RTGS Timings, Charges: फंड ट्रांसफर का सेफ तरीका है आरटीजीएस, बिना झंझट लाखों में करें लेन देन

बिजनेस
ललित राय
Updated Apr 01, 2021 | 12:24 IST

फंड ट्रांसफर के तरीकों में आरटीजीएस का अपना अलग महत्व है। आरटीजीएस के बारे में यहां पर हर एक जानकारी साझा की जा रही है जो बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी है।

RTGS Timings, Charges: फंड ट्रांसफर का सेफ तरीका है आरटीजीएस, यहां जानें समय और शुल्क के बारे में
फंड ट्रांसफर के अलग अलग मोड में आरटीजीएस सुरक्षित तरीका 

आरटीजीएस टाइमिंग
पहले आरटीजीएस खास समय और हफ्ते के कुछ दिनों तक ही होते थे। लेकिन दिसंबर 2020 में आरबीआई ने बड़ा ऐलान करते हुए आरटीजीएस की सुविधा 24 घंटे और सात दिनों की सुविधा दी। इससे पहले आरटीजीएस के जरिए छुट्टी वाले दिन को छोड़कर सात बजे सुबह से लेकर शाम 6 बजे तक सुविधा थी। लेकिन 2019 में जब एनईएफटी की सुविधा सातों दिन और 24 घंटे के लिए की गई तो आरटीजीएस सिस्टम में बदलाव किया गया। सबसे बड़ी बात यह है कि फंड ट्रांसफर के दूसरे विकल्पों की तुलना में आरटीजीएस के कई फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप इसमें असीमित मात्रा में फंड ट्रांसफर पूरी सेफ्टी के साथ कर सकते हैं। 

आरटीजीएस प्रोसेसिंग फी
आरबीआई ने आरटीजीएस ट्रांजेक्शन के लिए प्रोसेसिंग फी के बारे में स्पष्ट दिशानिर्देश दिए हैं।
इनवर्ड ट्रांजेक्शन के लिए किसी तरह की फी नहीं वसूली जाती है। लेकिन आउटवर्ड ट्रांजेक्शन के लिए फी ली जाती है जो इस तरह है। 
यदि आर 200, 000 से लेकर 500, 000 तक का लेन देन करते हैं तो शुल्क की राशि 24.50 रुपये होगी जिसमें टैक्स नहीं शामिल है। इसी तरह से अगर ट्रांजेक्शन की राशि 5 लाख से ऊपर है तो शुल्क की राशि 49.50 रुपए है जिसमें टैक्स नहीं शामिल है। 

आरटीजीएस के फायदे

  1. जब कोई शख्स आरटीजीएस के जरिए फंड ट्रांसफर करता है तो बेनिफिसरी को ट्रांजेक्शन के शुरू होने के तत्काल बाद फंड मिल जाता है।
  2. आरटीजीएस के लिए बेनिफिसी का खाता नंबर, बैंक का नामस आईएफएसी कोड और खाताधारक का नाम जरूरी होता है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि एडवांस में भी फंड ट्रांसफर को शेडयूल कर सकते हैं।
  3. आरटीजीएस की पूरी प्रक्रिया पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की सीधी नजर रहती है लिहाजा ट्रांजेक्शन में किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है।
  4. एनईएफटी की तुलना में आरटीजीएस की प्रक्रिया तेज होती है। 
  5. आरटीजीएस में ट्रांजेक्शन की प्रक्रिया रियल टाइम में होती है, लिहाजा किसी तरह के रिस्क की संभावना बेहद कम हो जाती है। 

अगर आप ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं तो आप को चेक या डिमांड ड्राफ्ट की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके साथ ही बेनिफिसरी को बैंक की शाखा पर जाने की भी जरूरत नहीं होती है। 

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