HDFC Bank 3 Year FD Calculation: HDFC Bank अपने ग्राहकों को FD (Fixed Deposit) पर आकर्षक ब्याज दरें ऑफर कर रहा है। अगर आप भी एफडी में निवेश की योजना बना रहे हैं तो बैंक की एफडी पर मिलने वाली ब्याज दरें चेक कर सकते हैं। ज्यादा लंबी अवधि का निवेश नहीं करना चाहते हैं तो 3 साल की एफडी को चुन सकते हैं।
FD (Photo: iStock)
3 साल की एफडी पर ब्याज दर
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एचडीएफसी बैंक 3 साल की एफडी पर सामान्य नागरिकों और सीनियर सिटिजन्स को अलग-अलग ब्याज दर का फायदा दे रहा है। सामान्य नागरिकों के लिए 3 साल की एफडी पर 6.45 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जा रहा है। वहीं, सीनियर सिटिजन ग्राहकों को इसी अवधि की एफडी पर 6.95 प्रतिशत तक ब्याज मिल रहा है। यानी वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों के मुकाबले ज्यादा रिटर्न का फायदा मिलता है।
4 लाख जमा पर कितने रुपये मिलेंगे
मान लीजिए कोई सामान्य नागरिक बैंक में 4 लाख रुपये की एफडी करवाता है, तो 3 साल बाद उसे लगभग 84,647 रुपये ब्याज के रूप में मिलेंगे। इसके बाद कुल मैच्योरिटी अमाउंट बढ़कर 4,84,647 रुपये हो जाएगा। वहीं, सीनियर सिटिजन ग्राहकों को ज्यादा ब्याज दर का अतिरिक्त फायदा मिलता है। अगर कोई वरिष्ठ नागरिक 4 लाख रुपये की एफडी करवाता है, तो 3 साल बाद उसे करीब 91,850 रुपये ब्याज के रूप में मिल सकते हैं। इसके बाद कुल मैच्योरिटी राशि 4,91,850 रुपये हो जाएगी। यानी सामान्य ग्राहकों के मुकाबले सीनियर सिटिजन्स को ज्यादा कमाई का फायदा मिलता है।
| ग्राहक श्रेणी | निवेश राशि | अवधि | ब्याज दर | कुल ब्याज | मैच्योरिटी राशि |
|---|---|---|---|---|---|
| सामान्य नागरिक | ₹4,00,000 | 3 साल | 6.45% | ₹84,647 | ₹4,84,647 |
| सीनियर सिटिजन | ₹4,00,000 | 3 साल | 6.95% | ₹91,850 | ₹4,91,850 |
FD में कौन-से लोगों को करना चाहिए निवेश
FD उन निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प मानी जाती है, जो बाजार के जोखिम से बचना चाहते हैं। शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड की तुलना में FD में रिटर्न पहले से तय होता है, इसलिए निवेशक को मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि का अंदाजा पहले से होता है। यही वजह है कि रिटायरमेंट प्लानिंग और इमरजेंसी फंड के लिए भी कई लोग FD को प्राथमिकता देते हैं। सीनियर सिटिजन्स के लिए FD और भी ज्यादा उपयोगी मानी जाती है क्योंकि उन्हें अतिरिक्त ब्याज दर का फायदा मिलता है।
एफडी के ब्याज पर टैक्स का भी रखें ध्यान
हालांकि निवेश करने से पहले ब्याज दर, अवधि और लिक्विडिटी जैसे पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी माना जाता है। इसके अलावा, यह भी ध्यान रखें कि FD पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री नहीं होता। अगर एक वित्तीय वर्ष में FD से मिलने वाला कुल ब्याज तय सीमा से ज्यादा हो जाता है, तो बैंक TDS काट सकता है। सामान्य नागरिकों के लिए यह सीमा 40 हजार रुपये और सीनियर सिटिजन्स के लिए 50 हजार रुपये तक होती है। हालांकि, अगर किसी की कुल आय टैक्स सीमा से कम है तो वह TDS कटने से बच सकता है।
