आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने सभी राज्यों के रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटीज (RERA) को सलाह दी है कि वे ईरान युद्ध के चलते मिडिल ईस्ट में चल रहे हालात की वजह से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के रजिस्ट्रेशन और उन्हें पूरा करने की समय-सीमा में 4 महीने की बढ़ोतरी करें। मंत्रालय ने कहा कि मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात ने ग्लोबल सप्लाई चेन पर बुरा असर डाला है, जिससे कंस्ट्रक्शन मटीरियल की कमी हो गई है और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने में दिक्कत आ रही है। आइए समझते हैं कि इस फैसले का रियल एस्टेट डेवलपर्स और होम बायर्स पर क्या होगा असर?
रियल एस्टेट
फोर्स मेज्योर क्लॉज क्या है?
RERA के तहत, फोर्स मेज्योर क्लॉज निर्माण और डिलीवरी समयसीमा का एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करती है कि किसी भी पक्ष (डेवलपर या घर खरीदार) को ऐसी परिस्थितियों के कारण अनुचित कठिनाई का सामना न करना पड़े, जिन पर न तो उनका कोई नियंत्रण है और न ही वे भविष्यवाणी कर सकते हैं।
बिल्डर्स के लिए इस फैसले के मायने
बिल्डर्स के लिए, यह सलाह रेगुलेटरी राहत देती है क्योंकि यह RERA के तहत डेवलपर्स को ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटों के कारण होने वाली देरी के लिए तुरंत रेगुलेटरी कार्रवाई का सामना किए बिना प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए अतिरिक्त समय देती है। क्रेडाई वेस्टर्न यूपी के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने कहा कि यह रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए समयानुकूल और व्यावहारिक पहल है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के कारण डेवलपर्स अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यह राहत प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन की गति बनाए रखने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित रेरा प्राधिकरण इस एडवाइजरी को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं तो डेवलपर्स पर वित्तीय दबाव कम होगा, निर्माण कार्य में निरंतरता बनी रहेगी और अंततः डेवलपर्स के साथ-साथ घर खरीदारों के हित भी सुरक्षित रहेंगे।
डिलीजेंट बिल्डर्स के सीओओ, ले.क. अश्वनी नागपाल (रि) के अनुसार, यह एक बड़ी राहत है। मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण लंबे समय तक आई रुकावटों से कुशल निर्माण श्रमिकों की कमी हो गई और कई जरूरी निर्माण सामग्रियों की कीमतें तेजी से बढ़ गईं, जिससे प्रोजेक्ट की लागत और डिलीवरी शेड्यूल दोनों पर काफी दबाव पड़ा। इस फैसले से प्रमोटरों को निर्माण योजनाओं को बेहतर ढंग से प्रबंधन करने और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
होम बायर्स पर क्या होगा असर?
घर खरीदने वालों के लिए, चार महीने की मोहलत का मतलब घर का कब्जा मिलने में देरी हो सकती है। हालांकि, इस कदम का मकसद यह पक्का करना है कि कंस्ट्रक्शन मटीरियल की सप्लाई में रुकावट के बावजूद प्रोजेक्ट पूरे हों, न कि बीच में ही रुक जाएं। इसलिए यह फैसला होम बायर्स के लिए भी फायदेमंद है।
