कोरोना संकट में इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी क्या होनी चाहिए?, जानिए ये 4 तरीके

देश और दुनिया में कोरोना वायरस प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। जानिए इस हाल में हमारी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी क्या होनी चाहिए?

What should be your investment strategy during Coronairus (Covid-19) crisis? Know these 4 ways
कोरोना संकट में निवेश की रणनीति 

मौजूदा कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के कारण हाल के सप्ताहों में पूरी दुनिया के शेयर मार्केट में बहुत ज्यादा वोलेटिलिटी देखने को मिली है जिससे मंदी की चिंता बढ़ने लगी है और सालों का मुनाफा दिनों में साफ होता जा रहा है। यह समझने लायक बात है कि इन्वेस्टर्स इससे होने वाले नुकसान को महसूस करने लगे हैं और अब वे अपने पैसे को बढ़ाने की जगह अपने पैसे को सुरक्षित करने पर ध्यान देने लगे हैं। लेकिन, बात यही है कि वर्तमान में हम जिस परिस्थिति से गुजर रहे हैं ऐसी कठोर परिस्थितियों में ठंडे दिमाग से काम लेना जरूरी होता है क्योंकि डर में फाइनेंसियल फैसले लेने से हमारा फाइनेंसियल फ्यूचर बर्बाद हो सकता है। एक इन्वेस्टर होने के नाते, आपको अपनी व्यावहारिक स्ट्रेटेजी पर विश्वास रखना चाहिए या अपने बेशकीमती इन्वेस्टमेंट्स पर मौजूदा परिस्थिति के झटकों को कम करने के लिए फिर से कुछ प्लान बनाने चाहिए। इसके अलावा, आपको धैर्य से काम लेना चाहिए क्योंकि इस बात के पर्याप्त संकेत मिल रहे हैं कि यह आर्थिक अनिश्चितता शायद कुछ समय के लिए ही रहेगी।

गरीबों के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपए के फाइनेंसियल पैकेज से लेकर उधारकर्ताओं के लिए लोन मोरेटोरियम तक, सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक, परेशान इन्वेस्टर्स, उधारकर्ताओं और आम लोगों को राहत पहुंचाने के लिए अनगिनत उपाय कर रहे हैं। लेकिन, एक इन्वेस्टर होने के नाते, यदि मार्केट की वोलेटिलिटी आपको परेशान कर रही है तो आप यहाँ बताई गई कुछ स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल कर सकते हैं:-

अपने इन्वेस्टमेंट में लगे रहें
डरें नहीं। यह किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति में लागू होने वाला पहला नियम है। शेयर मार्केट में हड़कंप मचने पर इन्वेस्टर्स के दिल में डर पैदा हो जाता है। इस गिरते मार्केट के दौर में अपना इन्वेस्टमेंट निकालने का मन कर सकता है, लेकिन इसके परिणामों के बारे में ध्यानपूर्वक सोचे बिना ऐसा करने से आगे चलकर आपके पोर्टफोलियो पर बुरा असर पड़ सकता है। कुछ भी हमेशा-हमेशा के लिए नहीं रहता है, और इसी तरह इस कोविड-19 संकट के कारण मार्केट्स पर आया यह संकट भी कुछ समय बाद दूर हो सकता है। अपनी फाइनेंसियल क्षमता और रिस्क उठाने की सहनशीलता का मूल्यांकन करने के बाद, आप इस गिरते मार्केट में अधिक से अधिक शेयर खरीदने के बारे में भी सोच सकते हैं क्योंकि अभी मार्केट डाउन है। इसलिए, अपने मौजूदा इन्वेस्टमेंट्स को न निकालें, और इसके विपरीत, यदि आपका फाइनेंस इस लायक है तो आप इस फाइनेंसियल हड़कंप का इस्तेमाल अधिक से अधिक शेयर खरीदने के मौके के रूप में कर सकते हैं। इसके अलावा, यदि आप सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के माध्यम से म्यूच्यूअल फंड में इन्वेस्ट करते हैं तो आपको उन्हें बंद नहीं करना चाहिए यदि आप उन्हें अपने लॉन्ग टर्म फाइनेंसियल लक्ष्यों के लिए इन्वेस्ट कर रहे हैं क्योंकि SIP, मार्केट के इस तरह के झटकों को बर्दाश्त करने और लम्बे समय में मनचाहा रिटर्न दिलाने के मामले में काफी मददगार होता है। इसके अलावा, गिरते मार्केट के कारण इन्वेस्टर्स को बहुत अधिक डिस्काउंट पर अधिक से अधिक म्यूच्यूअल फंड यूनिट्स खरीदने का मौका मिल सकता है।

अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करें और उसे मजबूत बनाएं
डाइवर्सिफिकेशन वोलेटिलिटी से निपटने के सबसे अच्छे तरीकों में से एक है। यदि आपने अभी तक ऐसा नहीं किया है तो आप अभी भी अपने पैसे को अलग-अलग एसेट क्लास में रख सकते हैं। इसका सीधा सा मतलब यही है कि आपके पोर्टफोलियो में अपनी रिस्क उठाने की चाहत, आमदनी, उम्र, लिक्विडिटी, और फाइनेंसियल लक्ष्य के अनुसार शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म फाइनेंसियल प्रोडक्ट्स का एक मिश्रण होना चाहिए। एक डाइवर्सिफाइड फोलियो आपके इन्वेस्टमेंट को मार्केट

