पीएम मोदी ने बिहार में कोसी रेल महासेतु का किया उद्घाटन, बोले- 300 किमी की यात्रा सिर्फ 22 किमी में सिमटी

Kosi Rail Mahasetu inauguration : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक कोसी रेल महासेतु राष्ट्र को समर्पित किया और कई रेल परियोजनाओं का शुभारंभ किया।

PM Modi inaugurates 12 railway projects for Bihar, Kosi Rail Mahasetu
पीएम नरेंद्र मोदी 

मुख्य बातें

  • बिहार के लिए 12 रेल परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया
  • ऐतिहासिक कोसी रेल महासेतु बिहार वासियों को समर्पित किया गया, यह पुल 1.9 किलोमीटर लंबा है
  • कृषि सुधार बिल के विरोध पर पीएम मोदी ने कहा कि जिन्होंने दशकों तक देश पर राज किया वो भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं, किसानों से झूठ बोल रहे हैं

बिहार में अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इससे ठीक पहले हाल के कुछ दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार वासियों के लिए कई सौगात दे चुके हैं। एक बार फिर शुक्रवार (18 सितंबर 2020) बिहार के रेल यात्रियों की सुविधाओं के लिए 12 रेल परियोजनाओं का शुभारंभ किया। पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये से ऐतिहासिक कोसी रेल महासेतु राष्ट्र को समर्पित किया। कोसी रेल महासेतु को जनता को समर्पित किया जाना न सिर्फ बिहार के इतिहास में बल्कि पूर्वोत्तर क्षेत्र से संपर्क के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। साल 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कोसी मेगा ब्रिज लाइन परियोजना की आधारशिला रखी थी। कोसी रेल महासेतु 1.9 किलोमीटर लंबा है और इसके निर्माण में 516 करोड़ रुपए की लागत आई। इस परियोजना को जनता को समर्पित किए जाने से इलाके के लोगों का 86 वर्ष पुराना सपना साकार हो रहा है और लंबा इंतजार खत्म हो गया है। प्रधानमंत्री इस महासेतु को समर्पित करने के साथ ही सुपौल स्टेशन से सहरसा-आसनपुर कुफा डेमो ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इससे सुपौल, अररिया और सहरसा जिलों के लोगों के लिए काफी लाभदायक सिद्ध होगा। इससे इलाके के लोगों को कोलकाता, दिल्ली और मुंबई जैसे लंबी दूरी वाले स्थानों तक जाना और आना आसान हो गया है।

12 रेल परियोजनाओं के उद्घाटन के बाद पीएम मोदी ने कहा...  

इस मौक पर पीएम मोदी ने आज बिहार में रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नया इतिहास रचा गया है। कोसी महासेतु और किउल ब्रिज के साथ ही बिहार में रेल यातायात, रेलवे के बिजलीकरण, रेलवे में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने, नए रोजगार पैदा करने वाले एक दर्जन प्रोजेक्ट्स का आज शुभारंभ हुआ है। बिहार में गंगाजी, कोसी, सोन नदियों के विस्तार के कारण, बिहार के अनेक हिस्से एक दूसरे के कटे रहे हैं। नदियों के फैलाव वजह से होने वाला लंबा सफर बिहार के लोगों की एक समस्या रहा है। बिहार की इस बड़ी समस्या के समाधान के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। 

पीएम मोदी ने कहा कि 4 वर्ष पहले उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले दो महासेतु, एक पटना में और दूसरा मुंगेर में शुरु किए गए थे। इन दोनों रेल पुलों के चालू हो जाने से उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच, लोगों का आना-जाना और आसान हुआ है। करीब साढ़े आठ दशक पहले भूकंप की एक भीषण आपदा ने मिथिला और कोसी क्षेत्र को अलग-थलग कर दिया था। आज ये संयोग ही है कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के बीच इन दोनों आंचलों को आपस में जोड़ा जा रहा है।

पीएम ने कहा कि आज कोसी महासेतु होते हुए सुपौल-आसनपुर कुपहा के बीच ट्रेन सेवा शुरू होने से सुपौल, अररिया और सहरसा जिले के लोगों को बहुत लाभ होगा। यही नहीं, इससे नॉर्थ ईस्ट के साथियों के लिए एक वैकल्पिक रेलमार्ग भी उपलब्ध हो जाएगा। बिहार के लोग तो भली-भांति जानते हैं कि वर्तमान में निर्मली से सरांयगढ़ का सफर करीब-करीब 300 किमी का होता है। अब वो दिन ज्यादा दूर नहीं जब बिहार के लोगों को 300 किमी की ये यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।

पीएम ने कहा कि 300 किमी की ये यात्रा सिर्फ 22 किमी में सिमट जाएगी। बीते 6 साल से भारतीय रेल को नए भारत की आकांक्षाओं और आत्मनिर्भर भारत की अपेक्षाओं के अनुरूप ढालने का प्रयास किया जा रहा है। आज भारतीय रेल, पहले से कहीं अधिक स्वच्छ है। 

