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पेट्रोल में क्यों मिलाया जा रहा है एथेनॉल, गाड़ी मालिक क्यों हैं नाराज? समझें E-20 का पूरा विवाद

E20 पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने से माइलेज और पुरानी गाड़ियों के इंजन पर असर को लेकर विवाद बढ़ा है, जबकि सरकार इसे प्रदूषण घटाने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का कदम बताती है।

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E20 पेट्रोल विवाद: क्यों मिलाया जा रहा है एथेनॉल और क्यों नाराज हैं गाड़ी मालिक? (तस्वीर-AI Image)
Authored by: Ramanuj Singh
Updated Jul 4, 2026, 11:41 IST

E20 Petrol Controversy Explained : देश में इस समय E20 पेट्रोल को लेकर काफी बहस और चर्चा चल रही है। क्योंकि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया (ethanol blending) जा रहा है। हाल के दिनों में आए कुछ सर्वे और सरकारी बयानों के बाद यह मुद्दा और ज्यादा गरमा गया है। गाड़ी मालिकों का कहना है कि इससे उनकी गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है और परफॉर्मेंस पर असर पड़ रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि यह कदम ईंधन आत्मनिर्भरता और प्रदूषण कम करने के लिए जरूरी है। भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की पॉलिसी सरकार द्वारा ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है। एथनॉल एक जैव-ईंधन (biofuel) है, जिसे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।

E20 पेट्रोल पर हंगामा क्यों बरपा?

इस विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि अब कई पेट्रोल पंपों पर सिर्फ E20 पेट्रोल ही मिल रहा है। ग्राहकों के पास बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल चुनने का विकल्प नहीं है। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जिनकी गाड़ियां 2023 से पहले बनी हैं। ऐसी गाड़ियां E20 ईंधन के हिसाब से पूरी तरह डिजाइन नहीं की गई थीं। इसी वजह से कई वाहन मालिक इस बदलाव से नाराज हैं।

E20 पेट्रोल क्या है, क्यों मिलाया जा रहा है इथेनॉल?

E20 पेट्रोल एक मिश्रित ईंधन है। इसमें 80% सामान्य पेट्रोल और 20% एथेनॉल होता है। एथेनॉल एक जैव ईंधन है। इसे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसका उद्देश्य पेट्रोल की खपत कम करना है। साथ ही देश को ईंधन के मामले में आत्मनिर्भर बनाना भी इसका लक्ष्य है। इसे पेट्रोल के साथ मिलाकर उपयोग करने से कच्चे तेल (crude oil) का आयात घटता है और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है। सरकार का लक्ष्य E20 (20% एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) को देशभर में लागू करना है।

क्या सचमुच गाड़ियों का माइलेज कम होता है?

एथेनॉल मिलाए गए पेट्रोल (E20) को लेकर सबसे बड़ा सवाल माइलेज का है। एक्सपर्ट्स के अनुसार एथनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होती है, इसलिए समान दूरी तय करने के लिए थोड़ी अधिक ईंधन खपत हो सकती है। कई वाहन मालिकों का कहना है कि उन्हें पहले की तुलना में 3% से 10% तक माइलेज में गिरावट महसूस हुई है, खासकर पुराने वाहनों में यह अंतर अधिक दिखाई देता है। हालांकि, ऑटोमोबाइल कंपनियां कहती हैं कि नए इंजन E20 फ्यूल के लिए डिजाइन किए गए हैं, इसलिए उनमें माइलेज पर प्रभाव बहुत कम या नगण्य होता है। समस्या मुख्यतः पुराने मॉडल की गाड़ियों में ज्यादा देखी जा रही है, जो इस फ्यूल स्टैंडर्ड के लिए अनुकूल नहीं हैं।

E20 पेट्रोल पर विवाद क्यों? (तस्वीर-AI Image)

E20 पेट्रोल पर विवाद क्यों? (तस्वीर-AI Image)

माइलेज पर क्या असर पड़ रहा है?

E20 पेट्रोल का सबसे बड़ा असर माइलेज पर देखा जा रहा है। इसका कारण वैज्ञानिक है। एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (calorific value) पेट्रोल से कम होती है। इसलिए एक लीटर E20 से उतनी ऊर्जा नहीं मिलती जितनी शुद्ध पेट्रोल से मिलती है।

नई गाड़ियां (2023 के बाद की)

नई गाड़ियों को E20 ईंधन के हिसाब से तैयार किया गया है। इनमें माइलेज का असर बहुत कम होता है। आमतौर पर 1% से 5% तक ही गिरावट देखी जाती है।

पुरानी गाड़ियां (2023 से पहले की)

पुरानी गाड़ियों में असर ज्यादा देखा जा रहा है। कई रिपोर्टों में 10% से 20% तक माइलेज गिरने की बात कही गई है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई बाइक पहले 50 किमी प्रति लीटर देती थी, तो अब यह घटकर 42 से 45 किमी प्रति लीटर तक आ सकती है।

