कोरोना वायरस: लॉकडाउन के दौरान पैसों से जुड़ी ये 3 गलतियां करने से बचें

Financial decision during lockdown: कोरोना वायरस में लॉकडाउन के दौरान फाइनेंसियल फैसले लेने में कुछ सावधानियां बरतें।

Avoid making these 3 money-related mistakes during coronavirus lockdown
पैसों से जुड़ी ये 3 गलतियां करने से बचें 

अप्रत्याशित रूप से पूरे देश को किए गए इस लॉकडाउन के दौरान, इस जानलेवा कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाना अब सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है। चारों तरफ फैल रही इस कोरोना वायरस वैश्विक महामारी ने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को पहले ही प्रभावित करना शुरू कर दिया है। शेयर मार्केट में बड़ी तेज गिरावट देखने को मिल रही है और वहां काफी उथल-पुथल मचा हुआ है जिससे सालों का मुनाफा साफ हो गया है। इसलिए यह समझा जा सकता है कि लोग ऐसे मुश्किल समय में भयभीत होकर फाइनेंसियल फैसले क्यों ले रहे हैं। लेकिन डर से कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता क्योंकि ऐसे समय में आवेग में आकर फैसले लेने पर आगे चलकर इसका बुरा असर देखने को मिल सकता है। हमने यहाँ पैसों से जुड़ी कुछ आम गलतियों के बारे में बताया है जिनसे आपको इस मुश्किल घड़ी में बचकर रहना चाहिए।

एक पर्याप्त आकार के इमरजेंसी फंड का न होना
ऐसे समय में एक पर्याप्त आकार के इमरजेंसी फंड का होना बेहद जरूरी है। जबकि "पर्याप्त" शब्द का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग हो सकता है, लेकिन यहाँ पर्याप्त शब्द का मतलब यही है कि आपके इमरजेंसी फंड में इतना पैसा तो जरूर होना चाहिए कि उससे कम से कम 6 महीने का खर्च चल सके। आप चाहें तो अपनी जरूरत के हिसाब से इस फंड के आकार को बढ़ा भी सकते हैं। एक इमरजेंसी फंड उस समय बड़े काम आता है जब अचानक नौकरी छूट जाती है, कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाती है या किसी दूसरी तरह की फाइनेंसियल इमरजेंसी आ जाती है और यह पैसे उधार लेने की सम्भावना को भी कम करता है। इसके अलावा, अपने इमरजेंसी फंड के पैसे को एक सेविंग्स अकाउंट या एक फिक्स्ड डिपोजिट जैसे किसी अत्यंत लिक्विड और सुलभ इन्वेस्टमेंट ऑप्शन में ही रखना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर आप तुरंत अपने पैसे निकाल सके।

सख्त बजट नहीं बनाए रखना
एक पर्याप्त आकार का इमरजेंसी फंड तैयार करने के कई तरीकों में से एक तरीका यह भी है कि आपको अपने खर्च पर सख्त नियंत्रण रखना चाहिए। इसलिए, अपनी जरूरतों के आधार पर बजट तैयार करें और उसमें अपने जरूरी खर्च को प्राथमिकता दें। आप चाहें तो अपने किसी बड़े मनचाहे खर्च को कुछ दिन के लिए टाल भी सकते हैं जब तक सब कुछ सामान्य नहीं हो जाता ताकि आपके पास ज्यादा से ज्यादा पैसे बचे रह सकें। बहुत ज्यादा जरूरी न होने पर मोबाइल, लैपटॉप जैसी चीजों पर खर्च न करके किराया, EMI, जरूरी किराने का सामान, यूटिलिटी बिल और दवाइयों के खर्च को अधिक प्राथमिकता दें। लॉकडाउन के माध्यम से आपको रोज की आवाजाही और बाहर खाने-पीने जैसे कई खर्च में कटौती करने में भी मदद मिलेगी जिससे आपको अपने खर्च में कटौती करने में बड़ी आसानी होगी।

आवेश में आकर SIP बंद करना
इन दिनों कई म्यूच्यूअल फंड्स के रिटर्न निगेटिव दिखाई दे रहे हैं। लेकिन, यदि आपने एक अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले फंड में एक SIP के माध्यम से इन्वेस्टमेंट किया है और यदि आपने यह इन्वेस्टमेंट, अपने लम्बे समय वाले फाइनेंसियल लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया है तो आपको अच्छी तरह सोच-विचार किए बिना अपना इन्वेस्टमेंट बंद नहीं करना चाहिए। SIP के माध्यम से इन्वेस्ट करने पर इन्वेस्टर्स को रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का बेनिफिट मिलता है जिसे ख़ास तौर पर मार्केट के उतार-चढ़ाव के झटकों से निपटने और लम्बे समय में मनचाहा रिटर्न कमाने के लिए ही तैयार किया गया है। इसके अलावा, एक मुश्किल दौर से गुजर रहे मार्केट की मदद से आपको कम कीमत पर म्यूच्यूअल फंड की ज्यादा यूनिटें खरीदने का मौका भी मिल सकता है। डरकर अपने SIP इन्वेस्टमेंट को निकाल लेने पर काफी बड़ी मात्रा में पैसे का नुकसान उठाना पड़ सकता है और आपके फाइनेंसियल लक्ष्य अधूरे रह सकते हैं। इसलिए, कोई भी फैसला लेने से पहले इन सभी बातों को ध्यान में रखें और कोई संदेह होने पर अपने फाइनेंसियल एडवाइजर की सलाह लें।

मुश्किल समय में शांत रहना जरूरी होता है। इसलिए, अपनी सेहत का ख्याल रखें, अपने परिवार के सदस्यों की देखभाल करें, पूरी सख्ती के साथ लॉकडाउन के निर्देशों का पालन करें और डरकर फाइनेंसियल फैसले लेने से बचें। आपको हमारी तरफ से ढेर सारी शुभकामनाएं!

(इस लेख के लेखक, BankBazaar.com के CEO आदिल शेट्टी हैं)
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी एक्सपर्ट की रिपोर्ट के आधार पर दी जा रही है। बाजार जोखिमों के अधीन होते हैं, इसलिए निवेश के पहले अपने स्तर पर सलाह लें।)

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