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Explained: सोने-चांदी में लौटी जबरदस्त तेजी, क्या यह ट्रैप या फिर नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

Gold, Silver Prices: पिछले हफ्ते की ऐतिहासिक गिरावट के बाद सोना और चांदी अब संभलते हुए स्थिरता की ओर बढ़ रहे हैं और इनमें तेज रिकवरी भी देखने को मिल रही है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह तेजी एकतरफा नहीं होगी। आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव और अस्थिरता बनी रह सकती है।

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सोना-चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल! रिकॉर्ड टूटेंगे या निवेशकों के लिए फंसाने वाला जाल?

Gold, Silver Prices: पिछले हफ्ते आई ऐतिहासिक गिरावट के बाद सोना और चांदी अब धीरे-धीरे स्थिर होते दिख रहे हैं। इतनी ही नहीं तेजी से आगे भी बढ़ रहे हैं। हालांकि बाजार एक्सपर्ट्स और विश्लेषकों का मानना है कि यह रिकवरी सीधी नहीं होगी। आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। बीते सप्ताह सिर्फ दो कारोबारी सत्रों में सोने की कीमत में 15% से ज्यादा और चांदी में 30% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बाद दोनों कीमती धातुओं में तेज उछाल देखने को मिला। हाल के निचले स्तरों से सोना करीब 5% और चांदी करीब 8% तक रिकवर कर चुकी है। यह तेजी मुख्य रूप से सस्ते दामों पर खरीदारी, शॉर्ट कवरिंग और तकनीकी सुधार के चलते आई है।

ट्रेड डील से बाजार में कुछ राहत

हाल ही में हुए अमेरिका-भारत व्यापार समझौते से वैश्विक बाजारों को कुछ राहत मिल सकती है। इस डील के तहत भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 50% से घटाकर करीब 18% कर दिया गया है। बेहतर व्यापारिक माहौल और सप्लाई चेन में सुधार से निवेशकों की घबराहट कम हो सकती है। इसका असर यह हो सकता है कि डर के चलते सोने में जो तेजी आती है, वह सीमित रह जाए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि महंगाई, मुद्रा की स्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव जैसी चिंताओं के चलते सोना अब भी एक मजबूत लॉन्ग टर्म निवेश विकल्प बना हुआ है। सोने का ताजा भाव जानने के लिए यहां क्लिक करें

चांदी को इंडस्ट्रियल डिमांड से सहारा

अगर वैश्विक व्यापार और मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में सुधार होता है, तो इससे चांदी को कुछ सपोर्ट मिल सकता है। चूंकि चांदी का बड़ा इस्तेमाल उद्योगों में होता है, इसलिए आर्थिक गतिविधियों में तेजी इसके लिए फायदेमंद हो सकती है। हालांकि, सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के रूप में चांदी की भूमिका सोने की तुलना में कमजोर ही रहेगी। चांदी का ताजा भाव जानने के लिए यहां क्लिक करें

क्या ट्रेंड बदल गया है?

एक्सपर्ट के मुताबिक हालिया गिरावट लंबी अवधि के बुनियादी कारणों से नहीं, बल्कि कुछ शॉर्ट-टर्म फैक्टर्स की वजह से हुई। मार्जिन बढ़ोतरी, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व के ज्यादा सख्त रुख की आशंका खासकर केविन वार्श की संभावित नियुक्ति की खबर ने बाजार पर दबाव डाला। उनके अनुसार, आगे बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और धीरे-धीरे रिकवरी संभव है, लेकिन अगर कीमतें पिछले हफ्ते के निचले स्तर से नीचे जाती हैं तो फिर से बिकवाली तेज हो सकती है।

टेक्निकल चार्ट क्या कहता है?

सोना हाल के निचले स्तर ₹1.37 लाख प्रति 10 ग्राम से उछलकर अब करीब ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है। यह करीब 12 से 13 % की रिकवरी है। अगर सोना इस स्तर के ऊपर टिकता है, तो आगे ₹1.60 लाख से ₹1.67 लाख प्रति 10 ग्राम तक जाने की संभावना बन सकती है। वहीं, नीचे की तरफ पिछले हफ्ते का लो अब अहम सपोर्ट बना हुआ है।

चांदी में भी तेज उछाल, लेकिन जोखिम बरकरार

चांदी की बात करें तो कीमतें ₹2.25 लाख प्रति किलो के निचले स्तर से उछलकर करीब ₹2.69 लाख प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। हालांकि, इतनी तेज गिरावट के बाद आई रिकवरी के बावजूद बाजार में सतर्कता बनी हुई है।

गिरावट क्यों आई और रिकवरी कैसे हुई?

एक्सपर्ट के मुताबिक पिछले हफ्ते की भारी गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती, ट्रेजरी यील्ड्स में उछाल और फेड के सख्त रुख की उम्मीद थी। जनवरी में ISM मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स 52.6 पर पहुंच गया, जो दो साल से ज्यादा समय बाद विस्तार (एक्सपेंशन) का संकेत था। इससे बाजार में यह धारणा बनी कि ब्याज दरों में जल्दी कटौती नहीं होगी। साथ ही, बड़े एक्सचेंजों पर मार्जिन बढ़ाए जाने से लीवरेज ट्रेडर्स को जबरन पोजिशन बंद करनी पड़ी, जिससे गिरावट और तेज हो गई।

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक-जिंस सौमिल गांधी ने कहा कि सोने ने अपने हाल के कुछ नुकसान की भरपाई की, जब रिकॉर्डतोड़ तेजी के बाद तेज गिरावट आई थी। इससे कीमतें चार सप्ताह के निचले स्तर पर आ गई थीं। चांदी में भी तेजी आई, जिसे दो दिन की भारी बिकवाली के बाद लिवाली का समर्थन मिला।’

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध विश्लेषक, गौरव गर्ग ने कहा कि सोने और चांदी में जोरदार सुधार लौटा, जिससे हफ्ते की शुरुआत में अत्यधिक अस्थिरता के बाद कई दिन के नुकसान की भरपाई हुई। मजबूत सुरक्षित निवेशक मांग और पहले की मुनाफावसूली के बाद सटोरिया लिवाली से सोना में उछाल आया, जबकि चांदी ने भी जरबदस्त तेजी दिखाई।

सोना बनाम चांदी: आगे क्या?

ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा माहौल में सोना चांदी की तुलना में बेहतर स्थिति में है। सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी, भू-राजनीतिक तनाव और ETF व निवेशकों की संरचनात्मक मांग सोने को मजबूत सहारा दे रही है। वहीं चांदी का भविष्य थोड़ा अनिश्चित नजर आता है। इसकी पिछली तेजी काफी हद तक सट्टेबाजी पर आधारित थी, और हालिया गिरावट ने एकतरफा तेजी की धारणा तोड़ दी है। हालांकि, अगर वैश्विक व्यापार में सुधार होता है तो इंडस्ट्रियल डिमांड से चांदी को कुछ सपोर्ट जरूर मिल सकता है।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है, निवेश की सलाह नहीं है, अगर आपको निवेश करना है तो एक्सपर्ट से संपर्क करें।)

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