पीएम मोदी ने कहा कि आज भारतीय रेल के ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क को मानवरहित फाटकों से मुक्त कर, पहले से कहीं अधिक सुरक्षित बनाया जा चुका है। आज आत्मनिर्भरता और आधुनिकता की प्रतीक, वंदे भारत जैसी भारत में बनी ट्रेनें रेल नेटवर्क का हिस्सा होती जा रही हैं। बीते 6 साल से भारतीय रेल को नए भारत की आकांक्षाओं और आत्मनिर्भर भारत की अपेक्षाओं के अनुरूप ढालने का प्रयास किया जा रहा है। आज भारतीय रेल, पहले से कहीं अधिक स्वच्छ है।  रेलवे के आधुनिकीकरण का लाभ बिहार और पूर्वी भारत को मिल रहा है।

पीएम ने कहा कि MakeInIndia को बढ़ावा देने के लिए मधेपुरा में इलेक्ट्रिक लोको फैक्ट्री और मढ़ौरा में डीजल लोको फ़ैक्ट्री स्थापित की गई हैं। इन परियोजनाओं से बिहार में लगभग 44 हजार करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। बिहार में जिस तरह की परिस्थितियां रहीं हैं, उसमें रेलवे लोगों के आने-जाने का बहुत बड़ा साधन रही है। ऐसे में बिहार में रेलवे की स्थिति को सुधारना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक रहा है। 

पीएम मोदी ने कहा कि 2014 के पहले के 5 सालों में बिहार में सिर्फ सवा तीन सौ किलोमीटर नई रेल लाइन शुरु थी।  जबकि 2014 के बाद के 5 सालों में बिहार में लगभग 700 किलोमीटर रेल लाइन कमीशन हो चुकी हैं। यानी करीब दोगुने से अधिक नई रेल लाइन शुरु हुईं हैं। जिस तरह से कोरोना के समय में रेलवे ने काम किया है, काम कर रही है, उसके लिए मैं भारतीय रेल के लाखों कर्मचारियों की विशेष प्रशंसा करता हूं। देश के लाखों श्रमिकों को श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए रेलवे ने दिन-रात एक कर दिया था। 

पीएम मोदी ने कहा कि नीतीश जी की सरकार बनने से पहले तक बिहार में इक्का-दुक्का मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे। आज बिहार में 15 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज हैं, जिसमें से अनेक बीते कुछ वर्षों में ही बनाए गए हैं। कुछ दिन पहले ही बिहार में एक नए AIIMS की भी स्वीकृति दे दी गई है। 

कृषि सुधार बिल को लेकर किसानों की नाराजगी पर पीएम ने कहा....

पीएम मोदी ने कहा कि कल विश्वकर्मा जयंती के दिन लोकसभा में ऐतिहासिक कृषि सुधार विधेयक पारित किए गए हैं। इन विधेयकों ने हमारे अन्नदाता किसानों को अनेक बंधनों से मुक्ति दिलाई है। इन सुधारों से किसानों को अपनी उपज बेचने में और ज्यादा विकल्प और ज्यादा अवसर मिलेंगे। मैं देश के किसानों को इन विधेयकों के लिए बधाई देता हूं। किसान और ग्राहक के बीच जो बिचौलिए होते हैं, जो किसानों की कमाई का बड़ा हिस्सा खुद ले लेते हैं, उनसे बचाने के लिए ये विधेयक लाए जाने बहुत आवश्यक थे। ये विधेयक किसानों के लिए रक्षा कवच बनकर आए हैं। लेकिन कुछ लोग जो दशकों तक सत्ता में रहे हैं, देश पर राज किया है, वो लोग किसानों को इस विषय पर भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं, किसानों से झूठ बोल रहे हैं।

पीएम ने कहा कि चुनाव के समय किसानों को लुभाने के लिए ये बड़ी-बड़ी बातें करते थे, लिखित में करते थे, अपने घोषणापत्र में डालते थे और चुनाव के बाद भूल जाते थे। आज जब वही चीजें भाजपा- एनडीए सरकार कर रही है, तो ये भांति-भांति के भ्रम फैला रहे हैं।  जिनएग्रीकल्चर मार्केट के प्रावधानों में बदलाव का वो विरोध कर रहे हैं, उसी बदलाव की बात इन लोगों ने अपने घोषणापत्र में भी लिखी थी। लेकिन अब जब एनडीए सरकार ने ये बदलाव कर दिया है, तो ये लोग इसका विरोध करने पर, झूठ फैलाने पर उतर आए हैं। 

पीएम ने कहा कि  ये लोग भूल रहे हैं कि देश का किसान कितना जागृत है। वो ये देख रहा है कि कुछ लोगों को किसानों को मिल रहे नए अवसर पसंद नहीं आ रहे। देश का किसान ये देख रहा है कि वो कौन से लोग हैं, जो बिचौलियों के साथ खड़े हैं।  अब ये दुष्प्रचार किया जा रहा है कि सरकार के द्वारा किसानों को MSP का लाभ नहीं दिया जाएगा।  ये भी मनगढ़ंत बातें कही जा रही हैं कि किसानों से धान-गेहूं इत्यादि की खरीद सरकार द्वारा नहीं की जाएगी।

