Forex Reserves Update : भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) 31 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में 10.51 अरब डॉलर बढ़कर 692.87 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह पिछले दो महीने से अधिक समय का सबसे ऊंचा स्तर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले वाले सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार 6.1 अरब डॉलर बढ़कर 682.35 अरब डॉलर पर पहुंचा था।
रुपये की मजबूती का दिखा असर
इस साल फरवरी में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 728.49 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। हालांकि, बाद में पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा और RBI को विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेचकर उतार-चढ़ाव नियंत्रित करना पड़ा। इसके बाद रिजर्व में गिरावट देखने को मिली।
FCA में सबसे बड़ा योगदान
RBI के आंकड़ों मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) 8.75 अरब डॉलर बढ़कर 564.68 अरब डॉलर हो गई। इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं में रखी गई संपत्तियां भी शामिल होती हैं। इन मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का असर भी FCA पर पड़ता है। रिपोर्टिंग सप्ताह के दौरान भारत के गोल्ड रिजर्व में भी 1.69 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही गोल्ड रिजर्व बढ़कर 104.74 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
IMF के साथ भारत की स्थिति भी मजबूत
RBI के आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) 4.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.67 अरब डॉलर हो गए। वहीं IMF में भारत की रिजर्व पोजीशन भी 2.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.78 अरब डॉलर पर पहुंच गई।
विदेशी मुद्रा भंडार क्यों है अहम?
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। मजबूत फॉरेक्स रिजर्व से रुपये की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा आयात बिल और बाहरी कर्ज चुकाने की क्षमता मजबूत होती है, साथ ही वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौरान अर्थव्यवस्था को सुरक्षा मिलती है और विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है।
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