करीब ढाई महीने से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चलता तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी ने भारत सहित पूरी दुनिया को बड़े संकट में धकेल दिया है। ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर हो रहे हमलों और प्रमुख समुद्री मार्ग होर्मुज बंद होने से कच्चे तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई बुरी तरह चरमरा गई है। नतीजा यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जो पूरी दुनिया में महंगाई की एक नई लहर लेकर आई है।
भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है। इसलिए इस वैश्विक ऊर्जा संकट की मार भारत पर भी पड़ी है। पेट्रोल-डीजल से लेकर खाने-पीने के सामान, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर और तमाम जरूरी चीजों के दाम बढ़ गए हैं। महंगाई के इस चौतरफा हमले ने आम आदमी के मासिक बजट को बिगाड़ दिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बढ़ती महंगाई के बीच आम आदमी अपने खर्चों को कैसे संभाल सकते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं।
महंगाई बढ़ क्यों रही है?
मौजूदा समय में महंगाई बढ़ने के पीछे वैश्विक कारण ज्यादा जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल महंगा होते ही पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट और सामान ढुलाई का खर्च बढ़ गया है, जिसका असर खाने-पीने की चीजों समेत लगभग हर सेक्टर पर दिखाई दे रहा है। इसके अलावा अमेरिका-ईरान युद्ध से खाद्य तेल, गैस, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद और दवाइयों की लागत बढ़ रही है। सप्लाई की कमी और स्टोरेज समस्याएं भी खाद्य महंगाई को बढ़ा रही हैं।
कमजोर रुपये से पड़ रही दोहरी मार
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी से कच्चे तेल, खाद्य तेलों और इलेक्ट्रॉनिक सामानों का आयात महंगा हो गया है। इसे 'इंपोर्टेड इन्फ्लेशन' (Imported Inflation) कहा जाता है। इसका असर कच्चे तेल की कीमत के अलावा हो रहा है। आयातित सामान महंगा होने से जरूरी सामान के दाम बढ़ रहे हैं। इससे पेंट से लेकर दूसरी जरूरी सामान के दाम बढ़ रहे हैं।
दूध, सब्जियों और खाद्य तेलों के दाम बढ़े
पैकेट वाले दूध की कीमतों में पिछले दो वर्षों में कई बार बढ़ोतरी की गई है। हाल ही में अमूल और मदर डेयरी ने प्रति लीटर 2 रुपये की बढ़ोतरी की है। इसके अलावा सब्जियों और खाद्य तेलों की कीमतों में भी तेजी से उछाल आया है। वहीं दूसरी ओर, बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें मध्यम वर्ग की कमर तोड़ रही हैं। एक तरफ ईंधन महंगा है और दूसरी तरफ उसमें पकने वाला राशन, यानी मार दोनों तरफ से पड़ रही है।
ईंधन के दाम बढ़ने से सफर हुआ महंगा
पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमत बढ़ने से सफर महंगा हो गया है। जिनके पास खुद की गाड़ी है, उनका बजट बढ़ गया है। वहीं, दूसरी ओर ऑटो रिक्शा वाले ने भी भाड़ा बढ़ा दिया है। सीएनजी (CNG) की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद कैब वाले भी भाड़ा बढ़ा रहे हैं।
ईरान युद्ध के बाद बढ़े इस तरह बढ़े दाम
| वस्तु | 1 मार्च 2026 का भाव | 15 मई 2026 का भाव | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| खुली चाय | ₹259.52 | ₹274.25 | +₹14.73 |
