अगस्त महीने में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। सोने में महीने की शुरुआत से अब तक (MTD) 14% की तेजी दर्ज की गई है। वहीं, अगस्त में चांदी की कीमतों में लगभग 20% की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, सोना और चांदी अभी भी अमेरिका-ईरान युद्ध से पहले के स्तर से नीचे है। यानी दोनों कीमती धातु अपने रिकॉर्ड भाव से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। यानी अभी भी तेजी की पूरी गुंजाइश बची हुई है। केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर और जाने-माने कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक, सोने और चांदी में मौजूदा तेजी के पीछे कई फैक्टर एक साथ काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि हालिया करेक्शन के बाद बाजार में फिर से खरीदारी लौटी है और आगे भी दोनों कीमती धातुओं में तेजी की गुंजाइश बनी हुई है। आइए समझते हैं कि क्यों सोने और चांदी में तेजी लौटी और दिवाली तक भाव कहां तक जा सकते हैं?
अगस्त में सोना-चांदी की बल्ले-बल्ले
अगर अगस्त महीने में सोने और चांदी की कीमत पर नजर डालें तो चांदी 27000 रुपये प्रति किलोग्राम महंगी हुई है। 1 अगस्त को MCX पर चांदी की कीमत 216388 रुपये प्रति किलोग्राम थी जो 26 अगस्त को बढ़कर 243877 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई है। अगर सोने की बात करें तो 1अगस्त को सोने को सोने का भाव 143639 रुपये प्रति 10 ग्राम था। वह 26 अगस्त को बढ़कर 162373 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है। इस तरह सोने में प्रति 10 ग्राम 18000 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
सोने और चांदी में क्यों लौटी तेजी?
1. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट: केडिया के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर महंगाई पर पड़ सकता है। अगर ऊर्जा कीमतों में नरमी बनी रहती है तो आने वाले समय में महंगाई का दबाव कम हो सकता है। महंगाई कम होने की उम्मीद में दोनों कीमती धातु में तेजी लौटी है।
2. फेड का ब्याज बढ़ाने का दबाब घटा: महंगाई में नरमी से अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव भी कम हो सकता है। यही वजह है कि बाजार में फिलहाल अमेरिका की ओर से किसी नई रेट हाइक की आशंका कमजोर हुई है।
कम ब्याज दरों या नरम मौद्रिक नीति की उम्मीद सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इससे डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर दबाव आ सकता है। हालिया बाजार संकेत भी यही दिखाते हैं कि निवेशक अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और फेड की अगली नीति दिशा पर नजर बनाए हुए हैं।
3. डॉलर इंडेक्स में गिरावट: सोने की तेजी का एक बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर में कमजोरी भी है। केडिया के मुताबिक डॉलर इंडेक्स करीब 98.70 तक फिसला है। डॉलर कमजोर होने पर आमतौर पर डॉलर में कीमत तय होने वाला सोना दूसरे देशों के खरीदारों के लिए अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे मांग को सपोर्ट मिलता है। हालिया रैली में भी कमजोर डॉलर को सोने के लिए अहम सपोर्टिंग फैक्टर है।
4. चीन के सेंट्रल बैंक की खरीदारी जारी: केडिया के मुताबिक केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने की कीमतों के लिए एक बड़ा सपोर्ट बनी हुई है। चीन की तरफ से भी गोल्ड रिजर्व बढ़ाने की दिशा में खरीदारी जारी रहने से बाजार में मांग का आधार मजबूत हुआ है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिर्फ शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग पर आधारित मांग नहीं होती, बल्कि रिजर्व डायवर्सिफिकेशन और डॉलर पर निर्भरता कम करने जैसी लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा होती है।
5. ETF में भी लौटी खरीदारी: सोने की कीमतों में तेजी के साथ ETF में भी खरीदारी लौटना एक महत्वपूर्ण संकेत है। ETF खरीदारी आने से निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है। यानी इस बार सिर्फ फिजिकल गोल्ड की मांग ही कीमतों को सपोर्ट नहीं कर रही, बल्कि वित्तीय बाजार के निवेशक भी सोने की ओर लौट रहे हैं।
6. भारत और चीन में त्योहारी मांग: भारत और चीन में अब त्योहारों का सीजन शुरू हो गया है। इससे भारत और चीन में सोने और चांदी की मांग बढ़ेगी। भारत में त्योहारी और शादी का सीजन शुरू होने के साथ फिजिकल गोल्ड की मांग बढ़ती है। दिवाली के आसपास सोने की सबसे अधिक खरीदारी होती है। चीन में भी त्योहारों के दौरान गोल्ड की मांग बढ़ती है। ये सोने और चांदी की मांग बढ़ा रहे हैं, जिससे कीमत बढ़ रही है।
क्यों भाग रहा सोना-चांदी?
