Indian $5 Trillion GDP Dream : भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। इसके बावजूद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा भारत $5 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनने का लक्ष्य तय समय पर हासिल नहीं कर पाएगा।
सवाल है कि जब भारत की GDP ग्रोथ की रफ्तार मजबूत है, तो फिर डॉलर में अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ने का अनुमान क्यों घट रहा है? इसकी सबसे बड़ी वजह रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना है। इसके अलावा रियल GDP, नॉमिनल GDP और विनिमय दर के बीच का अंतर समझना भी जरूरी है।
इस पूरे मामले को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि GDP ग्रोथ और अर्थव्यवस्था का कुल आकार दो अलग-अलग चीजें हैं। GDP यानी ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट देश में एक निश्चित अवधि के दौरान उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को बताती है।
जब कहा जाता है कि भारत की GDP ग्रोथ 7% रहने का अनुमान है, तो इसका मतलब है कि महंगाई के प्रभाव को हटाने के बाद अर्थव्यवस्था के वास्तविक उत्पादन में इतनी वृद्धि होने की उम्मीद है।
IMF के अक्टूबर अनुमानों के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में $4.06 ट्रिलियन और 2027 में $4.52 ट्रिलियन की हो सकती है। इसके बावजूद 2028 के लिए GDP का अनुमान अप्रैल के $5.1 ट्रिलियन से घटाकर करीब $4.996 ट्रिलियन कर दिया गया है।
तेजी जीडीपी ग्रोथ के बाद भी डॉलर टर्म में नहीं बढ़ी इकोनॉमी
क्यों बिगड़ रहा सपने का गणित?
भारत के $5 ट्रिलियन के लक्ष्य में देरी के पीछे रुपये और डॉलर की एक्सचेंज रेट की अहम भूमिका है। मान लीजिए किसी देश की नॉमिनल GDP ₹400 लाख करोड़ है। अगर एक डॉलर की कीमत ₹80 है, तो डॉलर में अर्थव्यवस्था का आकार $5 ट्रिलियन होगा। लेकिन यदि रुपया कमजोर होकर ₹100 प्रति डॉलर पर पहुंच जाए, तो उतनी ही रुपये वाली GDP का डॉलर मूल्य घटकर $4 ट्रिलियन रह जाएगा।
रुपये में बढ़ी, डॉलर में क्यों घटी GDP?
IMF के अनुमानों के मुताबिक, 2028 में भारत की नॉमिनल GDP रुपये में ₹471.9 लाख करोड़ से बढ़कर ₹477.1 लाख करोड़ होने का अनुमान है। यानी घरेलू मुद्रा में अर्थव्यवस्था के आकार का अनुमान करीब 1.1% बढ़ा है। इसके बावजूद डॉलर में GDP का अनुमान लगभग $63 अरब घट गया।
ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि रुपये में GDP की बढ़ोतरी पर एक्सचेंज रेट का असर भारी पड़ गया। यदि 2028 में ₹93.3 प्रति डॉलर की पुरानी विनिमय दर लागू रहती, तो ₹477.1 लाख करोड़ की GDP करीब $5.11 ट्रिलियन होती।
₹95.5 प्रति डॉलर की नई अनुमानित दर पर यही आंकड़ा लगभग $4.996 ट्रिलियन रह जाता है। यानी घरेलू अर्थव्यवस्था का अनुमानित आकार बढ़ने के बावजूद डॉलर में उसका मूल्य घट गया। इसी वजह से $5 ट्रिलियन का लक्ष्य एक साल आगे खिसकता दिखाई दे रहा है।
आखिर रुपया कमजोर क्यों हो रहा है?
रुपये की एक्सचेंज रेट दर पर घरेलू और वैश्विक, दोनों तरह के कारकों का असर पड़ता है। इनमें कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेश का प्रवाह और अमेरिकी डॉलर की मजबूती प्रमुख हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर आयात के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ सकती है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
क्या चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा भारत?
$5 ट्रिलियन का लक्ष्य खिसकने का मतलब यह नहीं है कि भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ना बंद हो गई है। IMF के अक्टूबर अनुमानों के मुताबिक, भारत 2027 में $4.52 ट्रिलियन की GDP के साथ ब्रिटेन और जापान से आगे निकलकर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
हालांकि, भारत, ब्रिटेन और जापान के अनुमानित आर्थिक आकार में अंतर ज्यादा नहीं है। इसलिए विनिमय दर में बदलाव से वैश्विक रैंकिंग भी प्रभावित हो सकती है। यहां एक और बात समझना जरूरी है। किसी देश की कुल GDP का आकार और उसके नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय एक जैसी चीजें नहीं हैं।
