SuperTech Twin Tower Case: नियमों को धता बताता रहा सुपरटेक, आखिर इन वजहों से फैसला गया खिलाफ

बिजनेस
ललित राय
Updated Sep 01, 2021 | 11:20 IST

नोएडा सेक्टर 93 स्थित सुपरटेक के ट्विन टॉवर को गिराए जाने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। यहां हम बताएंगे दो बड़ी वजह जो सुपरटेक के खिलाफ गई

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नियमों को धता बताता रहा सुपरटेक, आखिर इन वजहों से फैसला गया खिलाफ 

मुख्य बातें

  • नोएडा सेक्टर 93 स्थित सुपरटेक के ट्विन टॉवर को गिराए जाने के आदेश
  • सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि नियमों की अनदेखी हुई
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्विन टॉवर को गिराए जाने के दिए थे निर्देश

अगर आप दिल्ली से कालिंदी कुंज के रास्ते नोएडा में दाखिल हों तो दाएं हाथ दो ऊंचे ऊंचे टॉवर दिखाई देंगे। लेकिन बहुत जल्द वो इतिहास बन जाएंगे। सेक्टर 93 स्थित इन ट्विवन टावर सुपरटेर एमेरैल्ड कोर्ट के नाम से जाना जाता है और यह सुपरटेक बिल्डर का है। इसे गिराए जाने का आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी दिया था। हालांकि बिल्डर और कुछ बॉयर फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ट्विन टॉवर बनाते समय नियमों की अनदेखी की गई। इसके साथ ही बायर्स को 12 फीसद ब्याज के साथ रकम वापस लौटाने के लिए भी कहा। अब सवाल यह है कि आखिर वो कौन सी वजहें सुपरटेक के खिलाफ गईं।

सुपरटेक के खिलाफ गए दो वजह
मूल तौर पर इस ट्विन टॉवर में भूतल समेत 9 फ्लोर के 14 टॉवर बनने थें। लेकिन समय के साथ साथ टॉवर की ऊंचाई बढ़ती गई। प्रावधान यह था कि बिल्डर को संशोधन के लिए RWA से इजाजत लेनी थी लेकिन बिल्डर ने उसकी परवाह नहीं की। इसके साथ नेशनल बिल्डिंग कोड में दो आवासीय टॉवर के बीच 16 मीटर की दूरी आवश्यक है लेकिन ट्विन टॉवर में नियमों की अनदेखी की गई। 

2004 में जमीन का हुआ था आवंटन
करीब 17 साल पहले 2004 में सेक्टर 93 ए में करीब 48 हजार वर्ग मीटर का प्लाट एमेरैल्ड कोर्ट के नाम आवंटित था। ओरिजनल प्लान में 14 टॉवर का नक्शा पास किया गया। नक्शे में सभी टॉवर भूतल समेत 9 फ्लोर के थे। 2006 में सप्लीमेंट्री लीज डीड के तहक 6556 वर्ग मीटर और जमीन दी गई और अब कुल क्षेत्रफल 54 हजार वर्ग मीटर के करीब हो गया।अतिरिक्त जमीन पर कब्जे का सर्टिफिकेट 2006 में ही जारी किया और 2006 के बाद आवंटियों को एफएआर में इजाफा करने का मौका मिला। 

पहला संशोधन
2006 में पहले संशोधन के साथ कुल 14 टॉवर को भूतल समेत 11 फ्लोर किया गया और नक्शा पास हो गया। इसके साथ ही टॉवर 15 का भी नक्शा पास हुआ। इसके साथ ही टॉवर 16 का नक्शा भी अथॉरिटी से पास हो गया। इस तरह से कुल 16 टॉवर, 11 फ्लोर के पास किए जिसमें प्रत्येक टॉवर की उंचाई 37 मीटर रखी गई।
दूसरा संशोधन
दूसका संशोधन 2009 में किया गया। इसमें एक टॉवर और बढ़ाया गया और भूतल समेत 24 मंजिल निर्माण का नक्शा पास हुआ और ऊंचाई 73 मीटर रखी गई। 
तीसरा संशोधन
2012 में तीसरा नक्शा पास किया गया। इसमें एफएआर बढ़ाया गया और दोनों टॉवर यानी 16 और 17 में भूतल समेत 40 मंजिल किए जाने की मंजूरी मिली और ऊंचाई 121 मीटर तय की गई। 

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