7. करेक्शन के बाद फिर खरीदारी: सोने और चांदी में मौजूदा तेजी को समझने के लिए हालिया करेक्शन भी महत्वपूर्ण है। सोने और चांदी की कीमत में रिकॉर्ड हाई के बाद बड़ी गिरावट देखी गई थी। अब निवेशकों को निचले स्तरों पर खरीदारी का मौका मिला है।
केडिया के मुताबिक अच्छे करेक्शन के बाद बाजार में फिर से खरीदारी लौटना इस बात का संकेत है कि निवेशकों का भरोसा अभी भी बुलियन पर बना हुआ है। यानी बाजार में हर गिरावट को सिर्फ कमजोरी के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि कुछ निवेशक इसे खरीदारी के मौके के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
8. सीमित सप्लाई: सोने और चांदी की कीमतों के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्ट्रक्चरल फैक्टर में से एक है सप्लाई और डिमांड का अंतर। दोनों कीमती धातु की माइनिंग कॉस्ट लगातार बढ़ रही है और नई सप्लाई बढ़ाना आसान नहीं है। उनके मुताबिक माइनिंग कॉस्ट करीब 25-30 फीसदी तक बढ़ी है। दूसरी तरफ मांग में मजबूती बनी हुई है। अगर उत्पादन की रफ्तार सीमित रहती है और मांग लगातार बढ़ती है तो कीमतें और बढ़ेंगी।
9. इंडस्ट्रियल इस्तेमाल: सोने और चांदी की मांग सिर्फ ज्वेलरी और निवेश तक सीमित नहीं है। टेक्नोलॉजी और दूसरे औद्योगिक इस्तेमाल में भी सोने की भूमिका बढ़ रही है। इंडस्ट्रियल यूज बढ़ने से सोने और चांदी की कुल मांग को अतिरिक्त सपोर्ट मिल रहा है। यानी डिमांड का आधार अब पहले की तुलना में ज्यादा व्यापक हो रहा है।
10. सेफ हेवन: निवेशकों के बीच सोना सेफ हेवन बना हुआ है। बाजार में अनिश्चितता, युद्ध या आर्थिक संकट के दौर में निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं, इसलिए इस ‘सेफ हेवन’ में निवेश कर रहे हैं।
दिवाली या ईयर एंड तक कहां पहुंच सकता है Gold?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सोने की कीमत आगे कहां तक जा सकती है?
अजय केडिया के मुताबिक दिवाली या साल के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 5,100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना फिलहाल करीब $4,650 के आसपास बना हुआ है
भारतीय बाजार के लिहाज से यह करीब ₹1.85 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर के बराबर हो सकता है।
चांदी में भी बड़ी तेजी की उम्मीद
सोने के साथ चांदी भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 90 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है। अभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब $69 प्रति औंस पर है। दिवाली तक भारतीय बाजार यानी MCX पर चांदी के ₹3.15 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंचने का अनुमान है।
Gold Rally
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
सोने और चांदी में तेजी के पीछे इस समय कई मजबूत फैक्टर एक साथ मौजूद हैं। लेकिन तेज रैली के बाद बीच-बीच में करेक्शन आना भी सामान्य है। इसलिए निवेशकों को सिर्फ कीमत बढ़ने के अनुमान के आधार पर एकमुश्त खरीदारी करने के बजाय अपने निवेश लक्ष्य, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।
