Economic Survey 2026 On Gold and Silver Prices: सरकार की ओर से संसद में पेश की गई आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते सोने और चांदी की कीमतें आने वाले समय में भी ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जब तक दुनिया में स्थायी शांति नहीं बनती और व्यापार युद्ध खत्म नहीं होते, तब तक इन कीमती धातुओं की मांग बनी रहेगी। आर्थिक समीक्षा में बताया गया कि साल 2025 के दौरान सोने और चांदी दोनों ने अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छुआ। इसकी वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश विकल्पों की बढ़ती मांग रही। निवेशक जोखिम से बचने के लिए सोने-चांदी की ओर ज्यादा झुके।
वैश्विक अनिश्चितता में सोना-चांदी चमके, कीमतें ऊंची रहने के संकेत (तस्वीर-istock)
तेजी के पीछे ये रहे बड़े कारण
एमसीएक्स पर चांदी और सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में गुरुवार को चांदी के वायदा भाव में 6.3 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज की गई और यह चार लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई। वहीं, सोने की कीमत भी बढ़कर 1.8 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई।
कुछ विशेषज्ञों की अलग राय
हालांकि, आर्थिक समीक्षा में यह भी कहा गया है कि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि 2025 में सोने और चांदी की कीमतों ने जो ऊंचाई बनाई है, वह लंबे समय तक कायम नहीं रह पाएगी।
साल के अंत में कीमतों में गिरावट
एमसीएक्स के आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 को सोना 1,39,201 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,35,701 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई। वहीं, खुदरा बाजार में साल के अंत तक सोने की कीमत 1,37,700 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 2,39,000 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई।
सोने के आयात में जबरदस्त बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत के कुल आयात में पेट्रोलियम कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और सोना सबसे आगे रहे। इन तीनों का कुल आयात में एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा रहा। खास बात यह रही कि सोने का आयात सालाना आधार पर 27.4 प्रतिशत बढ़ा।
कीमत और घरेलू मांग बनी वजह
आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, सोने के आयात में बढ़ोतरी का कारण सोने की कीमतों में 38.2 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी और देश में मजबूत घरेलू मांग रही।
विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ी
रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की विदेशी मुद्रा आस्तियां (FCA) मार्च 2025 के अंत में 567.6 अरब डॉलर से घटकर 16 जनवरी 2026 तक 560.5 अरब डॉलर रह गईं। इसके उलट, देश के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी और यह 117.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जबकि मार्च 2025 में यह 78.2 अरब डॉलर थी।
