Times Now Navbharat
live-tv
Premium

Explainer: क्या से क्या हो गया, देखते-देखते, कैसे ढह गया अनिल अंबानी का साम्राज्य? कभी थे दुनिया के 6ठे सबसे अमीर शख्स

Anil Ambani Bankruptcy Story: भारतीय उद्योगपति धीरूभाई अंबानी ने रिलायंस की स्थापना कर भारत को दुनिया में पहचान दिलाई। उनके बेटों मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी में कंपनी बंट गई। अनिल को आरकॉम, रिलायंस कैपिटल और एनर्जी जैसी कंपनियां मिलीं और वे एक समय दुनिया के 6वें सबसे अमीर बन गए थे। लेकिन बाद में उनके कारोबार डूबते चले गए, जबकि मुकेश की कंपनियां सफल होती चली गईं। आइए विस्तार से जानते हैं अनिल अंबानी का साम्राज्य कैसे डूब गया।

Image
अनिल अंबानी के दिवालियापन की कहानी
Authored by: Ramanuj Singh
Updated Feb 28, 2026, 09:19 IST
Follow on Google News

Anil Ambani Bankruptcy Story: भारत को न्यूज इंडिया बनाने में भारतीय उद्योगपति धीरूभाई अंबानी का अहम योगदान रहा है। जिन्होंने रिलायंस की स्थापना की। जिसकी आज भारत ही नहीं दुनिया में धाक है। समय के साथ यह कंपनी उनके दो बेटों मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी में बंट गई। ये दोनों धीरूभाई अंबानी की विरासत को आगे बढ़ाने लगे। मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच संपत्ति के बंटवारे के समय, अनिल अंबानी को कई प्रमुख कंपनियां मिलीं, जिनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम), रिलायंस कैपिटल, रिलायंस एनर्जी और रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज शामिल थीं। इस बंटवारे के बाद अनिल अंबानी वैश्विक सुर्खियों में आ गए और उनके पास अपने भाई मुकेश अंबानी से भी अधिक संपत्ति थी। एक समय अनिल अंबानी 42 अरब डॉलर (करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये) की नेट वर्थ के साथ दुनिया के 6 सबसे अमीर व्यक्ति बन गए थे और उस समय वे अपने बड़े भाई मुकेश अंबानी से भी ज्यादा अमीर थे। लेकिन समय के साथ चक्र बदला और मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड धीरे-धीरे सफलता के नए मुकाम हासिल करती चली गई। जबकि उनके छोटे भाई अनिल अंबानी की कंपनियां डूबती चल गई। आइए जानते हैं आखिर अनिल अंबानी का साम्राज्य कैसे डूब गया।

क्यों ढह गया सम्राज्य?

शुरुआती सफलता के बावजूद अनिल अंबानी की कंपनियां गलत निवेश निर्णयों, बदलते बाजार और कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण पीछे रहने लगीं। खासकर टेलीकॉम सेक्टर में रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) को भारी नुकसान झेलना पड़ा। अनिल अंबानी की कंपनियां भारी कर्ज पर निर्भर थीं, जो समय के साथ बढ़ता गया और नियंत्रण से बाहर हो गया। फरवरी 2020 में, अनिल अंबानी ने यूके की एक अदालत में दिवालिया होने की घोषणा की, यह कहते हुए कि उनके पास अब कोई महत्वपूर्ण संपत्ति नहीं बची है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 10 मार्च 2025 तक उनकी अनुमानित नेट वर्थ केवल 530 मिलियन डॉलर (करीब 4,400 करोड़ रुपये) थी, जो उनके पहले के 42 अरबों डॉलर के मालिकाने की तुलना में बेहद कम है। वर्तमान में कितनी है कहना मुश्किल है क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और बैंक धोखाधड़ी की जांच को तेज करते हुए मुंबई में उनके 17-मंज़िला आलीशान घर 'एबोड' को जब्त कर लिया है। इस संपत्ति की कीमत कीमत 3,716.83 करोड़ रुपये आंकी गई है। वहीं, वर्तमान में मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति करीब 10 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।