इंजन और पार्ट्स पर असर

इथेनॉल एक अल्कोहल आधारित ईंधन है। इसकी दो खास विशेषताएं होती हैं। यह नमी को सोखता है और कुछ धातुओं तथा रबर पर असर डाल सकता है। पुरानी गाड़ियों में रबर के पाइप और सील्स होते हैं। E20 के संपर्क में आने से ये जल्दी खराब हो सकते हैं। कभी-कभी इनमें सख्ती आ जाती है या लीक होने लगता है। इथेनॉल हवा से नमी खींच लेता है। अगर गाड़ी लंबे समय तक खड़ी रहे, तो फ्यूल टैंक में पानी जमा हो सकता है। इससे अंदरूनी हिस्सों में जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है। फ्यूल पंप और इंजेक्टर भी प्रभावित हो सकते हैं।

स्टार्टिंग और परफॉर्मेंस की दिक्कत

कुछ गाड़ी मालिकों ने यह भी शिकायत की है कि उनकी गाड़ियां सुबह आसानी से स्टार्ट नहीं होतीं। इसे “कोल्ड स्टार्ट” समस्या कहा जाता है। कुछ मामलों में इंजन हल्का कंपन करने लगता है। इसे “रफ आइडलिंग” कहा जाता है। यह समस्या हर वाहन में नहीं दिखती। लेकिन पुरानी गाड़ियों में इसकी संभावना ज्यादा होती है।

इस पर क्या कर रही है सरकार?

सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल देश के लिए जरूरी कदम है। इससे कच्चे तेल का आयात कम होगा। विदेशी मुद्रा की बचत होगी। साथ ही प्रदूषण भी कम करने में मदद मिलेगी। एथेनॉल एक हरित ईंधन माना जाता है। सरकार का यह भी कहना है कि नई गाड़ियां पहले से ही E20 के लिए तैयार हैं। सरकार ने एथनॉल ब्लेंडिंग को एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में आगे बढ़ाया है। भारत ने 2025 तक 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है, जिसे कई हिस्सों में पहले ही लागू किया जा चुका है। सरकार का दावा है कि इससे करोड़ों लीटर कच्चे तेल की बचत हो रही है और किसानों को भी एथनॉल उत्पादन से अतिरिक्त आय मिल रही है। इसके साथ ही ऑटो कंपनियों को E20-फ्रेंडली इंजन बनाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में माइलेज और इंजन पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।

गाड़ी मालिकों का क्या कहना है?

वाहन मालिकों की सबसे बड़ी चिंता माइलेज को लेकर है। दूसरी चिंता इंजन की लंबी उम्र को लेकर है। कई लोगों का कहना है कि हर वाहन E20 के लिए उपयुक्त नहीं है। इसलिए उन्हें विकल्प के रूप में सामान्य पेट्रोल भी मिलना चाहिए। कई गाड़ी मालिकों की राय इस मुद्दे पर मिली-जुली है। कुछ लोगों का कहना है कि पेट्रोल की कीमतें स्थिर रखने और प्रदूषण कम करने के लिए यह अच्छा कदम है, लेकिन माइलेज में कमी से उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। खासकर टैक्सी, ऑटो और लॉजिस्टिक सेक्टर से जुड़े लोग इसे लागत बढ़ाने वाला निर्णय मानते हैं। वहीं कुछ वाहन चालक यह भी मानते हैं कि ईंधन में बदलाव के साथ शुरुआती समायोजन जरूरी होता है और समय के साथ इंजन भी बेहतर तरीके से काम करने लगता है।

वाहन मालिकों के लिए जरूरी सुझाव

कुछ सावधानियां अपनाकर नुकसान कम किया जा सकता है। समय पर सर्विसिंग करवाना बहुत जरूरी है। फ्यूल फिल्टर और स्पार्क प्लग की जांच कराते रहें। गाड़ी को लंबे समय तक खड़ा न रखें। अगर टैंक में E20 है, तो गाड़ी को हफ्तों तक बंद न छोड़ें। टैंक को करीब फुल रखने से नमी कम बनती है।

फ्यूल एडिटिव्स का उपयोग

बाजार में E20 के लिए विशेष एडिटिव्स उपलब्ध हैं। ये फ्यूल सिस्टम को साफ रखने में मदद करते हैं। इनसे माइलेज में हल्का सुधार भी देखा जा सकता है। E20 पेट्रोल एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव है। इसका उद्देश्य देश को ऊर्जा के मामले में मजबूत बनाना है। लेकिन इसका असर सभी वाहनों पर एक जैसा नहीं है। नई गाड़ियां इसे आसानी से इस्तेमाल कर रही हैं। पुरानी गाड़ियों में कुछ समस्याएं सामने आ रही हैं। आने वाले समय में तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ यह स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। तब तक वाहन मालिकों को सावधानी और सही रखरखाव के साथ इसका उपयोग करना होगा।

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