क्या आपको BLR या MCLR से RLLR लोन सिस्टम में जाना चाहिए?

BLR सिस्टम में, बैंक अपने फंड्स के एवरेज कॉस्ट को ध्यान में रखते हुए लेंडिंग रेट तय करते हैं। MCLR सिस्टम में, फंड्स के मार्जिनल कॉस्ट के आधार पर लोन रेट तय किया जाता है। 

Should you go from BLR or MCLR to RLLR loan system?
अपना लोन सिस्टम बदलाव करना चाहते हैं? 

बैंकों का लेंडिंग सिस्टम, अधिक पारदर्शी और मौजूदा आर्थिक परिस्थिति के अनुरूप बनाने के लिए RBI (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) ने बैंकों को पिछले 10 साल में तीन लेंडिंग सिस्टम्स - 2010 में BLR (बेस लेंडिंग रेट) सिस्टम, 2016 में MCLR (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट) सिस्टम, और अक्टूबर 2019 में EBLR (एक्सटर्नल बेंचमार्क-लिंक्ड लेंडिंग रेट) सिस्टम को लागू करने का निर्देश दिया है। ऐसा करना बेहद जरूरी है क्योंकि लोन इंटरेस्ट रेट में मामूली उतार-चढ़ाव से भी उधारकर्ता को बहुत फर्क पड़ सकता है, खास तौर पर जब वह होम लोन जैसा कोई लॉन्ग-टर्म लोन चुका रहा हो। जैसे, यदि आपने 20 साल के लिए 50 लाख रुपए का होम लोन लिया है तो आपके लोन इंटरेस्ट रेट में सिर्फ 1% की कटौती होने से वह 8% से 7% हो जाएगा जिससे आपका EMI अमाउंट 41,822 रुपए से घटकर 38,765 रुपए हो जाएगा जिससे आपके इंटरेस्ट का कुल बोझ 7.3 लाख रुपए तक कम हो जाएगा। सोच-समझकर अपना लोन सिस्टम बदलने का फैसला करने में आपकी मदद करने के लिए नीचे कुछ महत्वपूर्ण बातें बताई जा रही हैं।

BLR से MCLR से EBLR इंटरेस्ट सिस्टम में जाना

BLR सिस्टम में, बैंक अपने फंड्स के एवरेज कॉस्ट को ध्यान में रखते हुए लेंडिंग रेट तय करते हैं। MCLR सिस्टम में, फंड्स के मार्जिनल कॉस्ट के आधार पर लोन रेट तय किया जाता है। लेकिन, हर बार RBI द्वारा रेपो रेट में कटौती करने पर इन दोनों सिस्टम्स से भी उधारकर्ताओं तक कम रेट कटौती का लाभ ठीक से नहीं पहुंचा। EBLR सिस्टम के तहत, RBI ने बैंकों को अपने फ्लोटिंग रेट लोन को रेपो रेट सहित किसी भी रिकमेंडेड एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ने का निर्देश देते हुए उन्हें कम-से-कम हर तीन महीने में एक बार अपना लेंडिंग रेट रिसेट करने के लिए कहा। रेपो-लिंक्ड लोन, यानी रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) लोन में जाने वाले उधारकर्ताओं को अक्टूबर से RBI के निर्देशानुसार रेपो रेट में होने वाले बदलाव के बराबर अपने लोन इंटरेस्ट रेट में तुरंत बदलाव देखने को मिला है।

BLR या MCLR-लिंक्ड लोन भी सस्ते हो गए हैं लेकिन थोड़ी धीमी गति से। MCLR सिस्टम में, बैंक आम तौर पर अपने होम लोन को अपने 6 महीने या एक साल के MCLR रेट से जोड़ देते हैं; इसलिए, उनके लोन इंटरेस्ट रेट हर 6 महीने से एक साल में बदलते रहते हैं। अब यदि RBI, रेपो रेट में कटौती करती है लेकिन MCLR रिसेट पीरियड के भीतर उसे फिर से बढ़ाने का फैसला करती है तो उधारकर्ता को अपने लोन इंटरेस्ट रेट में कोई बदलाव नहीं दिखेगा। दूसरी तरफ, बैंकों को EBLR सिस्टम में तीन महीने में कम-से-कम एक बार अपना लोन रेट रिसेट करना पड़ता है। असल में, कुछ बैंक, RBI द्वारा रेपो रेट में बदलाव करने के तुरंत बाद अपना इंटरेस्ट रेट रिसेट कर देते हैं लेकिन कुछ बैंक हर महीने की एक खास तारीख को या नियमित अंतराल पर ऐसा करते हैं। इस तरह, होम लोन उधारकर्ताओं को RBI की रेपो रेट कटौती का तुरंत लाभ मिलता है।

तो क्या BLR या MCLR से RLLR लोन सिस्टम में चले जाना चाहिए?

