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विदेशी क्लाइंट से डॉलर में मिलता है पैसा? RBI ने Freelancers और YouTubers को दी बड़ी राहत

विदेशी क्लाइंट से डॉलर में कमाई करने वाले फ्रीलांसर और कंटेंट क्रिएटर्स नए RBI नियमों को लेकर चिंतित थे। अब RBI गवर्नर ने स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत लेनदेन की रिपोर्टिंग जरूरी नहीं है। छोटे निर्यातकों को भी राहत मिली है।

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RBI ने Freelancers और YouTubers को दी बड़ी राहत

विदेशी क्लाइंट से डॉलर या दूसरी विदेशी करेंसी में कमाई करने वाले फ्रीलांसर, कंटेंट क्रिएटर, यूट्यूबर और छोटे सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अहम स्पष्टीकरण दिया है। नए विदेशी मुद्रा नियमों को लेकर लोगों के बीच यह चिंता थी कि विदेश से मिलने वाले हर भुगतान के लिए उन्हें अतिरिक्त कागजी कार्रवाई करनी पड़ेगी। अब RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत प्रकृति के विदेशी मुद्रा लेनदेन के लिए लोगों को अलग से रिपोर्टिंग करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, यह राहत हर तरह की विदेशी कमाई पर अपने आप लागू नहीं होती। लेनदेन की प्रकृति और उस पर लागू नियमों को समझना जरूरी है।

1 अक्टूबर से लागू हुए नए नियम

RBI के नए Foreign Exchange Management यानी FEMA नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू हुए हैं। इनका उद्देश्य विदेश से होने वाले आयात और निर्यात के लेनदेन की जानकारी को बेहतर बनाना और रिपोर्टिंग प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है। इन नियमों के तहत सेवाओं के निर्यात से जुड़े कुछ लेनदेन के लिए Export Declaration Form (EDF) की व्यवस्था भी की गई है। इसे लेकर फ्रीलांसरों और छोटे कारोबारियों के बीच भ्रम पैदा हुआ था कि क्या उन्हें विदेश से मिलने वाले हर भुगतान की अलग रिपोर्ट देनी होगी। RBI ने अब इस भ्रम को दूर करने के लिए स्पष्टीकरण दिया है।

किन लोगों को रिपोर्टिंग से राहत मिली?

RBI गवर्नर के मुताबिक, व्यक्तिगत प्रकृति के विदेशी मुद्रा लेनदेन के लिए लोगों को रिपोर्टिंग करने की जरूरत नहीं है, चाहे लेनदेन की रकम कितनी भी हो। उदाहरण के तौर पर, किसी व्यक्ति द्वारा टीवी चैनल, ऐप, जर्नल या अखबार की सदस्यता के लिए विदेश में भुगतान करना शामिल है। विदेश में ट्यूशन या छोटे सॉफ्टवेयर से जुड़ी सेवाएं देने वाले व्यक्तियों के मामलों का भी उल्लेख किया गया है। इसका मकसद यह स्पष्ट करना है कि नए नियमों के कारण हर व्यक्ति पर अतिरिक्त रिपोर्टिंग का बोझ नहीं डाला जा रहा है।

10 लाख रुपये तक के बिल पर क्या है राहत?

RBI ने छोटे निर्यातकों के लिए भी एक अहम सुविधा स्पष्ट की है। 10 लाख रुपये तक के प्रत्येक बिल के लिए, लागू रिपोर्टिंग प्रक्रिया में इनवॉइस जमा करने के बजाय सेल्फ-डिक्लेरेशन यानी स्वयं दिया गया घोषणा-पत्र इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे छोटे कारोबारियों और सेवा देने वालों के लिए दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया आसान हो सकती है। लेकिन ध्यान रखें कि यह सुविधा रिपोर्टिंग से पूरी छूट नहीं है। यह केवल तय सीमा के भीतर इनवॉइस के विकल्प के तौर पर सेल्फ-डिक्लेरेशन देने की सुविधा है।

बैंक की क्या होगी भूमिका?

RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि आयात और निर्यात से जुड़े लेनदेन की रिपोर्टिंग के लिए संबंधित बैंक और अधिकृत डीलर जिम्मेदार होंगे। इसका मतलब है कि हर व्यक्ति को खुद सिस्टम में जाकर सभी जानकारी दर्ज करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, ग्राहक को अपने बैंक या अधिकृत डीलर को जरूरी जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं। इसलिए विदेशी क्लाइंट से भुगतान लेने वालों को अपने बैंक से यह जरूर पूछना चाहिए कि उनके काम और भुगतान पर कौन-सी प्रक्रिया लागू होती है।

Freelancers और Content Creators क्या करें?

अगर आप विदेश से फ्रीलांसिंग, कंटेंट क्रिएशन, कंसल्टिंग या किसी अन्य सेवा के बदले पैसा प्राप्त करते हैं, तो यह मानकर न चलें कि हर भुगतान रिपोर्टिंग से मुक्त है। व्यक्तिगत लेनदेन और सेवा निर्यात के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। अपने क्लाइंट के बिल, भुगतान का रिकॉर्ड और बैंक से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखें। RBI ने इन नियमों को लेकर भ्रम दूर करने के लिए FAQ जारी करने की बात भी कही है। इसलिए किसी भी नए अनुपालन कदम से पहले अपने बैंक से पुष्टि करना बेहतर होगा। कुल मिलाकर, RBI का स्पष्टीकरण लोगों की चिंता कम करता है, लेकिन विदेशी कमाई से जुड़े हर मामले में नियमों की सही जानकारी लेना जरूरी है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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