निवेशकों की 5 चिंताएं और समाधान करने के तरीके

भारतीय शेयर बाजार लगातार ऊपर जा रहा है। लेकिन उतार-चढ़ाव भी हो रहे हैं। हम यहां उन 5 चिंताओं पर विचार कर रहे हैं जो निवेशक के रूप में आपको प्रभावित कर सकते हैं।

Investors Concerns
निवेशकों की चिंताएं (तस्वीर-istock) 

हाल ही में भारतीय स्टॉक मार्केट ने अपने अभी तक के सबसे ऊंचे स्तर को प्राप्त किया है और बीएसई सेंसेक्स ने 60,000 के मनोवैज्ञानिक मार्क को पार कर दिखाया है। लेकिन इक्विटी निवेशकों को मौजूदा मार्केट बहुत अधिक उतार-चढ़ाव भरी नजर आती है जो आने वाले समय में करेक्शन का पूर्वानुमान व्यक्त कर रहे हैं। डेट निवेशकों के लिए, निवेश पर रिटर्न कोई बहुत आकर्षक नजर नहीं आ रहे हैं। इस प्रकार के उतार-चढ़ाव से निवेशक को चिंता होने लगती है और वे अपने अगले कदम के प्रति सजग हो जाते हैं। इसलिए, या तो वे निवेश से बाहर निकल जाते हैं या अपनी निधियों को एकल फंड में ही केन्द्रित कर देते हैं। इस प्रकार के कदमों का उनके धन सृजन के दीर्घकालिक लक्ष्यों पर प्रभाव पड़ता है। इस लेख में, हम उन पांच चिंताओं पर विचार करेंगे जो निवेशक के रूप में आपको प्रभावित कर रहे हो सकते हैं और वे संभावित समाधान जिनसे आपको सहायता मिल सकती है।

पहली चिंता: मार्केट में जल्द ही बहुत बड़ी गिरावट आ सकती है

अभी तक के सबसे ऊंचे स्तर को छूने के साथ ही, निवेशक संभावित करेक्शन की उम्मीद कर रहे हैं जिससे उनके पोर्टफोलियो पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। परिणामस्वरूप, अनेक निवेशकों ने अपने इक्विटी निवेश को रोक दिया है या बड़े पैमाने पर रिडम्पशन का विकल्प चुना है। स्टॉक मार्केट में करेक्शन आना कोई नई बात नहीं है और ऐतिहासिक ट्रेंड यह बताते हैं कि स्टॉक मार्केट में बड़ी गिरावट के बाद धीरे-धीरे रिकवरी हो जाती है। दीर्घकाल में इक्विटी इंस्ट्रुमेंट से इंफ्लेशन को हराने में मदद मिलती है। जब बाजार जोखिम भरा हो तो सजग होने में किसी तरह की कोई बुराई नहीं है, लेकिन उसी के साथ ही, आपको उच्चतर रिटर्न प्राप्त करने के किसी भी अवसर को गंवाना नहीं चाहिए। अपने आप को बाजार से दूर ले जाने की बजाए, आप इक्विटीज में अपने निवेश को कम करने पर विचार कर सकते हैं और फिर से निवेश शुरू करने से पहले आप एक स्वस्थ करेक्शन तक की प्रतीक्षा कर सकते हैं। जब मार्केट असहज रूप से ऊंची हो तो आप बड़े एक मुश्त निवेश से बच सकते हैं और इसकी बजाए, सिस्टेमैटिक निवेश प्लान (एसआईपी) को चुन सकते हैं। इसके अलावा, आपको विभिन्न एसेट क्लासेज (परिसंपत्ति वर्ग) में निवेश की गई अपनी निधियों के साथ भली भांति संतुलित निवेश पोर्टफोलियो पर काम करना चाहिए ताकि मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद आपके रिटर्न बढ़ते रहें।

दूसरी चिंता: क्या मैं रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त निवेश कर रहा हूं?

आपने अपने करियर की शुरुआत में रिटायरमेंट प्लान जरूर तैयार किया होगा। इन्फ्लेशन और रिटर्न की वजह से हालांकि कुछ निवेश धीमे किए जा रहे हैं, लेकिन आपको इस बात की चिंता हो रही होगी कि क्या आप रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त निवेश कर रहे हैं। रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग करते समय, ध्यान रखें कि आपको इतनी निधि का सृजन करना है जो लंबे समय तक चलती रहे। आप नियमित रूप से अपने निवेश की समीक्षा करके और वर्तमान स्थिति तथा इंफ्लेशन रेट के अनुसार उन्हें अलाइन कर सकते हैं। आप अपनी मौजूदा जीवनशैली, वह आय जिसकी आप बचत कर सकते हैं, चिकित्सा और सामान्य इंफ्लेशन रेट तथा आपके नियमित खर्चों के अनुसार उन्हें अलाइन कर सकते हैं। ऐसा करते समय, उन खर्चों को कम करें जिनकी जरूरत आपको रिटायर होने के बाद नहीं होगी। उदाहरण के लिए, जब आप रिटायर होते हैं, तो आपके आने-जाने के खर्च कम हो जाएंगे। इससे आपको वह अनुमानित आंकड़ा प्राप्त हो सकेगा जो आप रिटायर होने पर बचा सकेंगे और आपको इसके अनुसार अपने निवेश को अलाइन कर लेना चाहिए।

तीसरी चिंता: क्या टैक्स से मेरा रिटर्न कम हो जाएगा?