का प्रेशर झेलने में मदद करता है। इसलिए यदि आप इस समय उथल-पुथल से भरे मार्केट में मन की शांति चाहते हैं तो डाइवर्सिफिकेशन का रास्ता अपनाएं। अपने फाइनेंसियल लक्ष्यों के आधार पर, डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) या फिक्स्ड डिपोजिट में इन्वेस्ट करें, या म्यूच्यूअल फंड्स के माध्यम से इक्विटी में इन्वेस्ट करें। इसके अलावा, गिरावट के दौरान अपने पोर्टफोलियो के अधिकांश हिस्से को बेचने या उसे फिर से एडजस्ट करने की कोशिश न करें क्योंकि ऐसा करने से आपको भारी नुकसान हो सकता है। आपके लिए क्या सबसे अच्छा है इसे समझने के लिए आप एक फाइनेंसियल एडवाइजर की मदद ले सकते हैं।

अधिक से अधिक लिक्विडिटी पाने के लिए सबसे पहले अपने महंगे कर्ज को चुकाने की कोशिश करें
कोरोना वायरस संकट के कारण अप्रत्याशितता और अनिश्चितता का माहौल पैदा होने के कारण हमें आर्थिक मंदी और नौकरी खोने का डर सताने लगा है। RBI ने इस वैश्विक महामारी के दौरान अपने फाइनेंस को बेहतर ढंग से मैनेज करने में उधारकर्ताओं की मदद करने के लिए बैंकों को टर्म लोन और क्रेडिट कार्ड ड्यू पर 3 महीने का मोरेटोरियम देने के लिए कहा है। लेकिन, इस बात का ध्यान रखें कि इस 3 महीने वाली EMI हॉलिडे का लाभ उठाने का ऑप्शन चुनने पर आपके लोन पर इंटरेस्ट जमा होता रहेगा। इसलिए, यदि कोरोना वायरस संकट के कारण आपके कैश फ्लो पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है तो आपको अपने लोन और क्रेडिट कार्ड का रीपेमेंट करते रहना चाहिए।

यदि आपको कुछ समय के लिए अधिक इंटरेस्ट वाले कर्ज जैसे क्रेडिट कार्ड ड्यू या पर्सनल लोन को चुकाने में परेशानी हो रही है तो आप चाहें तो हाल के सप्ताहों में रेगुलर खर्च में आई गिरावट के कारण बचने वाले पैसे का इस्तेमाल करके उन्हें जल्द से जल्द चुका सकते हैं। इसके अलावा आप डेब्ट कंसोलिडेशन का रास्ता भी चुन सकते हैं और एक बार में ही अपने अधिक इंटरेस्ट वाले सभी क्रेडिट कार्ड कर्ज और लोन को चुकाने के लिए अपने उधारदाता से इस डिस्काउंट पीरियड के दौरान थोड़े सस्ते इंटरेस्ट रेट पर उधार लेने के बारे में भी सोच सकते हैं। अपने कर्ज को चुका देने से आपके हाथ में अधिक से अधिक पैसे आएंगे जिसका इस्तेमाल आप अपना इमरजेंसी फंड तैयार करने या उसे बढ़ाने के लिए या इस संकट के कारण पैदा होने वाली चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहने के लिए स्मार्ट इन्वेस्टमेंट करने के लिए कर सकते हैं।

अन्य अधिक सुरक्षित इन्वेस्टमेंट ऑप्शंस के बारे में पता लगाने की कोशिश करें
आपको शेयर मार्केट में आई गिरावट के कारण अपने इन्वेस्टमेंट को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहिए। आप बचे हुए पैसे को सुरक्षित इन्वेस्टमेंट ऑप्शंस जैसे स्मॉल सेविंग्स स्कीम में इन्वेस्ट कर सकते हैं जहाँ आपको पैसे की सुरक्षा के साथ-साथ, हाल ही में इंटरेस्ट रेट कम होने के बावजूद एक जैसा रिटर्न भी मिलता है। इसके अलावा आप अपने पैसे को एक नॉन-क्यूमुलेटिव फिक्स्ड डिपोजिट में इन्वेस्ट करने के बारे में भी सोच सकते हैं जिससे आपको अपनी जरूरत के अनुसार रेगुलर इंटरेस्ट कमाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा आप अपने इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो पर मार्केट की वोलेटिलिटी के असर को कम करने के लिए अपने गोल्ड इन्वेस्टमेंट को थोड़ा बढ़ाने के बारे में भी सोच सकते हैं - चाहे वह फिजिकल रूप में हो या डीमैटरियलाइज्ड इंस्ट्रूमेंट्स जैसे गोल्ड म्यूच्यूअल फंड्स और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स के रूप में।

जहां एक तरफ संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कोरोना वायरस संकट को दूसरे विश्व युद्ध के बाद दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती कहा है, वहीं दूसरी तरफ अंतर्राष्ट्रीय निकाय की व्यापार शाखा ने दुनिया भर में अरबों डॉलर के पर्सनल इनकम का नुकसान होने का पूर्वानुमान लगाया है। यह फाइनेंसियल हड़कंप आपको भारत में भी महसूस हो सकते हैं जबकि इसके बारे में साफ़ तौर पर अभी कुछ कहना थोड़ी जल्दबाजी होगी। इसलिए, ऐसे मुश्किल समय से निपटने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप अपने पर्सनल फाइनेंस का फिर से मूल्यांकन करें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।

(इस लेख के लेखक, BankBazaar.com के CEO आदिल शेट्टी हैं)
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी एक्सपर्ट की रिपोर्ट के आधार पर दी जा रही है। बाजार जोखिमों के अधीन होते हैं, इसलिए निवेश के पहले अपने स्तर पर सलाह लें।)

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