब्रोकरेज फीस अलग से देनी पड़ती है। खासतौर पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) व लॉन्गटर्म कैपिटल गेन (LTCG) ऐसे टैक्स हैं, जो विदेशी निवेशकों को खासतौर पर भारतीय बाजार से दूरी बनाने को मजबूर कर रहे हैं।
| शुल्क | विवरण |
|---|---|
| STT (सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स) | हर खरीद/बिक्री पर |
| GST | ब्रोकरेज और ट्रांजेक्शन चार्ज पर |
| स्टांप ड्यूटी | खरीद पर लागू |
| SEBI शुल्क | नियामकीय शुल्क |
| एक्सचेंज चार्ज | NSE/BSE द्वारा वसूला जाता है |
| डिविडेंड टैक्स | निवेशक की आयकर स्लैब के अनुसार |
शेयर खरीदने से पहले चुकाने पड़ते हैं कुछ टैक्स
भारतीय शेयर बाजार अगर आप शेयर खरीदते हैं, तो शेयर के आपके डीमैट खाते में आने पहले ही कई तरह की फीस और टैक्स कट चुके होते हैं। मसलन, सबसे पहले आपको ब्रोकरेज फीस देनी होती है। इसके बाद आपका सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) देना पड़ता है। इसके साथ ही स्टाम्प ड्यूटी, क्लियरिंग चार्ज, सेबी चार्ज और एक्सचेंज ट्रांजैक्शन फीस और इनके साथ ही जीएसटी तक चुकाना होता है। इसके बाद शेयर आपके खाते में पहुंचता है। ये सभी टैक्स, चार्ज और फीस इस बात की परवाह किए बिना कटते हैं कि बाद में आप शेयर को फायदे में बेच रहे हैं या घाटे में बेच रहे हैं। वहीं, अगर फायदा हो जाता है, तो STCG और LTCG अलग से चुकाने पड़ते हैं।
| पहलू | भारत | अमेरिका |
|---|---|---|
| Brokerage | 0 या बहुत कम (कई डिस्काउंट ब्रोकर) | ज्यादातर $0 (कमिशन-फ्री ट्रेडिंग) |
| Transaction Tax | STT (डिलीवरी पर 0.1% आदि) | कोई STT नहीं, केवल मामूली SEC/TAF फीस |
| Capital Gains Tax | STCG: 20%LTCG: 12.5% | Short-Term: सामान्य आयकर स्लैब के अनुसारLong-Term: 0%, 15% या 20% |
| अन्य फीस | Stamp Duty, GST, SEBI Charges, Exchange Fees | बहुत कम Regulatory Fees |
| कुल ट्रेडिंग लागत | अपेक्षाकृत अधिक | अपेक्षाकृत बहुत कम |
कैसी है दुनिया के बड़े बाजारों की तस्वीर
दुनिया का सबसे बड़ा शेयर बाजार अमेरिका का में है। करीब 70 से 75 लाख करोड़ डॉलर के मार्केट कैप वाले इस बाजार में करीब 5 हजार कंपनियां लिस्टेड हैं। वहीं, भारतीय बाजार का आकार 5 ट्रिलियन डॉलर से कम है। जबकि, भारतीय बाजार में भी करीब 5 हजार कंपनियां लिस्टेड हैं। कंपनियों की संख्या में बराबर होने के बाद भी अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप भारतीय बाजार से 15 गुना ज्यादा है। इसके बाद जब टैक्स के लिहाज से देखते हैं, तो बड़ा फर्क दिखता है। अमेरिका बाजार में जहां मोटे तौर पर एंट्री के समय सिर्फ ब्रोकरेज फीस और एक्सचेंज चार्ज देने पड़ते हैं। जबकि, भारत में कुल 7 तरह की फीस और चार्ज देने पड़ते हैं।
दुनिया के किस बाजार में कितना टैक्स?
RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने X पर एक पोस्ट में कहा, टैक्स से रेवेन्यू आता है, जबकि इन्वेस्टमेंट से दौलत बनती है। उन्होंने भारतीय पॉलिसीमेकर्स से कॉम्पिटिटिव कैपिटल मार्केट के लिए दोनों में बैलेंस बनाने की अपील करते हुए एक इन्फोग्राफ शेयर किया है। इसमें बताया गया है कि दुनिया के बड़े बाजारों में कहां कितना टैक्स लगता है। इस इन्फोग्राफ के हिसाब से भारतीय बाजार टैक्स के लिहाज से सबसे ज्यादा टैक्स वसूलने वाला बाजार है।
मोटे तौर पर दुनिया के बड़े शेयर बाजारों में भारतीय बाजार में सबसे ज्यादा टैक्स लगता है। इसी नीचे दी गई टेबल से भी समझा जा सकता है। खासतौर पर हर ट्रांजैक्शन पर लगने वाला सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स, स्टांप ड्यूटी, सेबी और एक्सचेंज की फीस भारतीय बाजार को कम प्रतिस्पर्धी बना रहे हैं।
| देश | LTCG (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स) | STCG (शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स) | ट्रांजेक्शन टैक्स (STT आदि) | डिविडेंड टैक्स |
|---|---|---|---|---|
| सिंगापुर | 0% | 0% | नहीं | 0% |
| हांगकांग | 0% | 0% | नहीं | 0% |
| यूएई | 0% | 0% | नहीं | 0% |
| ताइवान | 0% (व्यक्तिगत निवेशकों के लिए) | 0% | सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स लागू | डिविडेंड पर आयकर |
| स्विट्जरलैंड | निजी निवेशकों के लिए 0% | निजी निवेशकों के लिए 0% | नहीं | बहुत कम / न्यूनतम |
| अमेरिका | 0%, 15% या 20% (आय के अनुसार) | सामान्य आयकर स्लैब के अनुसार (37% तक) | STT नहीं | रियायती दरें |
| जापान | लगभग 20.315% | लगभग 20.315% | नहीं | लगभग 20.315% |
| दक्षिण कोरिया | अधिकांश खुदरा निवेशकों के लिए 0%* | 0%* | सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स लागू | डिविडेंड पर टैक्स |
| यूनाइटेड किंगडम (UK) | 18% या 24% | 18% या 24% | नहीं | Dividend Allowance उपलब्ध |
| कनाडा | लाभ का 50% टैक्सेबल | LTCG जैसा | नहीं | रियायती व्यवस्था |
| चीन | 0% | 0% | स्टांप ड्यूटी लागू | 0%–20% (होल्डिंग अवधि पर निर्भर) |
| ऑस्ट्रेलिया | 45% तक (1 वर्ष बाद 50% छूट) | 45% तक | नहीं | अलग से टैक्स |
| जर्मनी | 25% फ्लैट टैक्स | 25% फ्लैट टैक्स | नहीं | 25% |
| भारत | 12.5% (₹1.25 लाख तक छूट) | 20% | STT लागू | आयकर स्लैब के अनुसार |
कौनसे बाजार निवेशकों के लिए सबसे ज्यादा टैक्स फ्रेंडली
सिंगापुर, हांगकांग और UAE निवेशकों के लिए सबसे ज्यादा टैक्स-फ्रेंडली शेयर बाजार हैं, क्योंकि यहां कैपिटल गेन टैक्स नहीं है। इसके अलावा ट्रांजेक्शन टैक्स भी नगण्य या शून्य है। इसके बाद ताइवान और स्विट्जरलैंड आते हैं। यहां रिटेल निवेशकों पर कैपिटल गेन टैक्स का बोझ बहुत कम है। अमेरिका भी निवेशकों के लिए अनुकूल है, क्योंकि भारत की तरह STT नहीं लगता। वहीं, भारत, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में कैपिटल गेन टैक्स के अलावा STT, स्टांप ड्यूटी, GST और अन्य शुल्क निवेशकों की लागत बढ़ाते हैं।