| सूरजमुखी तेल | ₹175.85 | ₹185.19 | +₹9.34 |
| टमाटर | ₹26.68 | ₹35.45 | +₹8.77 |
| सोया तेल | ₹150.82 | ₹158.96 | +₹8.14 |
| पाम तेल | ₹136.99 | ₹143.75 | +₹6.76 |
| मूंगफली तेल | ₹194.41 | ₹201.12 | +₹6.71 |
| वनस्पति घी | ₹154.67 | ₹161.30 | +₹6.63 |
| देसी घी | ₹678.79 | ₹684.68 | +₹5.89 |
| सरसों तेल | ₹185.51 | ₹189.03 | +₹3.52 |
| अरहर दाल | ₹119.34 | ₹122.50 | +₹3.16 |
| बैंगन | ₹37.10 | ₹40.19 | +₹3.09 |
| अदरक | ₹24.11 | ₹27.04 | +₹2.93 |
| गुड़ | ₹55.16 | ₹58.00 | +₹2.84 |
| सूजी | ₹44.43 | ₹47.08 | +₹2.65 |
| मूंग दाल | ₹109.08 | ₹111.66 | +₹2.58 |
| साबुत धनिया | ₹36.42 | ₹38.84 | +₹2.42 |
| मसूर दाल | ₹87.70 | ₹89.90 | +₹2.20 |
| केला | ₹46.07 | ₹48.26 | +₹2.19 |
| उड़द दाल | ₹116.08 | ₹118.08 | +₹2.00 |
| जीरा | ₹39.34 | ₹41.19 | +₹1.85 |
| दूध | ₹58.48 | ₹60.06 | +₹1.58 |
| चावल | ₹41.86 | ₹43.28 | +₹1.42 |
| बेसन | ₹94.41 | ₹95.69 | +₹1.28 |
| चना दाल | ₹83.94 | ₹85.09 | +₹1.15 |
| मैदा | ₹40.90 | ₹41.98 | +₹1.08 |
| काली मिर्च | ₹86.50 | ₹87.54 | +₹1.04 |
| साबुत लाल मिर्च | ₹27.74 | ₹28.75 | +₹1.01 |
स्रोत: Department of Consumer Affairs – Price Monitoring Division
क्या आने वाले समय में राहत मिलेगी?
आने वाले समय में महंगाई से राहत मिलेगी या नहीं, यह काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक तनाव, मानसून और RBI की नीतियों पर निर्भर करेगा। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें नरम पड़ती हैं, सप्लाई चेन सुधरती है और मिडिल ईस्ट समेत दुनिया में तनाव कम होता है, तो खाने-पीने से लेकर ईंधन तक की कीमतों में राहत देखने को मिल सकती है। हालांकि फिलहाल हालात ऐसे संकेत नहीं दे रहे हैं। महंगा क्रूड, वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती ट्रांसपोर्ट लागत के चलते आने वाले महीनों में भी घर के बजट पर दबाव बना रह सकता है।
Inflation Pinch.
संकट के इस दौर में कैसे संभाले अपना बजट?
जानकारों का कहना है कि जब महंगाई बढ़ती है तो मंथली बजट को संभालना मुश्किल होता है। फिर भी अगर फिजूलखर्ची समेत कुछ कदम उठाए जाए तो खर्चों को कंट्रोल किया जा सकता है। बजट संभालने का सबसे पहला नियम है कि आप अपनी 'जरूरतों' और 'इच्छाओं' के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचें।
जरूरतें: राशन, बच्चों की फीस, बिजली का बिल, दवाइयां (इनमें कटौती नहीं हो सकती)।
इच्छाएं: हर हफ्ते बाहर खाना खाना, ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स के महंगे सब्सक्रिप्शन, ब्रांडेड कपड़े, बार-बार नए गैजेट्स खरीदना। वर्तमान दौर में इच्छाओं को कुछ समय के लिए टालना ही समझदारी है।
थोक और स्थानीय खरीद: सुपरमार्केट या मॉल की चकाचौंध से खरीदने के बजाय सीधे सब्जी मंडियों से खरीदारी करें। पैकेज्ड सामानों की जगह खुले और शुद्ध अनाज को प्राथमिकता दें, जो अक्सर सस्ते होते हैं।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाएं: अगर संभव हो, तो रोजाना दफ्तर जाने के लिए अपनी निजी कार या बाइक के बजाय मेट्रो या लोकल बसों का उपयोग करें।
