Rail engines to Bangladesh : भारत ने बांग्लादेश को दिए 10 रेल इंजन, देखें वीडियो

कोरोना वायरस महामारी के बावजूद पड़ोसी देशों के साथ भारत संबंध बेहतर करने का प्रयास करता रहा है। इसी कड़ी में बांग्लादेश को 10 रेलवे इंजन सौंपे।

India handed over 10 railway engines to Bangladesh, watch video
भारत ने बांग्लादेश को दिए रेल इंजन  |  तस्वीर साभार: Twitter

मुख्य बातें

  • ये इंजन बांग्लादेश में यात्रियों की संख्या बढ़ाने, मालगाड़ी के परिचालन में काफी सहायता करेंगे
  • रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बांग्लादेश रेल नेटवर्क के विकास में पूर्ण, उदार और असीमित मदद देने का आश्वासन दिया
  • विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-बांग्लादेश संबंधों की मजबूती को रेखांकित किया

नई दिल्ली : भारतीय परंपरा हमेशा से दूसरों को मदद करने की रही है। कोरोना वायरस महामारी के दौरान दुनिया के देश सिर्फ अपने बारे में सोच रहे हैं। इस समय भी भारत ने अमेरिका को दवाई भेजकर और चीन को मास्क भेजकर मदद की थी। अब भारत ने अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश को 10 रेलवे इंजन दी है। एक समारोह में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, श्री पीयूष गोयल ने 10 ब्रॉडगेज (बीजी) इंजनों को बांग्लादेश के लिए रवाना किया। भारत सरकार की ओर से अनुदान सहायता के अंतर्गत इन रेल इंजनों को सौंप जाना अक्तूबर, 2019 में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा के दौरान किए गए एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता को पूरा करता है।

बांग्लादेश रेलवे की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, भारत ने इंजनों में जरूरी संशोधन किया गया है। ये इंजन बांग्लादेश में यात्रियों की संख्या बढ़ाने और मालगाड़ी के परिचालन को बेहतर बनाने में सहायता प्रदान करेंगे। हाल ही में, भारत और बांग्लादेश के बीच पार्सल और कंटेनर ट्रेन सेवाओं की भी शुरुआत की गई है। इससे द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्र में काफी हद तक बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है।

इस मौके पर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि बांग्लादेश रेलवे द्वारा उपयोग करने के लिए 10 ब्रॉडगेज इंजन सौंपने में मुझे बहुत खुशी हो रही है। ये इंजन भारत और बांग्लादेश के बीच चल रहे मालगाड़ी परिचालन को संभालने में उपयोगी साबित होंगे। बांग्लादेश में इन इंजनों की उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए उन्हें संशोधित किया गया है। हम वृद्धि और विकास को प्राप्त करने के अपने-अपने प्रयासों में बहुत हद तक प्रगति कर रहे हैं। भारत और बांग्लादेश ने पिछले कुछ वर्षों में बहुत आगे तक का सफर तय किया है। आज हमारे द्विपक्षीय संबंध अपने सबसे अच्छे दौर में हैं। हमारे पड़ोस की नीति, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विकास’ वाले दर्शन का अनुसरण करती है। 

गोयल ने कहा कि भारत और बांग्लादेश दोनों का नेतृत्व, दोनों देशों के बीच 1965 से पहले के रेल संपर्कों को पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उस समय मौजूदा 7 रेल संपर्कों में से, वर्तमान में 4 क्रियाशील हैं। इस क्षेत्र में रेल संपर्कों को और मजबूत करने के लिए, भारत के अगरतला और बांग्लादेश के अखौरा के बीच एक नए रेल संपर्क का निर्माण किया जा रहा है जिसे भारत के अनुदान सहायता के अंतर्गत वित्तपोषित किया जा रहा है। कोविड-19 के दौरान, दोनों रेलवे द्वारा संकट का प्रबंधन करने में अनुकरणीय दूरदर्शिता दिखाई गई है और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन को आगे बढ़ाते हुए आपूर्ति सीरीज को बरकरार रखा गया है। 

गोयल ने कहा कि बांग्लादेश में बेनापोल के रास्ते पार्सल ट्रेन और कंटेनर ट्रेन सेवाएं शुरू की गई हैं। इन दोनों सेवाओं की शुरुआत जुलाई माह में की जा चुकी हैं। इसके द्वारा हम लोग दोनों ओर से उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला को स्थानांतरित करने में सक्षम हुए हैं। रेलवे ने यह सुनिश्चित किया है कि दोनों देश बिना किसी व्यवधान और स्वास्थ्य जोखिम के अपने द्विपक्षीय व्यापार को जारी रख सकते हैं। दोनों रेलवे लोगों के बेहतर भविष्य को सुनिश्चित कर रहे हैं।” 

इस अवसर पर विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने कहा कि बांग्लादेश को 10 इंजन सौंपने वाले इस समारोह में शामिल होकर मुझे खुशी प्राप्त हो रही है। मुझे यह जानकर खुशी महसूस हो रही है कि दोनों देशों के बीच पार्सल और कंटेनर ट्रेनों की शुरुआत कर दी गई हैं। इससे हमारे कारोबारियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि रेलवे द्वारा व्यापार के आवामगन को सुनिश्चित किया गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान, विशेष रूप से रमजान के पवित्र महीने में अनिवार्य आपूर्तियां सुनिश्चित की गई। 

हाल के दिनों में, भारत और बांग्लादेश ने कोविड-19 महामारी के प्रभाव को कम करने के लिए अपने रेल सहयोग को बढ़ाया है, क्योंकि सड़क-सीमा के माध्यम से व्यापार करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। लागत प्रभावी और पर्यावरण अनुकूल समाधान के रूप में, रेलवे ने आवश्यक वस्तुओं को सीमा पार पहुंचाने में मदद की है। दोनों पक्षों की ओर से जून माह में मालगाड़ियों का अब तक का सबसे ज्यादा आवागमन देखा गया। आवश्यक वस्तुओं और कच्चे माल को ले जाने के लिए कुल मिलाकर 103 मालगाड़ियों का उपयोग किया गया।


 

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