RBI द्वारा रेपो रेट में कटौती करने पर, कम EMI का लाभ उठाने के लिए, आप लोन ट्रांसफर चार्ज को ध्यान में रखते हुए BLR या MCLR से RLLR लोन सिस्टम में जा सकते हैं, ख़ास तौर पर यदि आप एक बैंक से दूसरे बैंक में लोन ट्रांसफर कर रहे हैं। ऐसा करने से EMI कम होने के साथ-साथ लोन का बोझ भी कम होगा, EMI की संख्या भी घटेगी, और जल्द-से-जल्द कर्ज से छुटकारा भी मिलेगा। इस समय ऐसा करना बहुत फायदेमंद हो सकता है क्योंकि RBI ने अब तक 225 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है जिससे अब यह फरवरी 2019 के 6.25% के मुकाबले 4% हो गया है। लेकिन, यह भी जान लें कि भविष्य में RBI द्वारा रेपो रेट बढ़ाने पर आपका लोन इंटरेस्ट रेट बढ़ जाएगा।

लोन सिस्टम बदलते समय क्रेडिट स्कोर पर ध्यान देना जरूरी है। RLLR लोन का इंटरेस्ट रेट आम तौर पर रेपो रेट + बैंक का मार्जिन + उधारकर्ता के रिस्क स्प्रेड को ध्यान में रखकर तय किया जाता है। यदि आपका क्रेडिट स्कोर बहुत अच्छा (आम तौर पर 750 से अधिक) है तो आपका बैंक आपसे रिस्क स्प्रेड नहीं भी ले सकता है जिससे इंटरेस्ट रेट और EMI अमाउंट कम रहेगा। यदि आपने BLR या MCLR लोन लिया है और आपका क्रेडिट स्कोर खराब है तो RLLR लोन सिस्टम में जाने पर आपको रिस्क स्प्रेड के कारण ज्यादा इंटरेस्ट रेट देना पड़ सकता है। इसलिए, ऐसा करने से पहले अपना क्रेडिट स्कोर जरूर देख लें और 750 से कम होने पर उसे ठीक करने की कोशिश करें। इसके अलावा, आपको लोन रीपेमेंट पीरियड के दौरान भी अपने क्रेडिट स्कोर को अच्छा रखना होगा क्योंकि RLLR लोन रीपेमेंट पीरियड के दौरान भी स्कोर गिरने पर इंटरेस्ट रेट बढ़ सकता है। आप अपने लोन की EMI और क्रेडिट कार्ड ड्यू का समय पर पूरा पेमेंट करके, अपने टोटल क्रेडिट कार्ड उपयोग को अपने टोटल क्रेडिट लिमिट का 30% तक सीमित रखकर, कम समय में कई बार क्रेडिट के लिए अप्लाई करने से बचकर, और अपने क्रेडिट इतिहास में कोई गलती दिखाई देने पर उसके बारे में इश्यूइंग एजेंसी को बताकर अपना स्कोर ठीक रख सकते हैं।

इसलिए, आपको अपना क्रेडिट स्कोर देखते रहना चाहिए और स्कोर कम होने पर उसे तुरंत बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए, चाहे आप अपना लोन सिस्टम बदलना चाहते हों या नहीं। क्रेडिट स्कोर अच्छा रहने पर आपको हर तरह के लोन सिस्टम में बेस्ट इंटरेस्ट रेट का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, यह भी जरूरी नहीं है कि आपका बैंक आपको हमेशा बेस्ट लोन ऑफर देगा; इसलिए आपको कोई भी फैसला लेने से पहले अलग-अलग बैंकों के लोन ऑफर्स की तुलना करनी चाहिए।

इस लेख के लेखक, BankBazaar.com के CEO आदिल शेट्टी हैं)
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी एक्सपर्ट की रिपोर्ट के आधार पर दी जा रही है। बाजार जोखिमों के अधीन होते हैं, इसलिए निवेश के पहले अपने स्तर पर सलाह लें।) ( ये लेख सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसको निवेश से जुड़ी, वित्तीय या दूसरी सलाह न माना जाए)

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