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Explained: गिरता रुपया बनेगा सिरदर्द! रोजमर्रा का खर्च बढ़ेगा, Gold-Silver, क्रूड, शिक्षा-ट्रैवल सब होगा महंगा

भारतीय रुपया टूट रहा है। 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत अब 90 रुपये से अधिक हो गई है। रुपये में ऐतिहासिक गिरावट ने चिंता बढ़ा दी है। आइए जानते हैं कि कैसे कमजोर रुपया हम सब की जेब पर बोझ बढ़ा सकता है।

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रुपया टूटने का असर

अमेरिकी मुद्रा डॉलर के सामने भारतीय रुपया गिरकर रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया है। आज यानी गुरुवार को रुपया 28 पैसे टूटकर अबतक के सबसे निचले स्तर 90.43 प्रति डॉलर पर ट्रेड कर रहा है। पिछले एक साल में रुपये में तेज गिरावट जारी है। आपको बता दें कि रुपया एशिया के सबसे खराब परफॉर्म करने वाले करेंसी बन गई है, जो इस साल अबतक डॉलर के मुकाबले 5% से ज्यादा गिर चुका है। रुपये में गिरावट ने चिंता बढ़ा दी है। इंडियन इकोनॉमी से लेकर आम लोगों पर पड़ने वाले असर का आकलन शुरू हो गया है। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि कैसे कमजोर रुपया आम आदमी से लेकर सरकार की टेंशन बढ़ाएगा।

रुपया टूटने से आयात करना महंगा होगा

रुपये में गिरावट से भारत का आयात बिल बढ़ेगा। यानी विदेशों से आने वाले सामान के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी। इससे तमाम जरूरी सामान महंगे हो जाएंगे।

रुपये टूटने का आम आदमी से लेकर सरकार पर क्या-क्या असर?

1. कच्चा तेल महंगा, आयात बिल बढ़ेगा

भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। रुपया गिरने से तेल खरीदना महंगा पड़ेगा और देश का आयात बिल बढ़ेगा।

2. खाद की कीमतों बढ़ने का डर

भारत किसानों की जरूरत के लिए अधिकतर फर्टिलाइज़र आयात करता है। रुपया कमजोर होने पर खाद की कीमतें बढ़ सकती हैं।

3. विदेश में पढ़ाई और यात्रा महंगी होगी

डॉलर महंगा होने से विदेश में बच्चों की पढ़ाई, फीस, रहने का खर्च और इंटरनेशनल ट्रैवल सब महंगे हो जाएंगे।

4. इलेक्ट्रिक व्हीकल और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमत बढ़ेगी

ईवी बैटरी, स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है। रुपया टूटने से इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं।

5. सोना और चांदी और महंगी होगी

भारत सोना-चांदी का सबसे बड़ा आयातक है। डॉलर मजबूत होने पर इनकी कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

6. दवाइयां और मेडिकल उपकरण महंगे होंगे

कई दवाओं के कच्चे माल और मेडिकल इक्विपमेंट विदेश से आते हैं, इसलिए स्वास्थ्य खर्च भी बढ़ सकता है।

7. रोजमर्रा के आयातित सामान की कीमतें बढ़ेंगी

पैक्ड फूड, कुकिंग ऑयल, दालें, सूखे मेवे जैसे उत्पाद जिनका आयात होता है, वे महंगे हो सकते हैं।

8. शिपिंग और एयर कार्गो महंगा

डॉलर महंगा होने से विदेशी शिपिंग और एयर कार्गो चार्ज बढ़ सकते हैं, जिसका असर कई वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा।

9. शेयर बाजार पर बढ़ेगा दबाव

रुपया कमजोर होने पर विदेशी निवेशकों की कमाई कम होती है। ऐसे में वे बाजार से पैसा निकालते हैं, जिससे स्टॉक मार्केट में गिरावट आ सकती है।

क्यों गिर रहा है भारतीय रुपया?

भारतीय रुपये में गिरावट के पीछे कई फैक्टर एक साथ काम कर रहे हैं। आइए समझते हैं:—

विदेशी निवेशकों की बिकवाली: भारतीय बाजार से विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। लगातार FPI आउटफ्लो से रुपया कमजोर हो रहा है।

अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में देरी: अमेरिका के साथ ट्रेड डील में देरी ने भी भारतीय रुपये के प्रति सेंटीमेंट को खराब किया है। इससे भी रुपया टूट रहा है।

निर्यात में तेज गिरावट: भारत का ट्रेड डेफिसिट फिर से चौड़ा हो रहा है—ऑक्टोबर में निर्यात 12% गिरा, जबकि आयात 17% उछला है।

सोना-चांदी के आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: दोनों कीमती धातु की कीमत बढ़ने के बावजूद भी आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। सोने का आयात ही तीन गुना होकर 14.7 अरब डॉलर पहुंच गया। इससे डॉलर की मांग और बढ़ी और रुपये पर सीधे दबाव आया है।

बेदम रुपया

बेदम रुपया

रुपये की कीमत कैसे तय होती है?

रुपये की कीमत बाजार में डॉलर की मांग और आपूर्ति से तय होती है। जब डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर होने लगता है। इसके विपरीत, जब निर्यात बढ़ते हैं या विदेशी निवेशक भारत में पैसा लगाते हैं, तो बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ती है और रुपया मजबूत होता है। रुपये की कीमत पर ब्याज दरें, महंगाई, GDP ग्रोथ, अमेरिका की फेडरल रिजर्व नीति, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक जोखिम जैसे कारकों का भी असर पड़ता है। इसके साथ ही, RBI भी समय–समय पर डॉलर खरीदकर या बेचकर रुपये को संतुलित रखने की कोशिश करता है। कुल मिलाकर, रुपये का मूल्य कई घरेलू और वैश्विक आर्थिक ताकतों से निर्धारित होता है।

क्या रुपये गिरने के फायदे भी हैं?

हां, रुपये गिरने के कई फायदे भी हैं, जैसे जब रुपया कमजोर होता है तो भारतीय उत्पाद विदेशों में सस्ते हो जाते हैं। इससे निर्यातकों को बड़ा फायदा मिलता है। रुपया टूटने पर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मा, IT सेवाओं के निर्यातकों की कमाई बढ़ जाती है। कमजोर रुपया भारत को विदेशी टूरिस्ट के लिए भारत एक सस्ता गंतव्य बन जाता है। इससे पर्यटन सेक्टर को लाभ मिलता है। विदेशी भारतीयों (NRI) को भी कमजोर रुपये से फायदा मिलता है। NRI जब विदेश से भारत पैसा भेजते हैं तो उन्हें प्रत्येक डॉलर पर ज्यादा रुपये मिलते हैं। भारत में मौजूद विदेशी कंपनियों को अपने मुनाफे को डॉलर में बदलते समय लाभ होता है। लेकिन ये फायदे सीमित हैं।

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