प्रॉपर्टी बेचने पर लगा मोटा टैक्स? अंडर-कंस्ट्रक्शन मकान में निवेश कर ऐसे बचाएं लाखों रुपए, जानिए यह खास नियम

पुरानी प्रॉपर्टी बेचने पर होने वाले भारी-भरकम 'कैपिटल गेन्स टैक्स' से बचना अब आसान है। इनकम टैक्स के सेक्शन 54 के तहत, पुराना मकान बेचकर किसी अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी में निवेश करके आप लाखों का टैक्स पूरी तरह बचा सकते हैं।

भारत में प्रॉपर्टी या पुराना घर बेचना सिर्फ एक बड़ा वित्तीय सौदा नहीं होता, बल्कि इसके साथ एक बड़ी टैक्स लायबिलिटी भी जुड़ी होती है। जब भी आप कोई पुराना रिहायशी मकान या जमीन बेचते हैं, तो उस पर मिले मुनाफे पर सरकार को 'कैपिटल गेन्स टैक्स' (Capital Gains Tax) देना पड़ता है। अगर आपने प्रॉपर्टी को दो साल (24 महीने) से अधिक समय तक अपने पास रखने के बाद बेचा है, तो इस मुनाफे को लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) कहा जाता है। इस टैक्स के कारण आपके मुनाफे का एक बहुत बड़ा हिस्सा सरकार के खाते में चला जाता है, जिससे बचने के लिए लोग अक्सर नया रेडी-टू-मूव (बना-बनाया) घर तलाशते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयकर कानून के तहत आप एक निर्माणाधीन या अंडर-कंस्ट्रक्शन मकान (Under-Construction Property) में पैसा लगाकर भी अपना लाखों रुपए का कैपिटल गेन्स टैक्स पूरी तरह बचा सकते हैं?

Capital Gain Tax

निर्माणाधीन बिल्डिंग कैसे बचाएगी टैक्स?

इनकम टैक्स एक्ट 1961 का सेक्शन 54 (Section 54) टैक्सपेयर्स को यह शानदार मौका देता है। बहुत से लोगों को यह भ्रम रहता है कि टैक्स छूट का लाभ केवल तभी मिलता है जब पुराना घर बेचकर तुरंत कोई तैयार फ्लैट या मकान खरीदा जाए। लेकिन असलियत यह है कि कानून आपको एक अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी में निवेश करने या अपनी खुद की जमीन पर नया मकान बनवाने के लिए भी टैक्स में पूरी छूट प्रदान करता है। इस नियम का सही इस्तेमाल करके आप न सिर्फ टैक्स बचा सकते हैं, बल्कि अपनी पसंद का नया घर भी तैयार करवा सकते हैं। आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के जरिए टैक्स बचाने का यह पूरा गणित और इसकी समय-सीमा क्या है।

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