शुरुआती जीवन और करियर

अनिल अंबानी का जन्म 4 जून 1959 को मुंबई में धीरूभाई अंबानी और कोकिलाबेन अंबानी के घर हुआ। उन्होंने व्हार्टन स्कूल से एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1983 में रिलायंस इंडस्ट्रीज में सह-सीईओ के रूप में काम शुरू किया। 1991 में उन्होंने बॉलीवुड अभिनेत्री टीना मुनीम से शादी की। इसी दौरान अनिल ने भारत की कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार में कदम रखने की दिशा में काम किया और करीब 2 अरब डॉलर जुटाए। 1997 में उन्होंने 100 साल की यांकी बॉन्ड लॉन्च की।

बंटवारा और सफलता

2002 में उनके पिता की मौत के बाद अनिल और उनके भाई मुकेश के बीच सत्ता संघर्ष शुरू हुआ। 2004 से 2006 तक अनिल राजसभा में स्वतंत्र सांसद रहे, लेकिन बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। 2005–2006 में रिलायंस साम्राज्य का आधिकारिक बंटवारा हुआ, जिसमें अनिल ने टेलीकॉम, पावर और वित्तीय सेवाओं का नियंत्रण संभाला और रिलायंस ग्रुप (एडीएजी) की स्थापना की। 2008 में उनकी नेट वर्थ 42 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जिससे वे दुनिया के छठे सबसे अमीर व्यक्ति बने। उसी साल उन्होंने स्टीवन स्पीलबर्ग की ड्रीमवर्क्स के साथ 1.2 अरब डॉलर का जॉइंट वेंचर भी लॉन्च किया।

पतन और कानूनी लड़ाइयां

2010 में सुप्रीम कोर्ट ने गैस प्राइसिंग विवाद में अनिल के खिलाफ फैसला सुनाया। 2016 में रिलायंस जियो के आने से उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) को भारी नुकसान हुआ। 2019 में आरकॉम दिवालिया हो गई और सुप्रीम कोर्ट ने अनिल को एरिक्सन को बकाया न चुकाने पर जेल की चेतावनी दी, जिसे अंततः उनके भाई मुकेश ने चुका दिया। 2020 में उन्होंने यूके की अदालत में दिवालिया होने की घोषणा की, यह कहते हुए कि उनकी नेट वर्थ करीब जीरो है। 2021 में आरकॉम की वित्तीय गवर्नेंस और भुगतान डिफॉल्ट के कारण भारतीय रिजर्व बैंक ने रिलायंस कैपिटल का बोर्ड सस्पेंड कर दिया।

हाल की घटनाएं

2024 में सेबी ने अनिल अंबानी को फंड डायवर्जन के आरोप में पांच साल के लिए सिक्योरिटीज मार्केट में प्रतिबंधित कर दिया। 2025 में जुलाई में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने आरकॉम के लोन अकाउंट को फ्रॉड बताया और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समूह के कई स्थानों पर छापेमारी की। 2026 फरवरी में उनकी मुंबई स्थित 410 मिलियन डॉलर की कोंडो संपत्ति जब्त कर ली गई, जो डिफॉल्टेड लोन और चल रही धोखाधड़ी जांच का हिस्सा है।

वर्तमान घटनाक्रम

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कॉम्युनिकेशन (आरकॉम) के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया है। यह मामला बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है। अधिकारियों के अनुसार, साल 2013 से 2017 के बीच लिए गए कर्ज के मामले में बैंक को 2,220 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। यह कार्रवाई बैंक की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर की गई है।

बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर कार्रवाई

CBI अधिकारियों ने बताया कि यह मामला Bank of Baroda की शिकायत के बाद दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने बैंक से लिए गए लोन का सही इस्तेमाल नहीं किया और धनराशि को दूसरी जगहों पर डायवर्ट कर दिया। मामला दर्ज होने के बाद CBI ने अनिल अंबानी के घर और रिलायंस कम्युनिकेशंस के दफ्तरों पर छापेमारी भी की। छापे के दौरान लोन से जुड़े कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि इन दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

