क्रेडिट सुइस की रिपोर्ट, जानें अगले वित्त वर्ष में कितनी रह सकती है भारत की आर्थिक वृद्धि दर

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Dec 10, 2021, 11:04 AM IST

स्विस ब्रोकरेज क्रेडिट सुइस कंपनी की नीति के अनुरूप वास्तविक आर्थिक वृद्धि का अनुमान नहीं जताती है।

क्रेडिट सुइस की रिपोर्ट, जानें अगले वित्त वर्ष में कितनी रह सकती है भारत की आर्थिक वृद्धि दर

नई दिल्ली। स्विस ब्रोकरेज क्रेडिट सुइस (Credit Suisse) ने उम्मीद जताई है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में गतिविधियां सकारात्मक रहेंगी और अगले वित्त वर्ष में देश 9 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज कर सकता है। वहीं स्विट्जरलैंड की ब्रोकरेज फर्म चालू वित्त वर्ष के लिए 8.4 से 9.5 फीसदी के पूर्वानुमान से अधिक रहेगी। यह लगभग 10.5 फीसदी पर रह सकती है।

अपनी नीति के अनुरूप कंपनी वास्तविक आर्थिक वृद्धि का अनुमान नहीं जताती है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों और अनुमानों के सांख्यिकी विश्लेषण से संकेत मिलता है कि 2022-23 की अवधि में आर्थिक विकास 9 फीसदी तक रह सकती है

इस संदर्भ में क्रेडिट सुइस के एशिया प्रशांत के लिए इक्विटी स्ट्रैटेजी मामलों के सह-प्रमुख और भारत इक्विटी रणनीतिकार नीलकंठ मिश्रा ने बताया कि उन्हें जीडीपी  पूर्वानुमान में वृद्धि की उम्मीद है क्योंकि आर्थिक सुधार (Economic Recovery) ने सकारात्मक रूप से आश्चर्यचकित किया है। उन्होंने कहा कि, 'हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2023 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 4 फीसदी का अपग्रेड हो सकता है क्योंकि उत्पादन महामारी से पहले के स्तर तक पहुंच सकता है।

अर्थव्यवस्था में सकारात्मक गतिविधियां रहेंगी जारी 
मिश्रा ने कहा कि, 'भले ही पुनरुद्धार अब तक व्यापक नहीं हो, लेकिन अगले तीन से छह महीनों में कम आय वाली अधिकतर नौकरियों की स्थिति ठीक होने की पूरी संभावना है। अर्थव्यवस्था में सकारात्मक गतिविधियां जारी रहने की उम्मीद हैं।'

आगे उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ऊर्जा की कीमतें उच्च हैं। अर्थव्यवस्था में आयात वृद्धि में तेजी को बनाए रखने की क्षमता है। यदि आयातित ऊर्जा की कीमतें (कच्चा तेल, गैस, कोयला, फर्टिलाइजर और पाम ऑयल) ऊंची बनी रहती हैं, तो विकास की गति कम हो सकती है।

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में, रेवेन्यू रिसीप्ट पूरे वर्ष के अनुमान से 16 फीसदी अधिक थीं और आरबीआई के पास केंद्र सरकार की नकद शेष राशि जीडीपी के हिस्से के रूप में सामान्य से 1.5 से 2 फीसदी अधिक है। मिश्रा ने यह भी कहा कि नए कोविड-19 ​​​​वैरिएंट ओमिक्रोन या डेल्टा वैरिएंट से जोखिम वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भारत की तुलना में अधिक हो सकता है।

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