कोरोना वायरस के असर से सर्विस सेक्टर प्रभावित, कैंसल किए जा रहे इंटरव्यू और ज्वाइनिंग

कोरोना वायरस जैसी महामारी का असर सर्विस सेक्टर पर भी पड़ा है। नौकरियों और इंटरव्यू पर इसका काफी असर देखने को मिल रहा है। जानिए क्या हैं हालात-

covid-19 impact on job hiring
कोरोना महामारी के कारण नौकरियों पर पड़ा असर (source: pixabay)  |  तस्वीर साभार: Representative Image

मुख्य बातें

  • कोरोना वायरस के कारण सर्विस सेक्टर पर पड़ा इसका बुरा असर
  • कोविड-19 जैसी महामारी ने अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ी
  • नौकरियों, इंटरव्यू और ज्वाइनिंग पर डाला असर

नई दिल्ली : कोविड-19 महामारी के कारण नौकरियों पर भी इसका खास असर पड़ा है। कंपनियों को पहले से शिड्यूल्ड इंटरव्यू को कैंसल करना पड़ रहा है। 60-65 फीसदी तय इंटरव्यू को या तो रद्द करना पड़ रहा है या तो उसे आगे की ओर खिसकाना पड़ रहा है। कोरोना वायरस से बचाव के कारण पूरे देशभर में लॉकडाउन किया गया है, इसके चलते लोगों को घरों में रहने को कहा गया है ताकि बाहरी लोगों को संपर्क में आने से बचा जा सके और कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा कम हो। 

ओवरऑल हायरिंग पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट के मुताबिक कोरोना महामारी ने ना सिर्फ अर्थव्यवस्था पर मार की है बल्कि सर्विस सेक्टर की भी इसने कमर तोड़ कर रख दी है। एक तरफ जहां कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दे दी है वहीं दूसरी तरफ नए कैंडिडेट की हायरिंग भी पुरी तरह से रुक गई है। नए इंटरव्यू को कैंसल किए जा रहे हैं या फिर उनकी डेट आगे बढ़ाई जा रही है।

इतना ही नहीं अगर किसी ने इंटरव्य पास कर लिया है तो वह कंपनी ज्वाइन नहीं कर पा रहा है उसकी ज्वाइनिंग डेट रद्द कर दी गई है। अगर आगे भी स्थिति ऐसी ही रही तो इस तरह के कैंडिडेट का नौकरी ज्वाइन कर पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा और बात उनके रोजगार पर आ जाएगी। इस तरह से कहा जा सकता है कि रोजगार की समस्या आगे और भी खराब हो सकती है। 

इस समय कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रोडक्टिविटी को लेकर है कि इतनी प्रॉब्लम्स और क्राइसिस के बीच वे किस तरह अपनी प्रोडक्टिविटी को बढ़ा सकते हैं। कई कंपनियों ने अपने यहां हायरिंग फ्रीज कर दी है। अभी तक कोरोना वायरस महामारी के रुकने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं ऐसे में कुछ स्पष्ट रुप से नहीं कहा जा सकता है कि हायरिंग को कब से शुरू किया जाएगा। बिजनेस कंपनियों की ना सिर्फ प्रोडक्टिविटी बल्कि ग्रोथ और रेवेन्यू भी इस वजह से कम हो रही है।

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