पीएम ने कहा कि ये सरासर झूठ है, गलत है, किसानों को धोखा है। हमारी सरकार किसानों को MSP के माध्यम से उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। पहले भी थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। सरकारी खरीद भी पहले की तरह जारी रहेगी। कोई भी व्यक्ति अपना उत्पाद, दुनिया में कहीं भी बेच सकता है, जहां चाहे वहां बेच सकता है। लेकिन केवल किसान भाई-बहनों को इस अधिकार से वंचित रखा गया था। अब नए प्रावधान लागू होने के कारण, किसान अपनी फसल को देश के किसी भी बाजार में, अपनी मनचाही कीमत पर बेच सकेगा। किसानों के लिए जितना एनडीए शासन में पिछले 6 वर्षों में किया गया है, उतना पहले कभी नहीं किया गया। किसानों को होने वाली एक-एक परेशानी को समझते हुए, एक-एक दिक्कत को दूर करने के लिए हमारी सरकार ने निरंतर प्रयास किया है। 

पीएम ने कहा मैं आज देश के किसानों को नम्रता पूर्वक स्पष्ट संदेश देना चाहता हूं। आप किसी भी तरह के भ्रम में मत पड़िए। इन लोगों से देश के किसानों को सतर्क रहना है। ऐसे लोगों से सावधान रहें, जिन्होंने दशकों तक देश पर राज किया और जो आज किसानों से झूठ बोल रहे हैं।  वो लोग किसानों की रक्षा का ढिंढोरा पीट रहे हैं लेकिन दरअसल वे किसानों को अनेक बंधनों में जकड़कर रखना चाहते हैं। वो लोग बिचौलियों का साथ दे रहे हैं, वो लोग किसानों की कमाई को बीच में लूटने वालों का साथ दे रहे हैं। ये देश की जरूरत है और समय की मांग भी है। किसान, महिलाएं, नौजवान, राष्ट्र के निर्माण में सभी को सशक्त करना हमारा दायित्व है। आज जितनी भी परियोजनाओं को शुरु किया गया है, वो इसी दायित्व का हिस्सा है। 

 इसके साथ ही पीएम ने कहा मास्क जरूर पहनें, दो गज की दूरी का हमेशा ध्यान रखें, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता, अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए, काढ़ा पीते रहें, गुनगुना पानी पीते रहें। आप सतर्क रहिए, सुरक्षित रहिए, स्वस्थ रहिए। 

इस मौके पर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में रेलवे ने बिहार में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास, लोको फैक्ट्री, विद्युतीकरण, आधुनिकीकरण, नई रेल लाइन, फ्रेट कॉरिडोर कनैक्टिविटी जैसे अनेकों कार्यों से रेलवे निर्माण कर रही है। प्रसिद्ध फिल्म कलाकार संजय मिश्रा के दादा जी के समय आई बाढ और भूकंप से कोसी का पुल टूट गया था, जिसके निर्माण का सपना वो बहुत समय तक देखते रहे। आज 2020 में उनके दादा जी के उस सपने को कोसी रेल महासेतु बना कर पीएम मोदी जी की सरकार ने पूरा किया है। 

कोसी महा सेतु परियोजना के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने 2003-04 में मंजूरी दे दी थी। कोसी महासेतु की लंबाई 1.9 किलोमीटर है और इसके निर्माण में 516 करोड़ रुपए की लागत आई है। भारत-नेपाल सीमा के करीब होने के चलते इस पुल का रणनीतिक महत्व भी है। यह परियोजना कोविड महामारी के दौरान पूरी हुई जिसके निर्माण में घर वापसी करने वाले प्रवासी मजदूरों ने भी भाग लिया।

इसमें किउल नदी पर एक नया रेल पुल, दो नई रेल लाइनें, 5 विद्युतीकरण परियोजनाएं, एक विद्युत लोकोमोटिव शेड और बाढ़-बख्तियारपुर के बीच तीसरी नई लाइन परियोजना शामिल हैं। प्रधानमंत्री दो नई लाइन परियोजनाओं हाजीपुर-घोसवार-वैशाली और इस्लामपुर-नातेशर का भी उदघाटन करेंगे। श्री मोदी करनौती-बख्तियारपुर संपर्क बाइपास और बाढ़-बख्तियारपुर के बीच तीसरी लाइन का भी उद्घाटन किया गया है। प्रधानमंत्री मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी, कटिहार-नई जलपाईगुड़ी, समस्तीपुर-दरभंगा-जयनगर, समस्तीपुर-खगड़िया, भागलपुर-शिवनरायणपुर खंडों के विद्युतीकरण से जुड़ी परियोजना का भी उद्घाटन किया।

वर्ष 1887 में निर्मली और भापतियाही (सरायगढ़) के बीच एक मीटर गेज लाइन शुरू की गई थी। लेकिन वर्ष 1934 में आई भयानक बाढ़ और भारत-नेपाल में आए भूकंप के चलते यह लाइन तबाह हो गई थी। कोसी नदी की प्रकृति के चलते लंबे समय तक इस रेल मार्ग को शुरू किए जाने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
 

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