लोन के गलत इस्तेमाल का आरोप

एफआईआर में कहा गया है कि बैंक ऑफ बड़ौदा को 2,220 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। आरोप है कि कंपनी ने लोन की राशि को निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य संबंधित कंपनियों के साथ कथित फर्जी लेनदेन के जरिए इस्तेमाल किया। बैंक का कहना है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड जैसी संबंधित कंपनियों ने मिलकर बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कुल 31,580 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इनमें से बड़ी राशि का उपयोग पुराने कर्ज चुकाने, संबंधित पक्षों को भुगतान करने और निवेश के नाम पर किया गया।

निवेश और फंड ट्रांसफर पर सवाल

शिकायत में कहा गया है कि करीब 3,674 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड में लगाए गए। बाद में इन निवेशों को तुरंत भुना लिया गया और रकम को संबंधित और गैर-संबंधित पक्षों को ट्रांसफर कर दिया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि लोन की शर्तों का पालन नहीं किया गया। इसके अलावा, रिलायंस इंफ्राटेल द्वारा जुटाई गई 1,783 करोड़ रुपये की राशि भी कथित तौर पर दूसरी कंपनियों के जरिये आरकॉम की देनदारियां चुकाने या संबंधित पक्षों को भेजी गई।

2017 में एनपीए घोषित हुआ खाता

अधिकारियों के मुताबिक, लगातार भुगतान में चूक और फंड के इस्तेमाल में अनियमितताओं के कारण 5 जून 2017 को इस खाते को एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित कर दिया गया था। बाद में फोरेंसिक जांच में फंड डायवर्जन और गड़बड़ी की पुष्टि होने का दावा किया गया है। हालांकि अनिल अंबानी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद खाते को ‘फ्रॉड’ घोषित करने की प्रक्रिया पर रोक लग गई थी। 23 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने यह रोक हटा दी। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा ने सीबीआई में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और जांच शुरू हो गई।

हेरफेर और साजिश का आरोप

बैंक की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कंपनी और उसके प्रमोटर ने मिलकर आपराधिक साजिश रची। आरोप है कि कंपनी ने खातों में हेरफेर कर अपनी असली वित्तीय स्थिति छिपाई। साथ ही, बड़ी रकम को इधर-उधर ट्रांसफर कर असली फंड फ्लो को छिपाने की कोशिश की गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कंपनियों के बीच कई संदिग्ध लेनदेन हुए, जिनमें बड़ी रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया गया। इन लेनदेन को ‘असाइनमेंट’ के जरिए दिखाया गया, जिससे वास्तविक स्थिति को छिपाया जा सके।

पहले भी दर्ज हो चुका है मामला

सीबीआई पहले भी रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ एक मामला दर्ज कर चुकी है। यह मामला भारतीय स्टेट बैंक की शिकायत पर दर्ज किया गया था, जो 11 बैंकों के एक समूह का लीड बैंक है। हालांकि, बैंक ऑफ बड़ौदा उस समूह का हिस्सा नहीं था। इसलिए यह मामला अलग लोन से जुड़ा है। इस बार की शिकायत में बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ-साथ उस समय के विजया बैंक और देना बैंक से लिए गए कर्ज का भी जिक्र है।

प्रवर्तन निदेशालय की भी जांच जारी

इसी बीच, अनिल अंबानी से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी पूछताछ की है। यह पूछताछ मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले से जुड़ी है, जो कथित तौर पर 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक फ्रॉड से संबंधित है। अधिकारियों के अनुसार, अंबानी का बयान धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज किया गया है। इससे पहले अगस्त 2025 में भी ईडी ने उनसे पूछताछ की थी। जांच एजेंसियां अब लोन के उपयोग, फंड ट्रांसफर और संभावित गड़बड़ियों की गहराई से जांच कर रही हैं।

कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं

इस पूरे मामले में अब तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि आरोप कितने सही हैं। फिलहाल, सीबीआई और अन्य एजेंसियों की जांच जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है।

End of Article