कुछ लोग टैक्स के प्रभाव के बारे में सोचे बिना निवेश करते हैं। परिणामस्वरूप, उन्हें वास्तविक रिटर्न्स से चिंता हो सकती है। उदाहरण के लिए, यदि आप 30% की उच्चतम टैक्स श्रेणी में आते हैं और आप बैंक मे 5% प्रति वर्ष की दर पर फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करते हैं, तो आपको केवल 3.5% प्रति वर्ष का ही नेट रिटर्न प्राप्त होगा। ये मान लेते हैं कि वर्तमान इंफ्लेशन रेट 5% प्रति वर्ष है, तो इस मामले में आपकी वास्तविक रिटर्न रेट नेगेटिव 1.5% होगी।

निवेश करने से पहले आपको इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि जिस रिटर्न की आप उम्मीद करते हैं, उस पर कितना टैक्स देना पड़ेगा। यदि आपने गलती से ऐसे इंस्ट्रुमेंट में निवेश किया है जिससे आपको निम्न रिटर्न मिलता है, और टैक्स रेट उच्च है, तो आपको उस निवेश इंस्ट्रुमेंट को ऐसे इंस्ट्रुमेंट में स्विच कर लेना चाहिए जो कि अधिक टैक्स-एफिशिएंट है और आपको उच्चतर रिटर्न प्रदान करता है।

चौथी चिंता: क्या मैं सही इंस्ट्रुमेंट में निवेश कर रहा हूं?

जैसे ही आप अपना करियर शुरू करते हैं, निवेश शुरू कर देना अच्छी बात होती है। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि आप सही निवेश इंस्ट्रुमेंट को चुनते हैं, जो आपकी जोखिम उठाने की क्षमता, रिटर्न की आवश्यकता के अनुरूप है, और वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में जिससे आपको सहायता मिलती है। यदि आप इंस्ट्रुमेंट की अपनी पसंद से चिंतित हैं, तो अपने वित्तीय स्वास्थ्य का आकलन करवाने के लिए आप पंजीकृत निवेश सलाहकार की सहायता ले सकते हैं। जितनी जल्दी आपके करियर में संभव हो सके, अपने निवेश को सही दिशा में अलाइन करवा लेना आपके लिए अच्छा साबित होगा।

5वीं चिंता: क्या मेरे निवेश से मुझे आपातस्थिति में सहायता मिल सकेगी?

ऐसे इंस्ट्रुमेंट में निवेश करना जो आपको हाई लिक्विडिटी प्रदान करते है और साथ ही उन पर रिटर्न अर्जित करने का मौका भी प्रदान करते है, ऐसा करना वित्तीय आपातस्थिति में भी उपयोगी साबित हो सकता है। कभी-कभी लोग, दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों पर अधिक बल देते हैं और ऐसे इंस्ट्रुमेंट्स में निवेश करते हैं जिनकी लिक्विडिटी कम होती है, और यदि अल्प अवधि में उनको लिक्विडेट किया जाता है तो अधिक टैक्स देना पड़ता है। वित्तीय आपातस्थिति के दौरान, अपने निवेश किए गए फंड्स का इस्तेमाल करने की बजाए, उन्हें पैसा उधार लेना पड़ता है। पहले आपको उचित निवेश इंस्ट्रुमेंट में निवेश करके अपने आपातकालीन फंड का सृजन करना चाहिए और उसके बाद अन्य वित्तीय लक्ष्यों में निवेश करने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। आदर्श रूप से, आपके पास इतना आपातकालीन फंड होना चाहिए जो लगभग 6 से 12 महीनों तक आपके नियमित खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त साबित हो।

जब आपकी मेहनत की कमाई दांव पर लगी हो, तो चिंतित होना स्वभाविक ही है। शांत बने रहना और धन से संबंधित ऐसे निर्णय लेना महत्वपूर्ण है जिनका धन सृजन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता हो।

(इस लेख के लेखक, BankBazaar.com के CEO आदिल शेट्टी हैं)
(डिस्क्लेमर:  ये लेख सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसको निवेश से जुड़ी, वित्तीय या दूसरी सलाह न माना जाए)

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